शख्सियतस्मृति मेरी तन्हाई का ये अंधा शिगाफ़, ये के सांसों की तरह मेरे साथ चलता रहाउमा रागAugust 1, 2018August 1, 2018 by उमा रागAugust 1, 2018August 1, 20184 2557 मीना कुमारी (1 अगस्त, 1933 – 31 मार्च, 1972) का असली नाम महजबीं बानो था , इनका जन्म मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था. वर्ष 1939...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति सत्ता संपोषित मौजूदा फासीवादी उन्माद प्रेमचंद की विरासत के लिए सबसे बड़ा खतरा:डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सुमनसमकालीन जनमतAugust 1, 2018August 1, 2018 by समकालीन जनमतAugust 1, 2018August 1, 201802639 लोकतंत्र, संविधान और साझी संस्कृति के नेस्तनाबूद करने की हो रही है गहरी साजिश-कल्याण भारती प्रेमचंद के सपनों के भारत से ही बचेगी हमारी साझी...
कविताशख्सियत अदनान को ‘क़िबला’ कविता के लिए भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कारउमा रागAugust 1, 2018August 1, 2018 by उमा रागAugust 1, 2018August 1, 20184 3740 युवा कवि अदनान कफ़ील ‘ दरवेश ‘ को वर्ष 2018 के लिए भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई है. 30 जुलाई...
शख्सियत रंगों और कूचियों के अनोखे उस्ताद उर्फ़ अशोक दा !संजय जोशीJuly 31, 2018July 31, 2018 by संजय जोशीJuly 31, 2018July 31, 20183 3244 बिना किसी कला स्कूल से शिक्षित हुए बिना किसी बड़े गुरु के शिष्य हुए अपनी कला भाषा की खोज करना और उसमे एक बड़ा मुकाम...
शख्सियत राजेन्द्र कुमार : जैसा मैंने उन्हें देखाप्रणय कृष्णJuly 24, 2018July 24, 2018 by प्रणय कृष्णJuly 24, 2018July 24, 201813981 उनका अलंकरण मुश्किल है. उनके बारे में अतिशयोक्ति संभव नहीं. ध्यान से देखें तो उन्होंने अपने जीवन और अपनी रचना में कुछ भी अतिरिक्त, कुछ...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति पठनीयता का संबंध वास्तविकता से होता हैसमकालीन जनमतJuly 1, 2018July 1, 2018 by समकालीन जनमतJuly 1, 2018July 1, 201802851 (प्रेमचंद की परंपरा को नये संदर्भ और आयाम देने वाले हिंदी भाषा के कहानीकारों में अमरकांत अव्वल हैं। अमरकांत से शोध के सिलसिले में सन्...
शख्सियतस्मृति भुलाए नहीं भूलेगा यह दिनसमकालीन जनमतJune 30, 2018June 30, 2018 by समकालीन जनमतJune 30, 2018June 30, 201802919 कमरे में चौकी पर बैठे थे नागार्जुन. पीठ के पीछे खुली खिड़की से जाड़े की गुनगुनी धूप आ रही थी. बाहर गौरैया चहचहा रही थी....
जनमतशख्सियत खैनी खिलाओ न यार! /उर्फ / मौत से चुहल (सखा, सहचर, सहकर्मी, कामरेड महेश्वर की एक याद)रामजी रायJune 25, 2018June 25, 2018 by रामजी रायJune 25, 2018June 25, 20182 3187 अपने प्रियतर लोगों- कृष्णप्रताप (के.पी.), गोरख, कामरेड विनोद मिश्र, महेश्वर पर चाहते हुए भी आज तक कुछ नहीं लिख सका। पता नहीं क्यों? इसकी वज़ह...
शख्सियतसिनेमा जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है !समकालीन जनमतJune 19, 2018 by समकालीन जनमतJune 19, 20184 2839 इस ख़त की कोई भूमिका नहीं हो सकती। इरफ़ान, जिनके सिरहाने की एक तरफ़ ज़िंदगी है और दूसरी तरफ़ अंधेरा, ने आत्मा की स्याही से...
शख्सियत अमन की शहादतशालिनी बाजपेयीJune 16, 2018June 17, 2018 by शालिनी बाजपेयीJune 16, 2018June 17, 201801840 हम मीडिया के लोग आराम कुर्सियों पर बैठकर भी संघर्षविराम के पक्ष में नहीं खड़े हो पाते हैं, लेकिन जिस शख्स ने अपने कश्मीर को...
कविताशख्सियतसाहित्य-संस्कृति जनकवि सुरेंद्र प्रसाद की 84वीं जयंती मनाई गईसमकालीन जनमतJune 2, 2018June 2, 2018 by समकालीन जनमतJune 2, 2018June 2, 201804737 बी. आर. बी. कालेज , समस्तीपुर के सभागार में 17 मई, 2018 को जन संस्कृति मंच और आइसा के संयुक्त तत्वावधान में मिथिलांचल के दुर्धर्ष...
कविताशख्सियत यातना का प्रतिकार प्रेमसमकालीन जनमतMay 16, 2018May 16, 2018 by समकालीन जनमतMay 16, 2018May 16, 201804383 मंगलेश की कविता ने प्रेम को बराबर एक सर्वोच्च मूल्य के तौर पर प्रतिष्ठित किया है । लेकिन एकान्त में नहीं, यातना के बरअक्स; क्योंकि...
शख्सियत महावीर प्रसाद द्विवेदी का स्मरण आज भी क्यों ज़रूरी हैसमकालीन जनमतMay 15, 2018May 16, 2018 by समकालीन जनमतMay 15, 2018May 16, 201803425 द्विवेदी जी उस ईश्वर को ‘भ्रष्ट ईश्वर’ कहते हैं, जिसकी दुहाई छुआ-छूत मानने वाले देते हैं. द्विवेदी जी का निर्भीक आह्वाहन है- ‘ऐसे भ्रष्ट ईश्वर...
जनमतज़ेर-ए-बहसशख्सियत माँ तुझे सलाम !कविता कृष्णनMay 13, 2018May 13, 2018 by कविता कृष्णनMay 13, 2018May 13, 201802197 (माँ केवल ममता का ही खज़ाना नहीं है बल्कि समझदारी का भी स्रोत होती है. समाज के बारे में, नैतिकता, यौनिकता, सही और गलत के...
जनमतदुनियाशख्सियतस्मृति कार्ल मार्क्स : एक जीवन परिचयगोपाल प्रधानMay 5, 2018May 5, 2018 by गोपाल प्रधानMay 5, 2018May 5, 201805388 दुनिया के मजदूरों के, सिद्धांत और कर्म दोनों मामलों में, सबसे बड़े नेता कार्ल मार्क्स (1818-1883) का जन्म 5 मई को त्रिएर नगर में हुआ...
दुनियाशख्सियतस्मृति मार्क्स ने खुद के दर्शन को निर्मम और सतत आलोचना के रूप में विकसित किया : दीपंकर भट्टाचार्यविष्णु प्रभाकरMay 4, 2018May 4, 2018 by विष्णु प्रभाकरMay 4, 2018May 4, 201802889 मार्क्स के दबे हुए लोग और अंबेडकर के बहिष्कृत लोग एक ही हैं। इसी तरह मार्क्स ने भारत में जिसे जड़ समाज कहा, अंबेडकर ने...
कहानीशख्सियतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति भारतीय समाज के बदलते वर्गीय एवं जातीय चरित्र को बारीकी से व्यक्त करने वाले कथाकार हैं मार्कण्डेयसमकालीन जनमतMay 2, 2018May 2, 2018 by समकालीन जनमतMay 2, 2018May 2, 20185 4673 मार्कंडेय ने भारतीय समाज के बदलते वर्गीय एवं जातीय चरित्र को बहुत ही बारीकी से अपनी कथाओं में व्यक्त किया है. सामाजिक ताने-बाने एवं राजनीतिक...
शख्सियत लेनिन : जो समय से प्रभावित ही नहीं, जिसने समय को प्रभावित भी कियासमकालीन जनमतApril 22, 2018April 15, 2020 by समकालीन जनमतApril 22, 2018April 15, 202001348 गोपाल प्रधान (व्लादिमीर इल्यिच उल्यानोव जो लेनिन के नाम से लोकप्रिय हैं , के जन्म दिवस पर गोपाल प्रधान का लेख ) 1917 के अक्टूबर/नवम्बर महीने...
शख्सियतस्मृति ‘ राष्ट्रीय खलनायक ’ राजिंदर सच्चरआशुतोष कुमारApril 20, 2018April 20, 2018 by आशुतोष कुमारApril 20, 2018April 20, 201801452 राजघाट पर वह सन दो हज़ार बारह के मार्च की एक सुबह थी. सोरी सोनी के पुलिसिया उत्पीड़न का विरोध करने के लिए वहाँ...
शख्सियत बुझात बा कि भगवन जी हो गइलें दूगो / हजूरन के दोसर, मजूरन के दोसरसमकालीन जनमतApril 17, 2018April 17, 2018 by समकालीन जनमतApril 17, 2018April 17, 201813158 संतोष सहर बाबा साहब के जन्मदिन के अवसर पर बेतिया में आयोजित हुई ‘ भूमि अधिकार यात्रा ‘ के सभा मंच से मैंने...