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कविता शख्सियत साहित्य-संस्कृति

जनकवि सुरेंद्र प्रसाद की 84वीं जयंती मनाई गई

समस्तीपुर (बिहार). बी. आर. बी. कालेज , समस्तीपुर के सभागार में 17 मई, 2018 को जन संस्कृति मंच और आइसा के संयुक्त तत्वावधान में मिथिलांचल के दुर्धर्ष राजनीतिक-संस्कृतिक योद्धा एवं जनकवि सुरेन्द्र प्रसाद की 84वीं जयंती मनाई गई.
सभागार जनकवि सुरेन्द्र प्रसाद के प्रमुख इंकलाबी गीत-कविता पोस्टरों से सजा हुआ था तथा शहर के प्रमुख साहित्यकार,पत्रकार,जन संस्कृतिकर्मी, माले सहित सभी वाम दलों के कामरेड, उनके तीन पीढी के छात्र, अभिभावक,प्राध्यापक, कर्मचारी और आइसा से जुड़े छात्र-छात्रा एवं उनके परिजन-पुरजन सब के सब उल्लासपूर्वक इस कार्यक्रम का हिस्सा बन रहे थे।

सभागार से लेकर कालेज के मुख्य द्वार तक सड़क के दोनों बगल लाल परचम लहरा रहे थे। मंच पर मुख्य आतिथि डॉ. नन्दकिशोर नन्दन, विशिष्ट अतिथि डॉ. शंकर प्रसाद यादव, प्रो. अब्दुल जब्बार अली, प्रो. बालेश्वर राय, प्रो. राजेन्द्र भगत, प्रधानाचार्य दीपक मेहता, जलेस के शाह जफर इमाम,तारा देवी (सुरेन्द्र प्रसाद की संगिनी), डॉ. मनोरमा नन्दन और बतौर अध्यक्ष डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद सुमन (संपादक-समकालीन चुनौती) विराजमान थे।

कार्यक्रम की शुरुआत तस्वीर पर माल्यार्पण एवं जन गीतों की प्रस्तुति से हुई। “जनकवि सुरेन्द्र प्रसाद:व्यक्ति और कृतित्व ” विषय पर निर्धारित संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि प्रो. नन्द किशोर नन्दन ने कहा कि’ पूरे मिथिलांचल में नागार्जुन के बाद दूसरे सबसे बड़े जनकवि हैं सुरेन्द्र प्रसाद। जन संघर्षों की तीव्र आंच में तपकर दमकता हुआ व्यक्तित्व और कृतित्व है सुरेन्द्र प्रसाद का। उनकी रचनाओं में शोषण-उत्पीड़न और सामप्रदायिक फासीवादी जुल्म एवं उन्माद के खिलाफ आग धधक रही है, तभी तो वे कहते हैं -‘जोर मत डालो तुम्हीं केवल धरा के लाल बेटे/बिजलियों की सांस भी ये हैं कलेजों में समेटे। ” यही आग और उसूली प्रतिबद्धता उन्हें भाकपा (माले) एवं जन संस्कृति मंच तक पहुंचाती है।

विशिष्ट अतिथि के बतौर बोलते हुए समस्तीपुर के जानेमाने जनवादी साहित्यकार डॉ. शंकर प्रसाद यादव ने कहा कि ‘जनकवि सुरेन्द्र प्रसाद मिथिलांचल में सर्वहारा संस्कृति के क्रूशेडर थे। उन्होंने गांवों,कसबों और नुक्कड़ों तक अपनी रचनाओं के साथ इंकलाबी अलख जगाया था।”

उनके सहकर्मी रह चुके प्रो. अब्दुल जब्बार अली ने कहा कि ‘सुरेन्द्र प्रसाद बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे।पिछड़े इलाके में शैक्षणिक संस्थान की स्थापना कर जहां एक ओर उन्होंने गरीबों एवं वंचितों को शिक्षा तथा राजनीति की मुख्य धारा से जोड़ा वहीं दूसरी ओर कुशल होम्योपैथ चिकित्सक होने के नाते गरीब-गुरबों का मुफ्त में इलाज भी किया।’

जलेस के शाह जफर इमाम ने कहा कि ” डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद के व्यक्तित्व में राजनीतिक एवं सांस्कृतिक आन्दोलन संचालित करने के साथ ही ठोस कर्यकर्ता गढ़ने की अद्भुत क्षमता थी। उनके व्यक्तित्व में एक प्रकार का चुम्बकत्व ये आकर्षण था, जो उनके पास पहुंचनेवाले को बरबस अपनी तरफ आकर्षित कर ही लेता था।”

जनकवि सुरेन्द्र प्रसाद के व्यक्तित्व और कृतित्व पर शोध कार्य सम्पन्न कर चुकी स्नेहलता कुमारी ने कहा कि ” उनसे पहली मुलाकात में ही मैंने उन पर शोध करने का निश्चय कर लिया और शोध के दरम्यान यह पाया कि उनकी पहली प्रकाशित काव्य-कृति ‘ तिमिरांचल’ (1961ई) से लेकर अंतिम काव्य-कृति ‘परित्यक्ता’ ( 2007) की यात्रा में स्त्री सहित शोषित-पीड़ित , दलित एवं वंचित, आम अवाम की वास्तविक मुक्ति के लिए गहरी बेचैनी है और इसके साथ ही जद्दोजहद का इंकलाबी जज्बा भी है। इसलिए युगद्रष्टा कवि सुरेन्द्र प्रसाद ने मौजूदा दौर के साम्प्रदायिक फासीवाद उन्माद के लक्षण बीज की शिनाख्त अपनी पहली कृति तिमिरांचल से शुरु कर दी थी,जो ‘परित्यक्ता’ तक आते-आते विशाल वट बृक्ष का रुप धारण कर लेता है।”

‘ तिमिरांचल ‘ की कथा भूमि पर अवस्थित उच्च विद्यालय, हरि शंकरी की स्थापना काल के उनके शिष्य श्री अशोक कुमार सिंह और  बालेश्वर राय ने 60 के दशक में उनके द्वारा संचालित शैक्षणिक-सांस्कृतिक गतिविधि की विस्तार से चर्चा करते हुए उन्हें मनुष्यता का महर्षि बतलाया।

बी. आर. बी. कालेज के प्रभारी प्रधानाचार्य प्रो. दीपक मेहता और अवकाशप्राप्त प्रो. राजेन्द्र भगत ने कालेज की स्थापना से लेकर विकास तक की यात्रा में सुरेन्द्र बाबू के अविस्मरणीय अवदान के महत्व पर प्रकाश डाला । बी.आर. बी.कालेज के प्रथम बैच के उनके शिष्य सेवानिवृत शिक्षक डॉ. रामदेव महतो ने विषय प्रवेश के दरम्यान ही जनकवि सुरेन्द्र प्रसाद के विराट लेखकीय व्यक्तित्व के मर्म को उद्घाटित करते हुए उनके प्रबंध काव्य ‘ परित्यक्ता ‘ के मार्मिक स्थलों की सोदाहरण व्याख्या की तथा परित्यक्ता सीता और शहीद शंबूक के प्रसंग को मौजूदा स्त्री विमर्श और दलित विमर्श के ज्वलंत मुद्दो से तादात्म्य स्थापित किया।

मौके पर माले, समस्तीपुर जिला सचिव कॉमरेड उमेश कुमार, कॉमरेड फूलबाबू सिंह, कॉमरेड सुरेन्द्र प्रसाद सिंह, का जय प्रकाश भगत, डॉ. विनीता कुमारी, डॉ. संगीता कुमारी, अनुज कुमार, विजेन्द्र कुमार,रंजन कुमार (पुत्र), खुशबू कुमारी (पोती) सहित आइसा नेता मनीष कुमार, लक्ष्मी कुमारी, बंटी कुमार आदि ने भी अपने-अपने विचार रखे।

पूरे कार्यक्रम की अध्यक्षता सह मंच संचालन का दायित्व निभा रहे ‘समकालीन चुनौती ‘ के संपादक डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद सुमन जहां एक ओर संचालन के क्रम में जन कवि सुरेन्द्र प्रसाद की महत्वपूर्ण काव्य -पंक्तियों को उद्धृतकर उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर फोकस किया वहीं दूसरी ओर अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में उन्होंने कहा कि ” डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद हमारे परम गुरु हैं ।उन्होंने हमें सिर्फ पढ़ाया ही नहीं बल्कि हमारे व्यक्तित्व को गढ़ा है, उस कुम्हार की भांति जो चाक पर मिट्टी का बर्तन गढ़ता है और फिर उसे तपती आग में दमकाकर लाल कर देता है ।उनके साथ लगभग 35-36वर्षों (अंतिम क्षण) तक साए की तरह प्राय:सभी राजनीतिक एवं साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने का मुझे सुअवसर प्राप्त है। मुझमें आज जो कुछ भी दमक है, उसमें उनकी भी आभा है। जीवन के अंतिम समय में विस्मृति के शिकार होने पर भी दो-तीन गिने चुने नाम के साथ स्मृति-पटल पर मैं भी था गुरुवर! आपको बारम्बार मेरा शत-शत नमन और लाल सलाम!”

बी.आर. बी. कालेज को संस्थापक प्रधानाचार्य के बतौर जनकवि डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद ने अपने पसीने से सींचा था तथा वहां रहते हुए आन्दोलनात्मक कार्यों को दिशा प्रदान करते हुए ‘ तिमिरांचल ‘(लघु प्रबंध काव्य) के बाद हिन्दी की प्रगतिवादी कविता (आलोचनात्मक पुस्तक), ‘ एक और लहर हाथ की ‘(‘जनवादी गीत संग्रह), ‘ जनमते पंख: गूंजती किरणें’ (गीत संग्रह), ‘ साहित्य संदर्भ: दिशा और दृष्टि’ (आलोचनात्मक पुस्तक),’ हवा को इसका दुःख है’ (कविता संग्रह),’कॉमरेड की बेटी’ (कहानी) एवं ‘परित्यक्ता’ (प्रबंध काव्य) का सृजन किया। इसके साथ ही ‘चुनौती ‘ पत्रिका का संपादन किया , वही पत्रिका पुनः 2010 से ‘ समकालीन चुनौती ‘ नाम से पंजीकृत होकर निकलने लगी जिसके संस्थापक संपादक डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद ही हैं।

यह वही बी. आर. बी. कालेज है जहां बिहार में आरा के बाद आइसा ने छात्र संघ चुनाव में सभी सीट पर अपनी जीत दर्ज की है.
कार्यक्रम में पूरे सदन ने सर्वसम्मति से कालेज के प्रांगण में बी. आर. बी. कालेज के संस्थापक प्रधानाचार्य और जनकवि की आदमकद प्रतिमा लागाने का फैसला भी लिया। इसके लिए वर्तमान प्रभारी प्रधानाचार्य प्रो. दीपक मेहता सहित चार सदस्यीय कमिटी भी गठित की गई जो इसे मूर्तरुप देगी। “

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