समकालीन जनमत

Tag : कविता

पुस्तक

‘दबी-दूब का रूपक’ कालजयी ही नहीं, कालजीवी भी है

दबी-दूब का रूपक पुस्तक पर चर्चा कृष्ण कुमार दरभंगा, साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था अभिव्यक्ति के तत्त्वावधान में रामबाग में आयोजित एक सारस्वत समारोह में कमलानंद झा की...
नाटक

इस मगध को पहचानिए

समकालीन जनमत
प्रियदर्शन अपने जीवन के उत्तरार्ध में श्रीकांत वर्मा सत्ता-संस्कृति के प्रति अपने आकर्षण और कांग्रेस से अपने जुड़ाव की वजह से हिंदी साहित्य में पर्याप्त-...
शख्सियत

दिलखरोंच आवाज वाला लफ्जों का जुलाहा

समकालीन जनमत
पीयूष कुमार आज गुलज़ार साहब की  88वीं सालगिरह है। गुलज़ार वे शायर, गीतकार, साहित्यकार हैं जिन्होंने अपने कहन के तरीके से अदब की रवायतों, रूढ़ियों...
कविता

अदनान कफ़ील दरवेश के संग्रह ‘ठिठुरते लैम्प पोस्ट’ का काव्यपाठ एवं समीक्षा गोष्ठी

समकालीन जनमत
जसम दिल्ली की ओर से घरेलू गोष्ठी श्रृंखला में भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित युवा कवि अदनान कफ़ील दरवेश के पहले काव्य-संग्रह ‘ठिठुरते लैम्प...
ख़बर

कौशल किशोर को मिला जनकवि केदारनाथ अग्रवाल सम्मान

समकालीन जनमत
यह साहित्य की प्रगतिशील-जनवादी परंपरा और संघर्षशील धारा का सम्मान है – कौशल किशोर कौशल किशोर ने रचना कर्म को सामाजिक कर्म का हिस्सा बनाया-...
कविता

‘मन एव मनुष्याणां-सृष्टि-चक्र: एक लम्बी कविता’ के बहाने कविता में सभ्यता समीक्षा

गोपाल प्रधान
प्रसन्न कुमार चौधरी की एकमात्र कविता ‘सृष्टि-चक्र’ के बारे में हिंदी बौद्धिकों के बीच बहुत कम बातचीत हुई । इसका कारण यह भी था कि...
ख़बर

जयंती मिलन के मौके पर क्रांतिकारी सांस्कृतिक योद्धा कबीर और नागर्जुन पूरी शिद्दत से याद किए गए

समकालीन जनमत
दिनांक 14-06-2022 को कबीर एवं नागार्जुन जयंती के अवसर पर प्राक परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र, दरभंगा पर जनसंस्कृति मंच दरभंगा के तत्वावधान में पूरी शिद्दत से...
ख़बर

‘औरत ही रोती है पहले’- रोशनी में अंधेरे की पड़ताल करती कविताएँ

कौशल किशोर
लखनऊ, 12 जून। मिथिलेश श्रीवास्तव की कविताओं का तीसरा संग्रह है ‘औरत ही रोती है पहले’। यह पिछले दिनों परिकल्पना प्रकाशन, दिल्ली से आया। लिखावट...
साहित्य-संस्कृति

जनचेतना की मशाल ‘विप्लवी पुस्तकालय गोदरगावां’ साहित्यिक तीर्थस्थल है

कौशल किशोर
फणीश्वर नाथ रेणु ने कहा था कि भारत के सामाजिक जीवन को जानना है तो लेखकों को गांवों की ओर जाना चाहिए। जन संस्कृति मंच,...
जनमत

‘पाहीमाफी’ में दर्ज है वंचित-दलित जातियों का दर्द – शिवमूर्ति

समकालीन जनमत
हिन्दी व अवधी के जाने-माने कवि आशाराम ‘जागरथ’ (फैजाबाद) की चर्चित कृति अवधी काव्यगाथा ‘पाहीमाफी’ का विमोचन यूपी प्रेस क्लब, हजरतगंज, लखनऊ में 20 नवम्बर...
जनमत

प्रेम और संघर्ष की आकांक्षाओं से भरा है पूजा यादव का कविता संसार

समकालीन जनमत
पार्वती तिर्की पूजा नए दौर की कवयित्री है, उसका काव्य लेखन एक नयापन लिए हुए है। नई तरह की क्रांति और प्रेमाकांक्षाएँ है। प्रतिरोध जैसे...
शख्सियत

त्रिलोचन के नामवर और नामवर के त्रिलोचन

समकालीन जनमत
(त्रिलोचन के जन्मदिन पर समकालीन जनमत के पाठकों के लिए प्रस्तुत है त्रिलोचन की डायरी पर शीघ्र प्रकाश्य पुस्तक की अवधेश प्रधान द्वारा लिखी गई...
कविता

‘मोह’ के कवि हरिराम द्विवेदी

बलभद्र
हरिराम द्विवेदी भोजपुरी कविता का एक सुपरिचित नाम है। 12 मार्च 1936 को जन्मे 85 पार के द्विवेदी जी भोजपुरी साहित्य-जगत में किसी परिचय के...
कविता

किसने आखिर ऐसा समाज रच डाला है

सुधीर सुमन
सुधीर सुमन  “नहीं निकली नदी कोई पिछले चार-पाँच सौ साल से/ एकाध ज्वालामुखी ज़रूर फूटते दिखाई दे जाते हैं/ कभी कभार/ बाढ़ें तो आईं ख़ैर...
कविता

कौशल किशोर का कविता पाठ ‘यह गम अपना, हम सब का साझा’

शतीन्द्रनाथ चौधुरी अतुल्य हिन्दी के मंच से कौशल किशोर का काव्यपाठ यू-ट्यूब पर सुना। इसका संजीव प्रसारण इसी मंच से 2 जुलाई को हुआ। उन्होंने...
साहित्य-संस्कृति

नागार्जुन की आलोचना

गोपाल प्रधान
नागार्जुन कवि थे, उपन्यासकार थे। थोड़ा ध्यान देकर देखें तो अनुवादक भी थे। लेकिन आलोचक ? और वह भी तब जब खुद उन्होंने आलोचक के...
स्मृति

 जनवादी धारा के अग्रगामी चेतना के कवि थे विजेन्द्र

समकालीन जनमत
लखनऊ।  हिन्दी के शीर्षस्थ कवि व गद्यकार विजेन्द्र के रचनात्मक अवदान पर सार्थक एवं बेहद जरूरी परिचर्चा 27 जुलाई को जूम पर हुई । बीते...
स्मृति

अज़ीम कवि एवं फ़िल्मकार बुद्धदेव दासगुप्ता

समकालीन जनमत
प्रशांत विप्लवी जब फ़िल्मों का बहुत ज्यादा इल्म नहीं था तब भी बहुत सारी महत्त्वपूर्ण फिल्में देखने की क्षीण स्मृति है। विकल्पहीनता कई बार वरदान...
कविता

पहाड़ों की यातनाएं संजोते मंगलेश दा

अर्पिता राठौर मंगलेश डबराल का रचना कर्म उस सफर सरीखा है जो अपना समस्त जीवन मानवीय विडंबनाओं में संभावना तलाशते हुए गुज़ार देना चाहता है।...
कविता

धूमिल की ‘नक्सलबाड़ी’

गोपाल प्रधान
धूमिल की यह कविता उनके पहले काव्य संग्रह ‘संसद से सड़क तक’ में कुल चार पृष्ठों में प्रकाशित है । संग्रह से पहले 1967 में...
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