Tag : कुमार मुकुल

कविता

दीपक जायसवाल की कविताएँ अतीत और वर्तमान की तुलनात्‍मक प्रतिरोधी विवेचना हैं

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल अतीत और वर्तमान के तुलनात्‍मक प्रतिरोधी विवेचन और वैचारिक जद्दोजहद दीपक जायसवाल की कविताओं में आकार पाते हैं। समय के अभेद्य जिरहबख्‍तर को भेद...
कविता

अंतिम आदमी की हालत बयाँ करतीं विधान की कविताएँ

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल गुंजन श्रीवास्तव ‘विधान’ की कविताएँ ‘कवियों के कवि’ शमशेर बहादुर सिंह से लेकर सीधा नारा की तर्ज़ पर गांधी के ‘अंतिम आदमी’ की...
पुस्तक

विनोद पदरज के ‘देस’ की कविताओं में भारतीय लोक अपनी विडंबनाओं व ताकत के साथ व्यक्त हुआ है

कुमार मुकुल
  ‘देस’ में संकलित विनोद पदरज की कविताएँ इंडिया से अलग भारतीय लोक की सकारात्‍मक कथाओं को उनकी बहुस्‍तरीय बुनावट के साथ प्रस्‍तुत करती हैं। इन...
पुस्तक

अनिल अनलहातु का पहला काव्य संग्रह ‘बाबरी मस्जिद तथा अन्‍य कविताएँ’ विकास के विडम्बनाबोध की अभिव्यक्ति है

कुमार मुकुल
अपनी विश्‍व प्रसिद्ध पुस्‍तक ‘सेपियन्‍स’ में युवाल नोआ हरारी संस्‍कृति और तथाकथित मनुष्‍यता पर सवाल उठाते लिखते हैं- …हमारी प्रजाति, जिसे हमने निर्लज्‍ज ढंग से...
शख्सियत

लोकतंत्र अभी भी सपनों में पलता एक इरादा है

कुमार मुकुल
(महेश्वर हिंदी की क्रांतिकारी जनवादी धारा के महत्वपूर्ण एक्टिविस्ट, पत्रकार, संपादक, लेखक, कवि और विचारक थे। वे समकालीन जनमत के प्रधान संपादक थे। महेश्वर जी...
पुस्तक

मोनिका कुमार की ‘आश्‍चर्यवत्’ कविता की नई सरणी है

कुमार मुकुल
आलोक धन्वा ने एक बातचीत में मोनिका कुमार की कविताओं की चर्चा की थी, तब तक उनकी कविताएं पढ़ी नहीं थीं मैंने। हां, फेसबुक पर...
कविता

राजेन्द्र देथा की कविताओं में सहज मनुष्‍यता के उत्‍प्रेरक चित्र हैं

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल शिशु सोते नहीं अर्द्धरात्रि तक विश्राम भी नहीं करेंगे वे थोड़ा और हँसेंगे अभी और बताएंगे तुम्हें कि हँसना क्या होता है? सोते...
स्मृति

सत्‍यजीत राय – आत्‍मबोध की विश्‍वजनीनता

समकालीन जनमत
 कुमार मुकुल जब कोई प्रतिभा उद्बोधन के नये स्‍तरों को अपने कलात्‍मक संघर्ष से उद्घाटित करने की कोशिश करती है तो समय और प्रकृति अपने...
कविता

सत्‍य को उसकी बहुआयामिता में जानने का जीवट और धैर्य हैं देवेश की कविताएँ

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल वरिष्‍ठ कवि ज्ञानेन्‍द्रपति ने करीब पच्‍चीस साल पहले मेरी कुछ कविताओं से गुजरते लिखा था – … आपकी ये कविताएं मुझे आपकी अगली...
कविता जनमत

विनय कुमार की कविताएँ ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से संवलित हैं

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल यक्षिणी की भूमिका में विनय लिखते हैं – ‘…अतीत का बोध मुझे न तो गौरवान्वित करता है, न दुखी और न ही असहाय;...

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