Tag : कुमार मुकुल

शख्सियत

लोकतंत्र अभी भी सपनों में पलता एक इरादा है

कुमार मुकुल
(महेश्वर हिंदी की क्रांतिकारी जनवादी धारा के महत्वपूर्ण एक्टिविस्ट, पत्रकार, संपादक, लेखक, कवि और विचारक थे। वे समकालीन जनमत के प्रधान संपादक थे। महेश्वर जी...
पुस्तक

मोनिका कुमार की ‘आश्‍चर्यवत्’ कविता की नई सरणी है

कुमार मुकुल
आलोक धन्वा ने एक बातचीत में मोनिका कुमार की कविताओं की चर्चा की थी, तब तक उनकी कविताएं पढ़ी नहीं थीं मैंने। हां, फेसबुक पर...
कविता

राजेन्द्र देथा की कविताओं में सहज मनुष्‍यता के उत्‍प्रेरक चित्र हैं

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल शिशु सोते नहीं अर्द्धरात्रि तक विश्राम भी नहीं करेंगे वे थोड़ा और हँसेंगे अभी और बताएंगे तुम्हें कि हँसना क्या होता है? सोते...
स्मृति

सत्‍यजीत राय – आत्‍मबोध की विश्‍वजनीनता

समकालीन जनमत
 कुमार मुकुल जब कोई प्रतिभा उद्बोधन के नये स्‍तरों को अपने कलात्‍मक संघर्ष से उद्घाटित करने की कोशिश करती है तो समय और प्रकृति अपने...
कविता

सत्‍य को उसकी बहुआयामिता में जानने का जीवट और धैर्य हैं देवेश की कविताएँ

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल वरिष्‍ठ कवि ज्ञानेन्‍द्रपति ने करीब पच्‍चीस साल पहले मेरी कुछ कविताओं से गुजरते लिखा था – … आपकी ये कविताएं मुझे आपकी अगली...
कविता जनमत

विनय कुमार की कविताएँ ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से संवलित हैं

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल यक्षिणी की भूमिका में विनय लिखते हैं – ‘…अतीत का बोध मुझे न तो गौरवान्वित करता है, न दुखी और न ही असहाय;...
कविता जनमत

समय के छद्म को उसकी बहुस्‍तरियता में उद्घाटित करतीं कल्पना मनोरमा

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल लालसा सन्यास के पद गुनगुनाये चाटुकारी जब रचे उपसर्ग प्रत्यय तुष्ट होकर अहम सजधज मुस्कुराये। वर्तमान समय की राजनीतिक उलटबांसी और उससे पैदा...
कविता जनमत

स्‍त्री और प्रकृति की नूतन अस्तित्‍वमानता को स्‍वर देतीं ऋतु मेहरा की कविताएँ

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल    ऋतु मेहरा की कविताएँ आपाधापी भरे जीवन और प्रकृति के विस्‍तृत वितान के मध्‍य एक तालमेल बिठाने का प्रयास करती कविताएं हैं।...
कविता जनमत

आत्‍मीयता का रंग और लोक का जीवट : इरेन्‍द्र की कविताएँ

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल आत्‍मीयता इरेन्‍द्र बबुअवा की कविताओं का मुख्‍य रंग है। इस रंग में पगे होने पर दुनियावी राग-द्वेष जल्‍दी छू नहीं पाता। भीतर बहती...
जनमत पुस्तक

‘बैठकर काशी में अपना भूला काशाना’ : मिर्ज़ा ग़ालिब

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल ‘चिराग़-ए-दैर (मंदिर का दीया)’ मिर्ज़ा ग़ालिब की बनारस पर केंद्रित कविताओं का संकलन है जिसका मूल फारसी से सादिक ने अनुवाद किया है। चिराग़-ए-दैर की...
कविता

कुमार अरुण की कविताओं की भाषा के तिलिस्म में छुपा यथार्थ 

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल माँ को समन्दर देखने की बड़ी इच्छा कि आखिर कितना बड़ा होता होगा अरे बड़ा कितना जितना हमारे पैसों और जरूरतों के बीच...
कविता जनमत

ज़मीनी हक़ीक़त बयाँ करतीं चंद्र की कविताएँ

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल चंद्र मेरी आज तक की जानकारी में पहले ऐसे व्‍यक्ति हैं जो खेती-बाड़ी में, मजूरी में पिसते अंतिम आदमी का जीवन जीते हुए पढ़ना-लिखना...
कविता जनमत

नित्यानंद गायेन की कविताओं में प्रेम अपनी सच्ची ज़िद के साथ अभिव्यक्त होता है

उमा राग
कुमार मुकुल   नित्यानंद जब मिलते हैं तो लगातार बोलते हैं, तब मुझे अपने पुराने दिन याद आते हैं। कवियों की बातें , ‘कांट का...