समकालीन जनमत

Category : जनमत

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सवाल तो यही है कि भावना और जनहित तय कैसे और कौन करेगा ?

इन्द्रेश मैखुरी
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण को उनके दो ट्वीट के लिए उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति बी.आर.गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की खंडपीठ ने...
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प्रशांत भूषण के समर्थन में आए लेखक संगठन , प्रोफ़ेसरों के उत्पीड़न के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई

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जन संस्कृति मंच, प्रगतिशील लेखक संघ, दलित लेखक संघ, प्रतिरोध का सिनेमा, इप्टा, संगवारी, न्यू सोशलिस्ट इनिशिएटिव और जनवादी लेखक संघ ने प्रशांत भूषण को...
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9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस: ‘यह उनसे सीखने का समय है’

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राजीव कुमार प्रसिद्ध नृतत्वशास्त्री और आदिवासी विषयक विद्वान वेरियर एल्विन की किताब ‘ए फिलॉसफी फ़ॉर नेफा’ (1958) की प्रस्तावना तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने लिखी...
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कैंपस में आइसा के होने का निहितार्थ

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अंकित पाठक (वाम छात्र संगठन ‘आइसा’ 9 अगस्त को अपनी स्थापना के तीस वर्ष पूरा कर रहा है। इस मौके पर अंकित पाठक ने आइसा...
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विश्व आदिवासी दिवस पर सामाजिक तलछट में छटपटाते कुछ सवाल

जनार्दन
आदमी ही नहीं समय भी बहरूपिया हो गया है। मनुष्य, समाज और दुनिया के तमाम पंथ अबूझ हो गए हैं। हर कहीं, हर तरफ धुंआ-धुंआ...
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कोविड-19 से निपटने के सरकारी तरीकों की आलोचना पर पत्रकारों पर कहर

दानिश रज़ा ( दानिश रज़ा की यह रिपोर्ट ‘ द गार्जियन ’ से साभार ली गयी है। हिन्दी अनुवाद दिनेश अस्थाना का है )  ...
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मजदूरों के श्रम की अनवरत लूट की इबारत है उत्तराखंड में श्रम कानूनों में बदलाव

उत्तराखंड मंत्रिमंडल की बैठक में श्रम क़ानूनों की कतर ब्यौंत करने के निर्णय पर मोहर लगा दी गयी. 29 जुलाई को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत...
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हुड़किया बौल पहाड़ की संस्कृति नहीं, बेगार प्रथा का अवशेष है

आजकल कई लोग पहाड़ में पहले होने वाले हुड़किया बौल की नकल करते उसे पहाड़ की संस्कृति के रूप में प्रचारित करते रहते हैं। हुड़किया बौल...
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आशा सिर्फ नाम में रहेगा और काम में प्रताड़ना,अपमान और निराशा ही झेलनी होगी ?

आशा कार्यकर्ताओं को तो हर किसी ने देखा होगा. हर इलाके में स्वास्थ्य संबंधी छोटे-बड़े तमाम काम ये करती हैं. आशा दरअसल संक्षिप्त नाम है....
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सिविल सोसाइटी ने कहा -अभी बिहार में चुनाव का नहीं, कोरोना से आम लोगों की सुरक्षा का समय है

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कोविड संकट में बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर वेबिनार, वेबिनार से लिए गए प्रस्ताव को चुनाव आयोग को सौंपा जाएगा. पटना। एआइपीएफ की पहलकदमी पर आज...
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दंगाईयों और उनके सरपरस्तों के चेहरे बेनक़ाब कर रही है दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग की रिपोर्ट

धार्मिक उन्माद और उसके पीछे राजसत्ता की ताकत खड़ी हो जाये तो वह कैसा कहर बरपा सकती है,फरवरी के महीने में देश की राजधानी दिल्ली...
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क़ैद ए हयात ओ बंद ए ग़म अस्ल में दोनों एक हैं …

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कोरोना डायरी : लॉकडाउन-1 : नीलिशा [युवा पत्रकार नीलिशा दिल्ली में रहती हैं और इस भयावह वक़्त का दस्तावेज़ीकरण वे कोरोना डायरी नाम से कर...
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गुना की यह तस्वीर, बच्चों की गोद में बाप की नहीं है, भारत की मरी हुई आत्मा और जनता की है

रवीश कुमार
गुना की यह तस्वीर, बच्चों की गोद में बाप की नहीं है, भारत की मरी हुई आत्मा और जनता की है गुना के कलेक्टर और...
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नीतीश कुमार जितने संवेदनशील रिश्तेदारों के लिए हैं, क्या उतने ही संवेदनशील जनता के प्रति भी हैं ?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोरोना संकट में राज्य की जनता को बचाने के लिए तो कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं किये हैं, पर अपने...
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‘कइसे खेलइ जइबू सावन में कजरिया…’

समकालीन जनमत के फेसबुक लाइव शृंखला में 6 जुलाई सोमवार को एल कौशिकी चौधरी ने शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी। एल कौशिकी चौधरी...
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ऐतिहासिक भौतिकवाद क्या है ?: प्रो. गोपाल प्रधान

गोपाल प्रधान
सोवियत संघ के पतन के बाद वैश्वीकरणकरण ही एकमात्र सच नहीं है। पूंजी के हमलावर होने के साथ उसके प्रतिरोधों का सिलसिला चल पड़ा। इस...
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जिन शहरों ने प्रवासी श्रमिकों से आँखें फेर ली थीं वही उनकी राह में आँखे बिछाये बैठे हैं

( अजीत महाले और के.वी. आदित्य भारद्वाज की यह रिपोर्ट ‘ द हिन्दू ‘ में प्रकाशित हुई है. समकालीन जनमत के पाठकों के लिए इसका...
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दिल्ली और मुम्बई के सबसे बुरे दिन अभी आने वाले हैं

समकालीन जनमत
बरखा दत्त ( वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त का यह लेख हिन्दुस्तान टाइम्स में प्रकाशित हुआ है. समकालीन जनमत के पाठकों के लिए इसका हिन्दी अनुवाद...
जनमतपुस्तक

सत्य का अनवरत अन्वेषण हैं राकेश रेणु के ‘इसी से बचा जीवन’ की कविताएँ

सुशील मानव
  कविता क्या है और इसका काम क्या है- इस पर अनेक बातें हैं, अनेक परिभाषाएं हैं। लेकिन मौजूदा समय सत्य पर संकट का समय...
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