जनमत

शेल्टर गृहों में महिलाओं-बच्चियों के यौन उत्पीड़न-बलात्कार में सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग शामिल : कविता कृष्णन

पटना. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी चुनावी सभाओं में कन्या उत्थान सरीखे योजनाओं की चर्चा करते अघाते नहीं, महिलाओं के सशक्तीकरण की लगातार दुहाइयां दे रहे हैं लेकिन हकीकत यह है कि भाजपा-जदयू शासन में सरकारी संरक्षण में शेल्टर गृहों में महिलाओं-बच्चियों के यौन उत्पीड़न-बलात्कार की वीभत्स घटना को अंजाम दिया गया. हर कोई जानता है कि इन मामलों में सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग शामिल हैं . यहां तक कि मुख्यमंत्री भी जांच के दायरे में हैं. फिर भी मुख्यमंत्री निर्लज्जता से बयानबाजी कर रहे हैं.

यह बातें भाकपा माले की पोलित ब्यूरो सदस्य और ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी ने 29 जनवरी को पत्रकार वार्ता में कही.

कामरेड कविता कृष्णन ने कहा कि बालिका गृह कांड में संस्थागत यौन उत्पीड़न नीतीश सरकार के तथाकथित सुशासन को पूरी तरह बेपर्द कर देता है. यह सुशासन नहीं दुःशासन की सरकार है. यह बिहार के विकास का नहीं बल्कि सर्वनाश का माॅडल है.

उन्होंने कहा कि अभी हाल में, एक और 5 साल पुराना मामला उजागर हुआ है. आज से लगभग 5 वर्ष पहले नीतीश कुमार के ही शासन में मुजफ्फरपुर के उत्तर रक्षा गृह में बलात्कार व यौन उत्पीड़न की घटना घटी थी. इस कांड के 6 दुष्कर्म पीड़िताओं का आज कोई ट्रेस नहीं मिल रहा है और पीड़ित किशोरियों की फाइलें गायब बताई जा रही हैं.

ऐपवा नेता ने कहा कि दरअसल जब जनांदोलनों के जबरदस्त दबाव में मई 2018 से बालिका गृहकांड में संस्थागत यौन उत्पीड़न की जांच शुरू हुई, तो उसी सिलसिले में यह पांच साल पुराना मामला उजागर हुआ था. मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड का मामला सामने आने पर तत्कालीन एसपी हरप्रीत कौर ने जिले के अन्य पुराने मामलों की जानकारी मांगी थी, तब यह मामला फिर से प्रकाश में आया. उत्तर रक्षा गृहकांड की नए सिरे से जांच आरंभ हुई, लेकिन अब पता चल रहा है कि उस कांड से जुड़ी कोई भी फाइल उपलब्ध ही नहीं है.

19 नवंबर 2013 को इस मामले में तीन एफआईआर हए थे. इसमें 3 बच्चियों के साथ बलात्कार व अन्य 3 के साथ छेड़छाड़ का मामला था. 8 लोग अभियुक्त बनाए गए थे. किंतु किसी अधिकारी स्तर के व्यक्ति को इसमें अभियुक्त नहीं बनाया गया था. 6 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी, बाकि दो का सत्यापन नहीं हो सका. उस वक्त उसे शेल्टर होम में कोई 18-19 लड़कियां रहती थीं. उक्त घटना के बाद रिमांड होम बंद कर दिया गया था. लड़कियों को पटना रिमांड होम में भेजा गया. फिर मुजफ्फरपुर शेल्टर होम भेजा गया किंतु इनमें से कितनी लड़कियां कहां गईं, क्या हुआ, उसका कोई रिकार्ड नहीं है.
भाकपा-माले ने आश्चर्य व्यक्त किया कि आखिर फाइलें कहां गईं? इससे यह संदेह और पुख्ता होता है कि इन मामलों में बलात्कारियों-अपराधियो व उनके आकाओं को बचाने का ही काम हो रहा है.

उन्होंने कहा कि भाकपा-माले लोकसभा चुनाव में इस मुद्दे को अपने चुनाव प्रचार का एक प्रमुख मुद्दा बना रही है. हमें उम्मीद है कि बिहार का नागरिक समाज इस महाअपराध के लिए लोकसभा चुनाव में भाजपा-जदयू को सबक सिखाएगा. भाजपा-जदयू का शासन रहते महिलायें व बच्चियां किसी भी रूप में न सुरक्षित रह सकती हैं और न ही उन्हें न्याया मिल सकता है.

संवाददाता सम्मेलन को पार्टी की केंद्रीय कमिटी के सदस्य व नगर सचिव अभ्युदय और जेएनएयूएसयू की पूर्व अध्यक्ष गीता ने भी संबोधित किया.

Related posts

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Privacy & Cookies Policy