समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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कविता

दिव्या श्री की कविताएँ अपने परिवेश को ईमानदारी से व्यक्त करने की कोशिशें हैं

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देवेश पथ सारिया युवा कवयित्री दिव्या श्री की कविताओं को लेकर सकारात्मक बातें पहले कहूँ तो दिव्या श्री द्वारा अपने परिवेश को ईमानदारी से व्यक्त...
कविता

महेश वर्मा की कविताएँ अनेक अबूझ, बिखरे दृश्यों से संवाद करती हैं

समकालीन जनमत
वसु गंधर्व पाठक बड़ी तन्मयता से, कविताओं के आवरणों से होकर कवि के हृदय की निशीथ तहों को आँकता है। कविता की अपनी अर्थ-भाव-भूमि से इतर,...
पुस्तक

भगत सिंह के साथी: यह किताब क्रांतिकारियों को तथ्यात्मक विवेचना की आधार भूमि पर परखते हुए नए रूप में सामने लाती है

समकालीन जनमत
अश्रुत परमानंद   किसी कवि, (शायद शैलेंद्र) की पंक्तियाँ थीं, “भगतसिंह इस बार न काया, लेना   भारत वासी की. मातृभूमि के लिए अभी भी, सजा ...
कविता

शशिभूषण बडोनी की कविताएँ बड़ी सरलता से दिल पर दस्तक देती हैं

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कल्पना पंत शशिभूषण बडोनी की कविताएँ बड़ी सरलता और ख़ामोशी से दिल पर दस्तक देती हैं. पहली बार इन कविताओं को पढ़ने पर शिल्प की...
जनमत

‘प्रेम’ नवीन रांगियाल की कविताओं का अर्क है

समकालीन जनमत
 गीत चतुर्वेदी नवीन रांगियाल की कविताएँ पढ़ते हुए प्राचीन संस्कृत काव्यशास्त्र की सहज स्मृति हो जाती है। नवीन अपनी कविता में हर अक्षर, हर शब्द...
स्मृति

प्रोफ़ेसर मैनेजर पांडेय को विदाई सलाम: जसम

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जन संस्कृति मंच के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे हिंदी के मूर्धन्य आलोचक मैनेजर पांडेय का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। आज...
कविता

बाबुषा की कविताएँ जीवन को तप करके पत्थर के बरक्स पानी बना देने की हिमायती हैं

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दीपक जायसवाल मेरे ज़माने की ऐसी लेखिका जिसे पानी पर लिखी तहरीरें पढ़ना आता है, बारिशें जिनकी पुरखिन हैं, जिनके यहाँ सूरज पर लगा ग्रहण,...
कविता

सुभाष यादव की कविताएँ संभावनाओं की आवाज़ हैं

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विनय सौरभ   सुभाष यादव की कविताएँ आपको चौंकाएँगी नहीं। न ही किसी विस्मय से भरेंगी ! ये कविताएँ वैसी ही हैं जैसे किसी निर्जन...
कविता

आशीष त्रिपाठी की कविताएँ विषाक्त दौर में प्रकृति की दरियादिली को ज़ाहिर करती हैं

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विपिन चौधरी   रचनात्मक और जिज्ञासु संचेतना देर-सवेर अपनी भाषा विकसित कर लेती है. यह भाषा कवि की आत्मा की भाषा है. अपने भीतर के...
कविता

अखिल कत्याल की कविताएँ दोस्त की तरह हैं

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शुभम श्री अखिल की कविताओं को कैसे पढ़ें सबसे पहले इन पाँच सौ शब्दों के चिट्ठे को नज़रअंदाज करें और तेज गति से स्क्रोल कर...
स्मृति

नई कहानी के अप्रतिम कहानीकार शेखर जोशी नहीं रहें।

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अच्युतानंद मिश्र नई कहानी के अप्रतिम कहानीकार शेखर जोशी नहीं रहें।याद आता है 2012 में जबलपुर में उनसे मुलाकात हुई थी। उनसे बात करते हुए...
पुस्तक

‘उम्मीद चिनगारी की तरह’ संग्रह की कविताएँ अपने समय को रचतीं, अभिव्यक्ति के ख़तरों को धता बताती हैं

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दिविक रमेश कौशल किशोर प्रारम्भ से ही एक सजग और ज़िम्मेदार कवि के रूप में अपनी राह बनाते हुए आज उम्मीद से लबालब भरी चिंगारी...
कविता

लीना मल्होत्रा की कविताएँ स्त्रीस्वर का स्थापित मुहावरा हैं

समकालीन जनमत
प्रिया वर्मा महत्वाकांक्षाओं की चिड़िया औरत की मुंडेर पर आ बैठी है दम साध शिकारी ने तान ली है बन्दूक निशाने पर है चिड़िया अगर...
कविता

जितेंद्र श्रीवास्तव की कविताएँ मनुष्यता का संधान करती हैं

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देवेश पथ सारिया   वरिष्ठ कवि जितेंद्र श्रीवास्तव की कविताओं से गुज़रते हुए लगता है कि यह कवि मनुष्य एवं प्रकृति के बीच तादात्म्य की...
ख़बर

मुक्तिबोध स्मृति दिवस पर  फासीवाद के खिलाफ एकता व प्रतिरोध का संकल्प

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मुक्तिबोध के स्मृति दिवस के अवसर पर केसरबाग स्थित इप्टा कार्यालय में  ‘फासीवाद के खिलाफ प्रतिरोध, आजादी और लोकतंत्र की संस्कृति के लिए” विषय पर...
कविता

आयुष पाण्डेय की कविताएँ मनुष्यता की बेहद सरल सतह पर जीती हैं

समकालीन जनमत
संध्या नवोदिता ये ताज़गी भरी कविताएँ हैं. प्रेम में गले गले तक डूबी. विछोह में साँस रोकती. हज़ार तरह के सवाल पूछती. दुनिया के बुनियादी...
कविता

नाइजीरियाई कवि बेन ओकरी की कविताएँ

समकालीन जनमत
विपिन चौधरी   नाइजीरियाई कवि और उपन्यासकार बेन ओकरी आज के समय में दुनिया भर के साहित्यिक पटल पर लोकप्रिय नाम है. बेन का जन्म...
कविता

मनीष कुमार यादव की कविताएँ अपनी चुप्पी में एक बहुत गझिन यात्रावृत्त को समेटे रहती हैं

समकालीन जनमत
वसु गन्धर्व मनीष की कविताएँ एक कठिन ज़मीन की कविताएँ हैं जो अपने प्रस्तावित पाठ में पाठक से उतने ही सृजनात्मक संघर्ष की अपेक्षा करती...
जनमत

सावन वाइब्स- कांवड़ यात्रा के हवाले से

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तूलिका तीर्थ यात्राओं के महात्म्य से शायद ही कोई धर्म अछूता रहा हो। अगर तीर्थ यात्रा के इर्द गिर्द की बतकही या किवदंतियों से अंदाजा...
कविता

विमल भाई की कविताएँ क्वीयर कविता के संघर्ष और सौंदर्यबोध की बानगी हैं

समकालीन जनमत
अखिल कत्याल विमल भाई, अलविदा! कुछ एक साल पहले की बात है। अपनी मित्र अदिति अंगिरस के साथ मैं एक ‘क्वीयर कविताओं’ के संग्रह का...
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