समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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कविता

सत्येंद्र कुमार रघुवंशी की कविताएँ सामाजिक संरचना की परख हैं

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ख़ुदेजा ख़ान कवि सत्येंद्र कुमार रघुवंशी को पढ़ते हुए कहा जा सकता है कि कोई भी कविता या रचना का पाठ संवेदना के स्तर पर...
ख़बर

जसम की ओर से आजमगढ़ में शहीद दिवस का आयोजन

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23 मार्च 2024,ओरा, आजमगढ़ फासीवादी प्रतिरोध के महानायक भगतसिंह – शहीद-ए-आजम भगत सिंह और साथियों के शहादत दिवस पर शहीद-ए-आजम भगतसिंह लाइब्रेरी तहबरपुर और जन...
कविता

मनोज चौहान की कविताएँ समाज के संवेदनशील विषयों की पड़ताल करती हैं।

समकालीन जनमत
गणेश गनी कवियों की भीड़ में मनोज चौहान निरन्तर क्रियाशील हैं और सजग भी। बाजारवाद के इस युग में कविता का भी बाजारीकरण हुआ है।...
साहित्य-संस्कृति

जसम की घरेलू गोष्ठी का आयोजन, ग़जा में युद्ध विराम के लिए अभियान का संकल्प

समकालीन जनमत
जन संस्कृति मंच की ओर से 17 मार्च, 2024 को तूलिका व मृत्युंजय के घर पर एक घरेलू गोष्ठी हुई। इस गोष्ठी में फैसला किया...
साहित्य-संस्कृति

कौशल किशोर की किताब भगत सिंह और पाश: अंधियारे का उजाला का हुआ विमोचन

समकालीन जनमत
भगत सिंह व पाश की वैचारिक रोशनी में हमें आगे बढ़ाना है – वन्दना मिश्र लखनऊ। जन संस्कृति मंच और भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा)...
ख़बर

उपन्यास अगम बहै दरियाव पर राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ में गोष्ठी संपन्न

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18 मार्च, मऊ जन संस्कृति मंच के तत्वाधान में राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ के सभागार में वरिष्ठ कथाकार शिवमूर्ति के प्रकाशित उपन्यास अगम बहै दरियाव...
कविता

स्मिता वाजपेयी की कविताएँ स्त्री की स्वतंत्र इयत्ता की आकांक्षा हैं

समकालीन जनमत
रमेश ऋतंभर यह ध्यातव्य हो कि अपने विशिष्ट संघर्ष व अनुभव और उसकी अभिव्यक्ति को लेकर कवयित्रियों ने गंभीरता से समकालीन हिन्दी कविता में अपना...
ख़बर

चुनावी बांड के सवाल पर वामदलों का प्रदर्शन 

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इलाहाबाद। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी तथा भाकपा (माले) ने आज दिनांक 12 मार्च 2024 को अपने राज्यव्यापी आह्वान के तहत जिला कचहरी में...
कविता

अजीत कुमार की कविताएँ जनवाद की स्प्ष्ट अनुगूंज हैं

कमलानंद झा तुम भले ऊँची करो दीवार जितनी हम परिंदे हैं, उसे भी लाँघ जाएँगे। अजीत कुमार वर्मा उन कवियों में हैं जो सिर्फ कविता...
जनमत

अलग-अलग देशों में अलग-अलग तरीके का समाजवाद होगा

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जन संस्कृति मंच इलाहाबाद इकाई ने 1 मार्च दिन शुक्रवार को घरेलू गोष्ठी के अंतर्गत ‘अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों में भारत में समाजवाद का स्वप्न’ विषय पर...
जनमत

भारत की फिलिस्तीन नीति में निरंतर परिवर्तन

समकालीन जनमत
स्टैनली जॉनी भारत ऐतिहासिक रूप से फिलिस्तीनी हितों का प्रबल समर्थक रहा है। और पिछले तीन दशकों में, जब इज़राइल के साथ भारत के संबंध...
कविता

विजय विशाल की कविताएँ शासक वर्ग के चेहरे को कठोरता से बेनक़ाब करती हैं

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गणेश गनी स्मृतियों के सहारे चलते हुए जीवन कभी-कभी खूबसूरत और कभी-कभी यातनामय भी लगने लगता है। यह निर्भर करता है कि बीते समय की...
पुस्तक

नीला कॉर्नफ्लावर: मानवविज्ञान एवं साहित्य के मध्य सेतु

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शरद जायसवाल   वीरेन्द्र प्रताप यादव का पहला उपन्यास ‘नीला कॉर्नफ्लावर’ प्रकाशित होते ही चर्चा में आ गया है। उपन्यास की पहली खूबसूरती उसका शीर्षक...
कविता

जितेन्द्र कुमार की कविताएँ विकास की विडंबना को दर्शाती हैं

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल आज कस्‍बों और उपनगरों की युवा कविता से जो संघर्ष की धार और तार्किकता गायब होती जा रही है वह जितेन्‍द्र कुमार की...
कविता

मृगतृष्णा की कविताएँ मुक्ति की आकांक्षा हैं

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निरंजन श्रोत्रिय   युवा कवि मृगतृष्णा की ये कविताएँ मुक्ति की आकांक्षा की कविताएँ हैं। यह मुक्ति परम्परा से विद्रोह के रूप में भी है...
ख़बर

केंद्र सरकार द्वारा लाये गये तीन नये अपराधिक कानूनों के विरोध में संगोष्ठी का आयोजन

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13.02.2024 केंद्र सरकार द्वारा लाये गये तीन नये अपराधिक कानून तथा आगामी लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर जन घोषणापत्र विषयों पर राज्यस्तरीय संगोष्ठी ऑल इंडिया...
ख़बर

प्रयागराज में ग्रामीण भारत बंद और हड़ताल सफल रहा, जुलूस निकला , सभा हुई

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इलाहाबाद। संयुक्त किसान मोर्चा ,संयुक्त ट्रेड यूनियन तथा केंद्र राज्य कर्मचारियों के संयुक्त तत्वाधान में आज अखिल भारतीय ग्रामीण भारत बंद तथा औद्योगिक/ क्षेत्रीय हड़ताल...
कविता

नताशा की कविताएँ स्त्रीत्व का अन्वेषण और उनका विस्तार करती हैं

समकालीन जनमत
विपिन चौधरी कविता उस मानवीय संस्कृति का नाम है जिसका सीधा संबंध संवेदनाओं से है, इस लिहाज़ से वर्तमान समय में कविता जैसी विधा सबसे...
ज़ेर-ए-बहस

थैले से बाहर समान नागरिक संहिता का जिन्न

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समान नागरिक संहिता के जिन्न का उत्तराखंडी संस्करण थैले से बाहर आ चुका है और उसके साथ ही सामने आ गयी है बन्द कमरों में...
कविता

अंकिता रासुरी की कविताएँ विषय विविधता से पूर्ण अदम्य साहस की अभिव्यक्ति हैं

समकालीन जनमत
पुरु मालव अंकिता रासुरी की कविताओं में वो विषय-क्षेत्र भी सहजता से प्रविष्ट हो जाते हैं जिनकी ओर प्रायः कवि दृष्टिपात करने से भी बचते...
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