समकालीन जनमत

Tag : जन संस्कृति मंच

कवितास्मृति

गोरख के काव्य में सादगी, अभिधा का सौंदर्य है-चन्द्रेश्वर

गोरख पाण्डेय की स्मृति में लखनऊ में कार्यक्रम शीर्षस्थ कथा लेखिका कृष्णा सोबती को श्रद्धांजलि दी गई लखनऊ. हिन्दी कविता की जो सुदीर्घ परम्परा है,...
साहित्य-संस्कृति

जसम की ओर से रचना पाठ ‘पंख खोलूं और उड़ चलूं आसमान में’

कौशल किशोर
लखनऊ: रचनाकार समय और समाज को अपने सृजन का विषय बनाता है। आम आदमी की पीड़ा व संघर्ष की अभिव्यक्ति आज की रचनाओं की विशेषता...
ख़बर

संजलि को न्याय दिलाने के लिए जनसंगठनों का लखनऊ में प्रदर्शन

लखनऊ। आगरा में मासूम अंजलि की पेट्रोल से जलाकर की गई निर्मम हत्या की गूंज आज लखनऊ में सुनाई पड़ी। विभिन्न महिला संगठनों और आवाम...
सिनेमा

भारतीय सिनेमा हाशिये के लोगों का सिनेमा नहीं है : पवन श्रीवास्तव

समकालीन जनमत
प्रतिरोध का सिनेमा : 10 वां पटना फिल्मोत्सव पटना. ‘‘जिसे भारतीय सिनेमा कहा जाता है, उसे भारतीय सिनेमा नहीं कहना चाहिए। वह सच्चे अर्थों में...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

कवि विद्रोही की याद में कविता पाठ और परिचर्चा

समकालीन जनमत
जनकवि रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ के स्मृति दिवस की पूर्व संध्या पर 7 दिसंबर को जन संस्कृति मंच की दिल्ली इकाई के सचिव रामनरेश राम के...
साहित्य-संस्कृति

न्याय के सवाल को छोड़कर सामाजिक सौहार्द की बात ही नहीं हो सकती : प्रो राजीव भार्गव

सुधीर सुमन
नई दिल्ली. ‘‘ जिस समाज में किसी एक समूह या समुदाय का वर्चस्व हो, जहां हिंसा, दमन-उत्पीड़न और शोषण हो, जहां असहिष्णुता हर नुक्कड़ पर...
साहित्य-संस्कृति

विभाजन को समझे बिना हल नहीं होगा सौहार्द का प्रश्न

आशुतोष कुमार
सामाजिक सौहार्द का मतलब केवल शांतिपूर्ण सहअस्तित्व नहीं होता. शांति तो ताकत और दमन से भी कायम की जा सकती है. शांति तो युद्धविराम की...
ख़बर

सातवाँ कुबेर दत्त स्मृति व्याख्यान में ‘सामाजिक सौहार्द की चुनौतियाँ ‘ पर बोलेंगे प्रो राजीव भार्गव

संजय जोशी
नई दिल्ली. सातवाँ कुबेर दत्त स्मृति व्याख्यान 17 नवम्बर को शाम 5 से नई दिल्ली के गाँधी शांति प्रतिष्ठान ( दीन दयाल उपाध्याय मार्ग, आई...
स्मृति

कामरेड शाह चाँद की याद

रामजी राय
जाने कितनी यादे हैं कामरेड शाह चाँद की। आईपीएफ और फिर इंकलाबी मुस्लिम कान्फ्रेंस में साथ काम करने की। कामरेड तकी रहीम से नोक-झोंक फिर...
जनमत

दलित-बहुजन बौद्धिकता के विमर्श का दमन है प्रो. कांचा इलैया की पुस्तकों को पाठ्यक्रम से हटाना

समकालीन जनमत
नई दिल्ली. जन संस्कृति मंच ने दिल्ली विश्वविद्यालय की स्टैंडिंग कमिटी द्वारा प्रो. कांचा इलैया की पुस्तकों को एम.ए राजनीति विज्ञान के पाठ्यक्रम से हटाए...
ख़बर

डीटीसी कर्मचारियों की हड़ताल को कई संगठनों का समर्थन मिला

उमा राग
नई दिल्ली.  डीटीसी कर्मचारियों की 29 अक्टूबर को होने वाली हड़ताल को हरियाणा रोडवेज के कर्मचारियों के साथ -साथ कई ट्रेड यूनियनों, शिक्षक संगठनों ,...
स्मृति

हृदय में व्यथा का रिसाव करती हैं सुरेश सेन निशांत की कविता

समकालीन जनमत
श्याम अंकुरम सुरेश सेन निशांत नहीं रहे. स्तब्धकारी खबर ! मेरा उनसे परिचय राजवर्धन के संपादन में कविता संकलन ‘स्वर –एकादश ‘ से हुआ था....
कहानी

प्रभा दीक्षित के नवगीतों में नारी मन के साथ आमजन भी – कमल किशोर श्रमिक

‘ गौरैया धूप की ’ का हुआ लोकार्पण  कानपुर। जन संस्कृति मंच, कानपुर के तत्वावधान में सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ प्रभा दीक्षित के नवगीत संग्रह ‘गौरैया...
ख़बरशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

विष्णु खरे: बिगाड़ के डर से ईमान का सौदा नहीं किया

मृत्युंजय
विष्णु जी नहीं रहे। हिंदी साहित्य संसार ने एक ऐसा बौद्धिक खो दिया, जिसने ‘बिगाड़ के डर से ईमान’ की बात कहने से कभी भी...
ख़बर

लेखकों, बुद्धिजीवियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी के खिलाफ़ प्रतिरोध तेज करें-जसम

समकालीन जनमत
नई दिल्ली. जन संस्कृति मंच ने लेखकों, बुद्धिजीवियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के घर छापेमारी और गिरफ्तारी को जनता के बीच भय और आतंक फ़ैलाने की...
चित्रकला

भारतीय चित्रकला में स्त्री को उपेक्षित रखा गया है- अशोक भौमिक

सुधीर सुमन
पटना: 13 अगस्त 2018. ‘‘भारतीय चित्रकला में ज्यादातर पुरुषों और पितृसत्तात्मक समाज को महिमामंडित करने का कार्य ही किया गया है। स्त्रियों को दोयम दर्जे...
ख़बरशख्सियतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति

कवि वीरेन डंगवाल के 71वें जन्मदिन पर बरस रही थी कवि की याद

समकालीन जनमत
(पांच अगस्त को हिंदी के कवि वीरेन डंगवाल का जन्म दिन होता है । देश भर में कवि की याद में हुए आयोजनों में से...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

वीरेन दा की याद: ‘नदी’ कविता के बहाने से

समकालीन जनमत
शिव प्रकाश त्रिपाठी “ लंबे और सुरीले नहीं थे मेरे गान मेरी सांसे छोटी थी पर जब भी गाए मैंने बसंत के ही गान गाए...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

सत्ता संपोषित मौजूदा फासीवादी उन्माद प्रेमचंद की विरासत के लिए सबसे बड़ा खतरा:डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सुमन

समकालीन जनमत
लोकतंत्र, संविधान और साझी संस्कृति के नेस्तनाबूद करने की हो रही है गहरी साजिश-कल्याण भारती प्रेमचंद के सपनों के भारत से ही बचेगी हमारी साझी...
शख्सियत

राजेन्द्र कुमार : जैसा मैंने उन्हें देखा

प्रणय कृष्ण
उनका अलंकरण मुश्किल है. उनके बारे में अतिशयोक्ति संभव नहीं. ध्यान से देखें तो उन्होंने अपने जीवन और अपनी रचना में कुछ भी अतिरिक्त, कुछ...
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