समकालीन जनमत

Tag : उपन्यास

शख्सियत

‘क्यों कर न हो मुशब्बक शीशे सा दिल हमारा’ -शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी की याद

मृत्युंजय
फ़ारूक़ी साहब नहीं रहे। यह इलाहाबाद ही नहीं, समूचे हिन्दी-उर्दू दोआब के लिए बेहद अफसोसनाक खबर है। वे उर्दू के जबरदस्त नक्काद [आलोचक] थे, बेहतरीन...
शख्सियत

प्रेमचंद और किसान संकट : गोपाल प्रधान

समकालीन जनमत
(31 जुलाई को प्रेमचंद की 140वीं जयंती के अवसर पर समकालीन जनमत जश्न-ए-प्रेमचंद का आयोजन कर रहा है। इस अवसर पर 30-31 जुलाई को समकालीन...
शख्सियत

हिन्दी साहित्य का जातिवाद और प्रेमचंद: रामायन राम

समकालीन जनमत
(31 जुलाई को प्रेमचंद की 140वीं जयंती के अवसर पर समकालीन जनमत 30-31 जुलाई ‘जश्न-ए-प्रेमचंद’ का आयोजन कर रहा है। इस अवसर पर समकालीन जनमत...
पुस्तक

टिकटशुदा रुक्का: अंत ही शुरुआत है

समकालीन जनमत
ममता सिंह नवीन जोशी द्वारा लिखित टिकटशुदा रुक्का उपन्यास पर बात करने के लिए जाने क्यों पहले अंत की बात करने का मन होता है,...
स्मृति

‘ गोरा ’ में खचित जटिल समय

उन्नीसवीं सदी की आखिरी चौथाई की समूची हलचल का साक्ष्य इस उपन्यास से हासिल होता है. समय को रवींद्रनाथ ने केवल तारीख के रूप में...
पुस्तक

‘अस्थि फूल’: यात्रा एक अंधी सुरंग की

कैलाश बनवासी
 ‘अस्थि फूल ’ उपन्यास पूरा पढ़ लेने के बाद, बल्कि पूरा पढ़ने के दौरान,पृष्ठ-दर-पृष्ठ एक बात का तीव्र से तीव्रतर अहसास होता रहा कि इसे...
ख़बर साहित्य-संस्कृति

जन संस्कृति मंच ने प्रसिद्ध कथाकार स्वयंप्रकाश को दी श्रद्धाजंलि

समकालीन जनमत
जन संस्कृति मंच दुर्ग-भिलाई इकाई द्वारा दिनांक 8 दिसंबर 2019 को नेहरू सांस्कृतिक भवन, सेक्टर-1, भिलाई में प्रसिद्ध कथाकार के आकस्मिक निधन पर भावभीनी श्रद्धाजंलि...
साहित्य-संस्कृति

नागार्जुन के उपन्यासों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

समकालीन जनमत
आत्माराम सनातन धर्म महाविद्यालय, जनकवि नागार्जुन स्मारक निधि तथा रज़ा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 16 अक्टूबर को ‘नागार्जुन के उपन्यास : विविध आयाम’...
शख्सियत साहित्य-संस्कृति

महाअरण्य की माँ- महाश्वेता देवी

समकालीन जनमत
अभिषेक मिश्र वर्षों पहले ‘दैनिक हिंदुस्तान’ में प्रसिद्ध लेखक कमलेश्वर का एक साप्ताहिक कॉलम आया करता था, जिसमें वो सांप्रदायिकता, राष्ट्रीय एकता, धर्मनिरपेक्षता आदि विषयों...
नाटक

आरा में चार दिन ‘राग दरबारी’

सुधीर सुमन
आरा की नाट्य संस्था ‘भूमिका’ द्वारा 24 दिसंबर से 27 दिसंबर तक चार दिवसीय नाट्य मंचन का सिलसिला 2015 में मोहन राकेश के नाटक ‘आषाढ़...

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