समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

ख़बरसाहित्य-संस्कृति

अशोक भौमिक जसम की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष और राम नरेश राम सचिव चुने गए

समकालीन जनमत
अनुपम सिंह नई दिल्ली. जन संस्कृति मंच का तीसरा राज्य सम्मलेन 7 अप्रैल को गाँधी शांति प्रतिष्ठान में हुआ. सम्मेलन का आरंभ ‘संगवारी थियेटर ग्रुप’...
साहित्य-संस्कृति

11 वां लोकरंग 13-14 अप्रैल को, 150 कलाकार दिखाएंगे बिहार, यूपी, राजस्थान, छत्तीसगढ़ की लोक कलाएं

गोड़उ नृत्य, पखावज, कठपुतली नाच, बणजारा-बणजारी और ग्रामीण भवाई नृत्य, घूमर लोक नृत्य, बिहार का जट-जटिन  नृत्य का होगा प्रदर्शन कुशीनगर. लोकसंस्कृतियों के जनपक्षधर स्वरूप...
साहित्य-संस्कृति

गीतांजलि श्री के ताजा उपन्यास ‘रेत-समाधि’ पर बनारस में समीक्षात्मक चर्चा —– एक रिपोर्ट

कुसुम वर्मा
बीएचयू आईआईटी के मानविकी विभाग की तरफ से हाल ही में हिन्दी साहित्य की समकालीन चर्चित लेखिका गीतांजलि श्री के स्त्री केन्द्रित उपन्यास रेत-समाधि पर...
सिनेमा

गरीबों की जमीन हड़पने और उन्हें अपराधी बताने का सिंड्रोम

समकालीन जनमत
(‘हिचकी’ के बहाने भारत की सबसे बड़ी सामाजिक बीमारी की चर्चा) आलोक कुमार श्रीवास्तव मार्च 2018 में आयी रानी मुखर्जी की केंद्रीय भूमिका वाली फिल्म ‘हिचकी’ की मुख्य किरदार नैना माथुर...
स्मृति

क्रान्ति के मोर्चे का सिपाही कामरेड गंगा प्रसाद

समकालीन जनमत
पहली पुण्यतिथि 4 अप्रैल पर कौशल किशोर कुछ लोग साधारण दिखते हैं पर वे साधारण होते नहीं। इसी बात को ‘ प्रतिरोध का सिनेमा ’...
चित्रकला

काला सच और रणजीत सिंह की कला

अमेरिकी कला ने परम स्वतंत्रता के नाम पर एक तरफ अमूर्तन की भूलभुलैया खड़ी की तो दूसरी तरफ फोटो रियलिज्म ( सुपर रियलिज्म या हाइपर...
स्मृति

केदार बाबू की कविताएँ बुंदेलखंड की सांस्कृतिक गजेटियर हैं

समकालीन जनमत
रमाशंकर सिंह आज केदारनाथ अग्रवाल का जन्मदिन है. आज ही के दिन 1911 में उनका जन्म हुआ था. युग की गंगा, लोक और आलोक, फूल...
स्मृति

कर्मकर्ता और कवि रजनी तिलक ने पूरी ज़िंदगी मेहनतकशों की शोषण मुक्ति और सम्मान के नाम कर दिया- जसम

समकालीन जनमत
गंगाधर पान तावड़े का जाना प्रतिरोध के एक महत्वपूर्ण स्तंभ का जाना है- जसम सामाजिक कार्यकर्ता और प्रख्यात साहित्यकार रजनी तिलक का 30 मार्च 2018...
स्मृति

आधी रात कांपते हाथों, रुंधे कंठ और बहते हुए आंसुओं के बीच लिखा गया एक पत्र

समकालीन जनमत
 प्रधानमंत्री के नाम शहीद चन्द्रशेखर की मां का पत्र संतोष सहर   17 अप्रैल 1997 की वह शाम कभी नहीं भूलती जब मैं ‘समकालीन लोकयुद्ध’...
साहित्य-संस्कृति

मानसा में सखी सुल्तान

आशुतोष कुमार
  इस 23 मार्च को पंजाब के मानसा कस्बे में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की तीन ख़ूबसूरत मूर्तियों का अनावरण किया गया. अनावरण  भाकपा...
चित्रकला

कुम्भ मेले का लोगो : कला की सरकारी समझ का नायाब नमूना

अशोक भौमिक
अख़बार में छपे फोटो से पहले तो मुझे यह लगा कि उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री प्रयाग में 2019 में होने वाले कुम्भ मेले...
साहित्य-संस्कृति

एंगेल्स की शाहकार किताब ‘ द ओरिजिन आफ़ द फ़ेमिली, प्राइवेट प्रापर्टी एंड द स्टेट ’

गोपाल प्रधान
2010 में त्रिस्तम हन्ट की नई भूमिका के साथ एंगेल्स की महान किताब ‘द ओरिजिन आफ़ द फ़ेमिली, प्राइवेट प्रापर्टी एंड द स्टेट’ का प्रकाशन...
कविता

यहीं कही रहेंगे केदारनाथ सिंह

समकालीन जनमत
मंगलेश डबराल, वरिष्ठ कवि हिन्दी कविता की एक महत्वपूर्ण पीढी तेज़ी से विदा हो रही है. यह दृश्य  दुखद और  डरावना  है जहां ऐसे बहुत...
साहित्य-संस्कृति

केदारनाथ सिंह के काव्य वैशिष्टय का अनुकरण नहीं किया जा सकता: प्रो विश्वनाथ प्रसाद तिवारी

समकालीन जनमत
साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, संस्कृतिकर्मियों ने प्रख्यात कवि केदारनाथ सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गोरखपुर, 21 मार्च। प्रेमचन्द पार्क में आज दोपहर बड़ी संख्या में जुटे साहित्यकारों,...
स्मृति

‘ संस्कृति खरगोश की तरह है, जो आने वाले खतरे का आभास देती है ’

समकालीन जनमत
कौशल किशोर   यह कैसा समय है कि साथ के लोग साथ छोड़े जा रहे हैं. कुंवर जी और दूधनाथ सिंह को हम ठीक से...
स्मृति

‘आदमी के उठे हुए हाथों की तरह’ हिन्दुस्तानी अवाम के संघर्षों को थामे रहेगी केदारनाथ सिंह की कविता : जसम

समकालीन जनमत
कवि केदारनाथ सिंह को जन संस्कृति मंच की श्रद्धांजलि जनतांत्रिक मूल्यों की अकाल-वेला में केदारनाथ सिंह की कविता जनप्रतिरोध के सारसों की अप्रत्याशित आवाज़ थी....
साहित्य-संस्कृतिस्मृति

‘ कविता भविष्य में गहन से गहनतर होती जाएगी ’

मनोज कुमार सिंह
  ( प्रख्यात कवि प्रो. केदारनाथ सिंह ने 26 फरवरी 2016 को गोरखपुर के प्रेमचंद पार्क में प्रो परमानंद श्रीवास्तव की स्मृति में ‘ कविता...
स्मृति

मै गांव-जवार और उसके सुख-दुख से जुड़ा हुआ हूं

(ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलने के बाद डॉ केदारनाथ सिंह से यह संक्षिप्त बातचीत टेलीफ़ोन पर हुई थी. यह साक्षात्कार दैनिक भास्कर में प्रकाशित हुआ था. )...
स्मृति

अलविदा, स्टार गुरु जी !

संजय जोशी
  मैंने 1989 के जुलाई महीने में जे एन यू के भारतीय भाषा विभाग के हिंदी विषय में एडमिशन लिया. कोर्स एम ए का था....
कविताशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

उठो कि बुनने का समय हो रहा है

समकालीन जनमत
केदारनाथ सिंह की कुछ कविताएं   मुक्ति का जब कोई रास्ता नहीं मिला मैं लिखने बैठ गया हूँ मैं लिखना चाहता हूँ ‘पेड़’ यह जानते...
Fearlessly expressing peoples opinion