पुस्तक पार्वती: कवि-कहानीकार शेखर जोशी की अपनी धरती और अपने लोगों से बहुत गहरे प्यार की कविताएँ हैंसमकालीन जनमतJanuary 23, 2022January 23, 2022 by समकालीन जनमतJanuary 23, 2022January 23, 20220352 सदाशिव श्रोत्रिय मैं देखता हूं कि हमारे अधिकांश लेखक “ नौस्टाल्जिया” शब्द का प्रयोग अक्सर इसके नकारात्मक अर्थ में ही करते हैं । मेरे ख्याल...
पुस्तक साधारण लोग असाधारण शिक्षक: निराशा के कुहासे को काटती कहानियाँसमकालीन जनमतJanuary 9, 2022January 9, 2022 by समकालीन जनमतJanuary 9, 2022January 9, 20220323 प्रतिभा कटियार सरल होना इतना कठिन क्यों होता है आखिर? सीधी सी बात होती है फिर वह भाषा के जाल में उलझकर क्यों एक पहेली...
पुस्तक रिक्त स्थान और अन्य कविताएँ: इन कविताओं से गुज़रते हुए प्रेम और कोमलता की बहुत सारी तहों से हमारा साबिका पड़ता हैसमकालीन जनमतJanuary 9, 2022January 9, 2022 by समकालीन जनमतJanuary 9, 2022January 9, 2022068 प्रियदर्शन ऐसी कई किताबें हैं जिन पर पिछले दिनों लिखने की इच्छा होती रही लेकिन लिखना टलता रहा। शिवप्रसाद जोशी का कविता संग्रह ‘रिक्त स्थान...
पुस्तक ‘1232 km: कोरोना काल में एक असम्भव सफ़र’: लाकडाउन की याद है?गोपाल प्रधानJanuary 4, 2022January 4, 2022 by गोपाल प्रधानJanuary 4, 2022January 4, 2022056 2021 में राजकमल से विनोद कापड़ी की ‘1232 km: कोरोना काल में एक असम्भव सफ़र’ को याद रखा जाना चाहिए ताकि वर्तमान सत्ता के जन...
पुस्तक शिक्षा और स्वतंत्रता- बेल हुक्स की किताब ‘टीचिंग टु ट्रान्सग्रेस: एजुकेशन ऐज द प्रैक्टिस आफ़ फ़्रीडम’गोपाल प्रधानDecember 26, 2021December 26, 2021 by गोपाल प्रधानDecember 26, 2021December 26, 2021036 1994 में रटलेज से बेल हुक्स की किताब ‘टीचिंग टु ट्रान्सग्रेस: एजुकेशन ऐज द प्रैक्टिस आफ़ फ़्रीडम’ का प्रकाशन हुआ । लेखिका ने किताब की...
पुस्तक कमला सिंघवी की किताब ‘दाम्पत्य के दायरे’ के बहाने कुछ बातेंसमकालीन जनमतDecember 25, 2021December 25, 2021 by समकालीन जनमतDecember 25, 2021December 25, 2021074 निकिता हाल ही में मैंने “कमला सिंघवी” की पुस्तक “दाम्पत्य के दायरे” पढ़ा, जिसे पढ़ते समय एक स्थान पर बैठे हुए ही मानो मैंने एक...
पुस्तक ज़ीरो माइल पटना : तीन धाराओं से बनी किताबसमकालीन जनमतDecember 24, 2021December 24, 2021 by समकालीन जनमतDecember 24, 2021December 24, 2021037 पटना, 21 दिसंबर। जिस तरह पटना तीन नदियों से घिरा है उसी तरह संजय कुंदन की किताब भी कहानी, उपन्यास और कविताओं से मिलाकर बनी...
पुस्तक एक भारत ऐसा भीगोपाल प्रधानDecember 21, 2021December 21, 2021 by गोपाल प्रधानDecember 21, 2021December 21, 20210162 भाषा सिंह की किताब ‘अदृश्य भारत: मैला ढोने के बजबजाते यथार्थ से मुठभेड़’ का प्रकाशन 2012 में पेंगुइन बुक्स से हुआ। किताब को एकाधिक अर्थों...
पुस्तक सोपान जोशी की किताब ‘जल थल मल’-आधुनिक जीवन का ज्ञानकोशगोपाल प्रधानNovember 27, 2021November 29, 2021 by गोपाल प्रधानNovember 27, 2021November 29, 2021054 राजकमल से 2018 के बाद 2020 में छपी सोपान जोशी की किताब ‘जल थल मल’ को देखने के बाद हूक सी पैदा होती है कि...
पुस्तक हिंदुत्व के उत्थान से उपजी निराशागोपाल प्रधानOctober 25, 2021November 17, 2021 by गोपाल प्रधानOctober 25, 2021November 17, 20210480 अभय कुमार दुबे की किताब ‘हिंदू-एकता बनाम ज्ञान की राजनीति’ का प्रकाशन वाणी प्रकाशन से 2019 में हुआ । शीर्षक ही बिना किसी लाग लपेट...
पुस्तक राजनीतिक प्रतिरोध में अहिंसा की भूमिकागोपाल प्रधानOctober 22, 2021November 19, 2021 by गोपाल प्रधानOctober 22, 2021November 19, 20210439 किताब में यही बताया गया है कि बीसवीं सदी में जनता ने हिंसा के बगैर सत्ता पर कब्जा करने की क्षमता अर्जित की । लेखकों...
पुस्तक शहर और स्त्रीगोपाल प्रधानOctober 7, 2021October 7, 2021 by गोपाल प्रधानOctober 7, 2021October 7, 20210339 2019 में बिट्वीन द लाइन्स से लेस्ली केर्न की किताब ‘ फ़ेमिनिस्ट सिटी: ए फ़ील्ड गाइड ’ का प्रकाशन हुआ । लेखिका ने किताब की...
पुस्तक एक देश बारह दुनिया: समकालीन भारत में विकास के विरोधाभासों का रेखाचित्रसमकालीन जनमतOctober 3, 2021October 4, 2021 by समकालीन जनमतOctober 3, 2021October 4, 20210454 नीरज एक स्वतंत्र देश के तौर पर भारत के लिए 75 वर्षों का अरसा कोई लंबा समय तो नहीं है। लेकिन, यह भी सच है...
पुस्तक ‘उड़ता बनारस’: स्थापत्य में फ़ासीवाद गोपाल प्रधानSeptember 26, 2021September 27, 2021 by गोपाल प्रधानSeptember 26, 2021September 27, 20210305 सुरेश प्रताप की किताब ‘ उड़ता बनारस ’ हमसे वर्तमान शासन के कुछ कारनामों को गहरी निगाह से देखने की मांग करती है । पिछले...
पुस्तक विभाजन की विभीषिका और उत्तराखंड के इतिहास की गुमशुदगी की परत में लिपटा एक बयानके के पांडेयSeptember 22, 2021September 22, 2021 by के के पांडेयSeptember 22, 2021September 22, 20210722 यह कथा सानीउडियार क्षेत्र, जिला बागेश्वर (पहले अल्मोड़ा) उत्तराखंड के एक व्यक्ति हाजी अब्दुल शकूर की है। उनका खानदान उन्नीस सौ ईस्वी से कुछ पहले...
पुस्तक स्मृतियों के कथ्य में जीवनानुभव की अभिव्यक्तिसमकालीन जनमतSeptember 13, 2021September 14, 2021 by समकालीन जनमतSeptember 13, 2021September 14, 20210835 राम विनय शर्मा ‘ग़ाज़ीपुर में क्रिस्टोफर कॉडवेल’ पत्रकार और लेखक उर्मिलेश के संस्मरणों का संकलन है। ‘प्रमुखतः इसमें साहित्य-संस्कृति और मीडिया से सम्बद्ध लोगों, प्रसंगों...
पुस्तक सरकार का अपने ही नागरिकों से युद्धगोपाल प्रधानSeptember 5, 2021September 6, 2021 by गोपाल प्रधानSeptember 5, 2021September 6, 20210462 लेख के शीर्षक से भ्रम सम्भव है कि यह किताब नागरिकता संबंधी कानूनों के बारे में है लेकिन दुर्भाग्य से हमारे देश की सरकार लम्बे...
पुस्तक वैश्विकता और स्थानीयता को जोड़ने वाली आत्मालोचना युक्त भावनासमकालीन जनमतSeptember 5, 2021September 5, 2021 by समकालीन जनमतSeptember 5, 2021September 5, 20210691 कुमार मुकुल ताइवान के वरिष्ठ कवि, आलोचक ली मिन-युंग की कविताएँ आजादी, प्रेम और स्वप्न की भावनाओं को सहज और सचेत ढंग से स्वर देती...
पुस्तक जाति-मुक्ति का प्रश्न, उसकी राजनीति और पूंजी-लोक (नवीन जोशी के उपन्यास के बहाने कुछ बातें)के के पांडेयAugust 23, 2021August 24, 2021 by के के पांडेयAugust 23, 2021August 24, 20210755 (एक दलित नौजवान के अंतर्द्वंद की कथा के भीतर से उत्तराखंडी समाज के भीतर की जातिगत विषमताओं, कारपोरेट की गुलामगीरी और राजनैतिक आंदोलनों के सामाजिक...
पुस्तक कितने बहानों के बीच देश काल: अरुणाभ सौरभ का काव्य संग्रह ‘किसी और बहाने से’समकालीन जनमतAugust 22, 2021August 22, 2021 by समकालीन जनमतAugust 22, 2021August 22, 20210728 रोमिशा जाने कितने बहानों से कवि अपने ईर्द -गिर्द के समाज, देश, काल में क्या सब देख लेता है और उसी देखने के क्रम में...