Category : पुस्तक

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शिक्षा में ‘बैंकिग व्यवस्था’ के बरक्श ‘उत्पीड़ितों के शिक्षा शास्त्र’ की खोज

डॉ. दीनानाथ मौर्य “मेरी माँ ने मुझे सिखाया था की ईश्वर बहुत अच्छा है, इसलिए मैंने यह निष्कर्ष निकाला कि समाज में जो वर्गभेद है,...
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बहुत सी भ्रांतियों को तोड़ती किताब- इस्लाम की ऐतिहासिक भूमिका

समकालीन जनमत
मुहम्मद उमर हम जब कभी बुकशॉप से किताबों को खरीदने जाया करते, तो एम एन राय की पुस्तक ‘इस्लाम की ऐतिहासिक भूमिका’ सामने ही रखी...
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बल्ली के यहां उम्मीद का एक बच्चा है, जो सारी तानाशाहियों और पूंजी के फैलाये अंधेरे के ऊपर बैठा है

दुर्गा सिंह
हिंदी ग़ज़ल में बल्ली सिंह चीमा एक लोकप्रिय नाम हैं। यह उनका पांचवां ग़ज़ल संग्रह है। इसकी भूमिका हमारे दौर के महत्वपूर्ण आलोचक प्रणय कृष्ण...
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समय, समाज, संवेदना को व्यक्त करती है ‘मेक्सिको: एक घर परदेश में’

समकालीन जनमत
ममता सिंह सवाल है कि आख़िर हम यात्रा वृत्तांत क्यों पढ़ते हैं, किसी जगह, देश की भौगोलिक, ऐतिहासिक, प्राकृतिक जगहों के बारे में तो इंटरनेट...
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‘ वैधानिक गल्प ’ में गल्प कुछ भी नहीं है

समकालीन जनमत
डॉ बृजराज सिंह बचपन में स्कूल की किताबों में नैतिक शिक्षा का एक पाठ हुआ करता था, सिद्धार्थ और देवदत्त की कहानी वाला। जिसमें देवदत्त...
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हिन्दी समाज के स्वास्थ्य का पैरामीटर है हेमंत कुमार का कहानी संग्रह

दुर्गा सिंह
रज्जब अली, हेमंत कुमार का पहला कहानी संग्रह है। इसमें कुल छः कहानियां हैं। इन सभी कहानियों की खासियत यह है, कि इसमें व्यवस्थागत प्रश्न...
जनमत पुस्तक

सत्य का अनवरत अन्वेषण हैं राकेश रेणु के ‘इसी से बचा जीवन’ की कविताएँ

सुशील मानव
  कविता क्या है और इसका काम क्या है- इस पर अनेक बातें हैं, अनेक परिभाषाएं हैं। लेकिन मौजूदा समय सत्य पर संकट का समय...
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गाथा इक सूरमे दी : जन नायक कामरेड बलदेव सिंह मान पर एक खोज खोज पूर्ण पुस्तक

समकालीन जनमत
सुखदर्शन नत्त  पंजाब के नक्सलवादी आन्दोलन से उभर कर सामने आये जन नायक और राजनैतिक नेताओं की पहली पंक्ति में आने वाले कामरेड बलदेव सिंह...
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मोनिका कुमार की ‘आश्‍चर्यवत्’ कविता की नई सरणी है

कुमार मुकुल
आलोक धन्वा ने एक बातचीत में मोनिका कुमार की कविताओं की चर्चा की थी, तब तक उनकी कविताएं पढ़ी नहीं थीं मैंने। हां, फेसबुक पर...
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उन्नीसवीं सदी के विदेशी अखबारों में कबीर

कबीर के बारे में ब्रिटेन के अखबारों में जितना छपा है उतना शायद तब, किसी अन्य समाज सुधारक के बारे में नहीं छपा. कबीर के...
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औपनिवेशिक भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन

गोपाल प्रधान
2020 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस से अली रज़ा की किताब ‘रेवोल्यूशनरी पास्ट्स: कम्युनिस्ट इंटरनेशनलिज्म इन कोलोनियल इंडिया’ का प्रकाशन हुआ । लेखक को एक मुखबिर...
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टिकटशुदा रुक्का: अंत ही शुरुआत है

समकालीन जनमत
ममता सिंह नवीन जोशी द्वारा लिखित टिकटशुदा रुक्का उपन्यास पर बात करने के लिए जाने क्यों पहले अंत की बात करने का मन होता है,...
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इंडोनेशिया का कत्लेआम

गोपाल प्रधान
2020 में पब्लिक अफ़ेयर्स से विनसेन्ट बेविन्स की किताब ‘ द जकार्ता मेथड : वाशिंगटन’स एन्टीकम्युनिस्ट क्रूसेड & द मास मर्डर प्रोग्राम दैट शेप्ड आवर...
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क्या हमें भी कोई शाहूजी महाराज जैसा शासक मिलेगा

समकालीन जनमत’ फेसबुक लाइव के जरिए आज सुधीर सुमन ने चर्चित कथाकार संजीव के उपन्यास ‘प्रत्यंचा’ के कुछ महत्वपूर्ण अंशों का पाठ किया। विशाखापट्टनम के...
कविता पुस्तक

जीवन, मानवीय संबंध और संघर्षों की निरंतरता की कविताएँ

डॉ. अली इमाम खाँ बलभद्र का कविता-संग्रह ” समय की ठनक ” को पढ़ने, समझने और महसूस करने का मौक़ा मिला। इन कविताओं से गुज़रते...
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अवधेश त्रिपाठी की आलोचना पद्धति में लोकतंत्र के मूल्य प्राण की तरह है

दुर्गा सिंह
  किसी भी आलोचक के लिए जरूरी होता है, कि वह बाह्य जगत के सत्य और रचना के सत्य से बराबर-बराबर गुजरे। आलोचना के लिए...
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लोकतंत्र का मर्सिया हैं ‘सुगम’ की ग़ज़लें

दुर्गा सिंह
  हिंदी ग़ज़ल में महेश कटारे ‘सुगम’ जाना-माना नाम है। ‘सुगम’ हिंदी ग़ज़ल की उसी परंपरा से आते हैं, जिसे दुष्यंत, अदम गोंडवी, शलभ श्रीराम...
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अछरिया हमरा के भावेले

गोपाल प्रधान
पुस्तकालय केवल कोई इमारत नहीं होता बल्कि सम्पूर्ण सामाजिक ढांचा होता है। किताब में जो जानकारी कूटबद्ध होती है उसे हासिल करने के जरिए हम...
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विश्व पुस्तक दिवस: किताबें कुछ तो कहना चाहती हैं

अजय कुमार किताबें करती हैं बातें आज यानी 23 अप्रैल को विश्व पुस्तक दिवस के रूप में मनाया जाता है। और जैसे ही कोई किताबों...
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फ़्रांस में फ़ासीवाद

गोपाल प्रधान
 2020 में ब्लूम्सबरी एकेडमिक से क्रिस मिलिंगटन की किताब ‘ए हिस्ट्री आफ़ फ़ासिज्म इन फ़्रान्स: फ़्राम द फ़र्स्ट वर्ल्ड वार टु द नेशनल फ़्रंट’ का...