समकालीन जनमत

Category : जनमत

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पराजय को उत्सव में बदलती अनुपम सिंह की कविताएँ

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(अनुपम सिंह की कविताओं को पढ़ते हुए ऐसा लगता है जैसे वे अपने साथ हमें पितृसत्ता की एक बृहद प्रयोगशाला में लिए जा रहीं हैं...
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योग दिवस, प्रधानमंत्री और पहाड़

पहाड़ में लोग जब अपने रोजमर्रा के जीवन के लिए ऐसी विकट जद्दोजहद में लगें हों तो उनके सामने कोई भी योग और योग दिवस...
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क्या चर्च, मोदी सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रहा है ?

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आर्चबिशपों की मात्र इसलिए निंदा करना क्योंकि उन्होंने अपनी राय व्यक्त की, अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. आखिर वे भी इस देश के नागरिक हैं और उन्हें...
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भारत-पाकिस्तान सीमा पर अभी भी सैनिक क्यों मर रहे हैं ?

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भारत व पाकिस्तान की सरकारों ने दुश्मनी बना कर रखने की नीति अपनाई है जिसमें अब कई निहित स्वार्थ पैदा हो गए हैं जबकि व्यापारी...
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सहज काव्‍य‍कथाओं सी हैं अदनान की कविताएँ

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अदनान की कविताओं से गुजरना अपने समय के लोक से गुज़रना और उसकी त्रासदियों को जानते हुए उसकी लाचारी को अपनी लाचारी में बदलते देखना...
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काला : फ़ासीवाद की पहचान कराती फ़िल्म

आशुतोष कुमार
सुपरस्टार रजनीकांत की जानी पहचानी शैली की फ़िल्म होते हुए भी महज एक कल्ट फ़िल्म नहीं है. यह देश के वर्तमान राजनीतिक माहौल का नाटकीय...
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कुमार मुकुल की कविताएँ : लोकतंत्र के भगवाकरण की समीक्षा

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30 वर्षों से रचनारत कुमार मुकुल के कविता परिदृश्य का रेंज विशाल और वैविध्य से भरा है , प्रस्तुत कविताओं में आज के समय को...
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नफरत के खिलाफ अदब का प्रोटेस्ट है ‘मै मुहाजिर नहीं हूं ’ – शारिब रुदौलवी

समकालीन जनमत
कथाकार-उपन्यासकार बादशाह हुसैन रिजवी के उपन्यास ‘मै मुहाजिर नहीं हूं’ के उर्दू संस्करण का 9 जून को यूपी प्रेस क्लब में विमोचन हुआ. इस उपन्यास...
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पत्थलगड़ी के बहाने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर चोट ?

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झारखंड के आदिवासी बहुल गांवों में किया गया पत्थलगड़ी राज्य सरकार के लिए सिर दर्द बन चुका है. इन गांवों के लोग सरकार के खिलाफ...
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दक्षिणपंथ की कीलें

जावेद अनीस
भगवा खेमे के लिये अपने मंसूबो को पूरा करने के लिए 2019 का चुनाव निर्णायक है और इसके लिये वे कुछ भी करेंगे. यह चुनाव...
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क्या पत्थलगड़ी असंवैधानिक है ?

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[author] [author_image timthumb=’on’]http://samkaleenjanmat.in/wp-content/uploads/2018/05/gladson-dungdung.jpg[/author_image] [author_info]ग्लैडसन डुंगडुंग [/author_info] [/author] झारखंड के आदिवासी इलाकों में हो रही पत्थलगड़ी से सरकार की नींद हराम हो गई है. झारखंड के...
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सीख़चों के बाहर कैद पुलिस

पुलिस कर्मियों की कार्यस्थितियों में समुचित सुधार का एजेंडा न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने उत्तराखंड सरकार के सामने रख दिया...
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विहाग वैभव की कविताएँ : लोक जीवन के मार्मिक संवेदनात्मक ज्ञान की कविताएँ हैं- मंगलेश डबराल

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  युवा कवि विहाग वैभव की कविताओं में क्रांति, विद्रोह, विरोध, निषेध के तीखे स्वर हैं और वह प्रेम भी है जिसे संभव करने के...
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हैबसपुर जनसंहार के आरोपियों की रिहाई और राघोपुर दियारा कांड के खिलाफ माले का प्रतिवाद

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पटना, 2 जून. बाथे-बथानी-मियांपुर-नगरी आदि जनसंहारों की ही तर्ज पर पटना जिले के बहुचर्चित हैबसपुर जनसंहार के सभी 28 आरोपियों को एससी-एसटी कोर्ट द्वारा बरी...
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पत्थलगड़ी और प्रवेश निषेध

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जब संविधान, कानून एवं सरकार के होते हुए आदिवासी लूटे जा रहे हैं तब क्या वे चुपचाप अन्याय सहते रहेंगे ? इसीलिए वे अपने पारंपरिक...
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पत्थलगड़ी से क्यों भयभीत है राज्य सत्ता

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आदिवासियों ने जिस झारखंड राज्य के गठन के लिए सात दशकों तक संघर्ष किया उसी राज्य में अब उन्हें अपनी आजीविका के संसाधनों को सुरक्षित...
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हिटलर और फ़ासीवाद का नया उभार

गोपाल प्रधान
सोवियत संघ के पतन और विश्व अर्थतंत्र में आए बदलावों के चलते तेजी से उभरी नवफ़ासीवादी सक्रियता फिलहाल अंतर्राष्ट्रीय राजनीति की सबसे खतरनाक प्रवृत्ति बन...
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पत्थलगड़ी आंदोलन की जड़ें

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आदिवासियों के साथ प्रगति, विकास, जनहित, राष्ट्रहित एवं आर्थिक तरक्की के नाम पर धोखा किया गया है। इसलिए अब वे किसी भी कीमत पर अपनी...
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त्रासदी बनते इतिहास का आख्यानः मदन कश्यप का काव्य

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प्रणय कृष्ण (कवि मदन कश्यप को जनमत टीम की ओर से जन्मदिन की हार्दिक बधाई। इस अवसर पर पढ़िए ‘नीम रोशनी में’ संग्रह पर लिखा...
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20 साल से नियम-कानून की धज्जियाँ उड़ाती रही है वेदांता

वेदांता समूह की कंपनी स्टरलाइट कॉपर ने 20 साल तक नियम-कानून की धज्जियाँ उड़ायी. इन 20 सालों में केंद्र और राज्य में कई पार्टियां सत्ता...
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