कहानी ‘रोटी के चार हर्फ़’ सामायिक घटनाओं और सामाजिक विभेद की सरोकारी रचना हैसमकालीन जनमतFebruary 7, 2021February 7, 2021 by समकालीन जनमतFebruary 7, 2021February 7, 202102463 गति उपाध्याय “रोटी के चार हर्फ़ ” सिर्फ एक कहानी ही नहीं बल्कि एक कथाचित्र है | कहानी पाठकों के दिलदिमाग़ में चित्र खींचती है...
कविता सुधाकर रवि की कविता अपने समय से जुड़ने की एक ईमानदार कोशिश हैसमकालीन जनमतFebruary 7, 2021February 7, 2021 by समकालीन जनमतFebruary 7, 2021February 7, 202102350 अंचित अच्छी कविताओं की निर्मिति में तीन चीज़ें लगती हैं – विचारधारा, भाषा, और जीवन दृष्टि. अच्छी कविताएँ हमेशा वैसी होती हैं, जिनसे अपना दुःख,...
कविता अभिनव निरंजन की कविताएँ एक घर्षण हैं जिसके ताप से कवि अपने समय का बुख़ार नापता हैसमकालीन जनमतJanuary 31, 2021January 31, 2021 by समकालीन जनमतJanuary 31, 2021January 31, 202101777 निरंजन श्रोत्रिय युवा कवि अभिनव निरंजन अपनी कविताओं में रूपकों, स्थितियों एवं दृश्यों का विभेदन कर उसमें से कविता अर्जित करते हैं। उनके लिए ये...
जनमत गोरख पाण्डेय की कविता ‘समझदारों का गीत’समकालीन जनमतJanuary 29, 2021February 9, 2021 by समकालीन जनमतJanuary 29, 2021February 9, 20210508 समकालीन जनमत पर आज सुनिये जनकवि गोरख पाण्डेय(1945-29 जनवरी 1989) के स्मृति दिवस पर उनकी लिखी कविता ‘समझदारों का गीत’ वीडियो सम्पादन और आवाज़:...
कविता गोरख पाण्डेय की कविता ‘बन्द खिड़कियों से टकराकर’ समकालीन जनमतJanuary 29, 2021January 27, 2024 by समकालीन जनमतJanuary 29, 2021January 27, 20240939 समकालीन जनमत पर आज सुनिये जनकवि गोरख पाण्डेय(1945-29 जनवरी 1989) के स्मृति दिवस पर उनकी लिखी कविता ‘बन्द खिड़कियों से टकराकर’ ...
कविता उम्मीद की दूब के ज़िंदा रहने की कामना से भरी ज्योति रीता की कविताएँसमकालीन जनमतJanuary 24, 2021January 24, 2021 by समकालीन जनमतJanuary 24, 2021January 24, 202101819 कुंदन सिद्धार्थ “जब धरती पर सारी संवेदनाएँ समाप्ति पर होंगी तब बचा लेना प्रेम अपनी हथेली पर कहीं जब धरती बंजरपन की ओर अग्रसर...
कविता उस चाँद पर अब ख़ून के धब्बे हैं ..समकालीन जनमतJanuary 19, 2021January 19, 2021 by समकालीन जनमतJanuary 19, 2021January 19, 202101166 (आलोचना पत्रिका में प्रकाशित फ़रीद ख़ाँ की कविताओं पर एक नज़र) मोहम्मद उमर इस बार की हिंदी त्रैमासिक पत्रिका ‘आलोचना’ के ‘अक्टूबर-दिसम्बर 2020’ के अंक...
कविता राही डूमरचीर आदिवासी समाज और जीवन के गहरे कंसर्न के कवि हैंसमकालीन जनमतJanuary 17, 2021January 17, 2021 by समकालीन जनमतJanuary 17, 2021January 17, 202102180 विनय सौरभ राही डूमरचीर की कविताएँ पढ़ते हुए कुछ साधारण चीज़ें असाधारण तरीक़े से उनकी कविताओं में आती दिखती हैं। जैसे उनकी कविताओं के विषय।...
कविता प्रदीपिका की कविताएँ मानवीय आकांक्षाओं की तरफ़ खुली हुई खिड़कियाँ हैंसमकालीन जनमतJanuary 10, 2021January 10, 2021 by समकालीन जनमतJanuary 10, 2021January 10, 202101898 सिद्धार्थ गिगू प्रदीपिका की कविताएँ किसी एक सांचे-ढांचे में नहीं बंधती. दूसरे शब्दों में कहें तो यहां उनकी भावनाओं में पर्याप्त विविधता और उतना ही...
कविता रोज़ी कामेई की कविताएँ सभ्यता को स्त्री की नज़र से देखने का प्रस्ताव हैंसमकालीन जनमतJanuary 3, 2021January 5, 2021 by समकालीन जनमतJanuary 3, 2021January 5, 202102362 बसंत त्रिपाठी रोज़ी की कविताओं का संसार एक स्त्री की असंख्य उलझनों, सपनों और उम्मीदों में डूबते-उतराते निर्मित हुआ है. प्रेम इन कविताओं के केन्द्र...
ज़ेर-ए-बहस फ़िरक़ा और जातिप्रथा आधुनिक मुस्लिम समाज के निर्माण में एक बड़ी अड़चन हैंसमकालीन जनमतJanuary 1, 2021January 1, 2021 by समकालीन जनमतJanuary 1, 2021January 1, 202101481 मुहम्मद उमर ( इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र मुहम्मद उमर का कालम ‘ मियों का मोहल्ला’ ‘ की दूसरी किस्त ) कमरुद्दीन भाई और जमाल भाई...
स्मृति शम्सुरर्हमान फ़ारूक़ी की याद मेंसमकालीन जनमतDecember 28, 2020December 28, 2020 by समकालीन जनमतDecember 28, 2020December 28, 202001368 सिराज अजमली शम्सुरर्हमान फ़ारूक़ी का जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ (अब मऊ) के कोईरिया पार गाँव में हुआ ।उनके पिता मौलवी ख़लीलुर्रहमान फ़ारूक़ी शिक्षा विभाग...
कविता उज्ज्वल भट्टाचार्य की कविताएँ जनविरोधी व्यवस्था में ख़ुद के होने की शिनाख़्त हैंसमकालीन जनमतDecember 27, 2020October 27, 2024 by समकालीन जनमतDecember 27, 2020October 27, 202402634 संजय कुंदन हिंदी कविता की सुपरिचित मुख्यधारा के भीतर कई नियमित-अनियमित अंतर्धाराएं हैं, जो बिना मुखर हुए हिंदी कविता को विस्तृत कर रही हैं। उज्ज्वल...
कविता लाल्टू की दो कवितायेंसमकालीन जनमतDecember 25, 2020December 25, 2020 by समकालीन जनमतDecember 25, 2020December 25, 202001855 (कवि लाल्टू की कविता में समकालीन विषय प्रमुखता से जगह पाते हैं . पिछले एक महीने से दिल्ली के सीमांत पर चल रहे किसान आन्दोलन...
कविता अंचित की कविताएँ मौजूदा दौर के संकटों की शिनाख़्त करती हैंसमकालीन जनमतDecember 20, 2020December 20, 2020 by समकालीन जनमतDecember 20, 2020December 20, 202002000 रमण कुमार सिंह हाल के समय में हिंदी कविता में जिन कुछ नए युवा कवियों ने अपनी कविता से ध्यान आकृष्ट किया है, उनमें अंचित...
पुस्तक जनविरोधी सत्ता के ख़िलाफ़ नाटक का हथियारसमकालीन जनमतDecember 18, 2020December 26, 2020 by समकालीन जनमतDecember 18, 2020December 26, 202002143 सुधाकर रवि बचपन से दो गीत सुनता आ रहा हूँ। दोनों गीत काफी महशूर हैं. पहला है- पढ़ना लिखना सीखो ओ मेहनत करने वालों। दूसरा...
ख़बर “कलाओं के बीच अबोलेपन को दूर करते हैं मंगलेश” – राजेंद्र कुमारसमकालीन जनमतDecember 14, 2020December 14, 2020 by समकालीन जनमतDecember 14, 2020December 14, 202001918 हिंदी के जाने-माने कवि मंगलेश डबराल का 9 दिसंबर 2020 को कोरोना संक्रमित होने के कारण दिल्ली के एम्स में निधन हो गया मंगलेश डबराल...
कविता आलोक की कविताएँ यथार्थ के धरातल पर उम्मीद के फूल हैंसमकालीन जनमतDecember 13, 2020December 14, 2020 by समकालीन जनमतDecember 13, 2020December 14, 202002270 अच्युतानंद मिश्र कविता लिखना, दुनिया को देखने जानने और समझने का एक संजीदा और जरूरी काम है। ऐसे में किसी युवा कवि से यह...
स्मृति ज़िंदा शहीद कॉमरेड दर्शन दुसांझ – किसान आंदोलन के बहाने स्मरणसमकालीन जनमतDecember 11, 2020December 14, 2020 by समकालीन जनमतDecember 11, 2020December 14, 202002147 सतीश छिम्पा शहीदों की चिंताओं पर लगेंगे हर वर्ष मेले…… मुझे खंजर से मारो या सूली पर लटका दो मैं मरकर भी चारों तरफ बिखर...
ख़बर ‘ ये तीन काले कानून किसानों को मार देंगे, हम इस कानून को नहीं मानते ’समकालीन जनमतDecember 8, 2020December 10, 2020 by समकालीन जनमतDecember 8, 2020December 10, 202002244 आकाश पांडेय तारीख 5 दिसम्बर , दिल्ली तीन तरफ से किसानों से घिरी हुई. केंद्र सरकार लगातार मीटिंग पर मीटिंग कर रही है लेकिन...