समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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शख्सियत

शहीद रामप्रसाद बिस्मिल : वो क्रांतिकारी जो शोषण और ग़ैर बराबरी के ख़िलाफ़ अंत तक लड़ता रहा

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(भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी और शहीद रामप्रसाद बिस्मिल(11 जून 1897-19 दिसम्बर 1927) के जन्मदिवस पर  उन्हें याद कर रहे हैं हर्षवर्धन और अंकुर...
स्मृति

अज़ीम कवि एवं फ़िल्मकार बुद्धदेव दासगुप्ता

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प्रशांत विप्लवी जब फ़िल्मों का बहुत ज्यादा इल्म नहीं था तब भी बहुत सारी महत्त्वपूर्ण फिल्में देखने की क्षीण स्मृति है। विकल्पहीनता कई बार वरदान...
स्मृति

शुक्ला चौधुरी : प्रकृति से प्रेम करने वाली रचनाकार का जाना

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मीता दास कवि व कथाकार शुक्ला चौधुरी नहीं रहीं। उनका जाना एक ऊर्जावान रचनाकार का जाना है। कोरोना से जंग थी। उनका इसे न जीत...
कविता

रामेश्वर प्रशान्त की कविताएँ जनता के रिसते ज़ख्मों का दस्तावेज़ हैं

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राणा प्रताप ________________________________________ ‘भविष्य उन लोगों का होगा जिन्हें आधुनिक समाज की आत्मा की पकड़ होगी और अत्यंत परिशुद्ध सिद्धांतों को छोड़कर जीवन की अपेक्षाकृत...
कविता

तनुज की कविताएँ

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प्रशांत विप्लवी “कविता की नब्ज़ को छूकर हम महसूस कर सकते हैं कि उसमें हमारा कितना रक्त, कितने ताप और दबाव का प्रवाह दौड़ रहा...
कविता

फ़िरोज़ की कविताएँ इस राजनीतिक सन्निपात में एक सचेत बड़बड़ाहट हैं

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प्रभात मिलिंद फ़िरोज़ खान की ये कविताएँ फ़ासीवाद के ख़िलाफ़ आक्रोश की कविताएँ है। काव्य-वक्रोक्ति की अनुपस्थिति में ये अपने लहज़े में थोड़ी खुली हुई...
स्मृति

मेरी मातृभूमि का कोई मुआवज़ा नहीं हो सकता: सुंदरलाल बहुगुणा

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मई 1995 में वर्तमान में उत्तराखण्ड में शिक्षक नवेंदु मठपाल टिहरी बांध आंदोलन और वहाँ के डूब क्षेत्र के गाँवों की स्थितियों को नज़दीक से...
स्मृति

प्रो. लाल बहादुर वर्मा: वे एक साथ अध्यापक और दोस्त दोनों थे

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धर्मेंद्र सुशांत लाल बहादुर वर्मा नहीं रहे.. करीब 20–21 साल पहले पटना में उनसे पहली बार मुलाकात हुई थी गोकि जान उन्हें पहले चुका था....
स्मृति

प्रो. लाल बहादुर वर्मा: एक प्रोफ़ेसर जिसने विविधता का मतलब बताया

समकालीन जनमत
सविता पाठक ये माना जिन्दगी है चार दिन की बहुत होते हैं यारों ये चार दिन भी -फ़िराक़  प्रो लालबहादुर वर्मा नहीं रहे। ये ख़बर...
स्मृति

मेरी नींद मत लो मेरे सपने लो: मंगलेश स्मृति

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मिथिलेश श्रीवास्तव दिल्ली शहर मंगलेश डबराल की कविता ‘मत्र्योश्का’ की तरह है ( मत्र्योश्का रूस की एक लोकप्रिय गुड़िया है जिसमें लकड़ी की बनी क्रमशः...
कविता

रवि निर्मला सिंह की कविताएँ जातिवाद की जड़ों और उसकी चोट की तल्ख़ पहचान हैं

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हीरालाल राजस्थानी आज के युवा रचनाकार मार्क्स के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को भी भली भांति समझते हैं और जाति के सवालों तथा समतामूलक समाज के निर्माण...
ज़ेर-ए-बहस

भाजपा सदस्यों के नाम संगीतकार टी. एम. कृष्णा का ख़त

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प्रसिद्ध संगीतकार टी एम कृष्णा ने आज ‘इंडियन एक्स्प्रेस’ में Dear Members of BJP शीर्षक से यह लेख/ख़त लिखा है। यहाँ उस ख़त का डॉ....
कविता

दिलीप दर्श की कविताएँ सामाजिक द्वन्द्व को उकेरती हैं

कौशल किशोर दिलीप दर्श की रचनात्मक स्थितियां वर्तमान के द्वन्द्व से तैयार होती हैं। इनमें सामाजिक संघर्ष, अतीत की सीखें, शोषक-शासक शक्तियों की पहचान, वर्ग...
स्मृति

प्यारे भाई अरुण पाण्डेय को सादर श्रद्धांजलि!

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उर्मिलेश   दिल्ली से बंगाल-चुनाव कवर करने गये कई पत्रकार मित्रों से वहां की राजनीतिक स्थिति को लेकर मेरी फोन पर बातचीत होती रहती थी....
स्मृति

अलविदा अरुण भाई! आपके अरमान, हमारे अरमानों में ज़िंदा रहेंगे, हमेशा !

समकालीन जनमत
पंकज श्रीवास्तव इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 1980-90 के बीच सक्रिय रहे तमाम लोगों के लिए 5 मई बुधवार की सुबह बेतरह उदासी में डूबी हुई थी।...
स्मृति

अरुण पाण्डेय को इस तरह नहीं जाना था

प्रियदर्शन अरुण पाण्डेय के कोविडग्रस्त होने और ठीक हो जाने की सूचना मुझे थी। मंगलवार सुबह उनकी पत्नी पुतुल से बात भी हुई- उन्होंने बताया...
स्मृति

मानस बिहारी वर्मा : समाज-चेतस विज्ञान की खोज

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कमलानंद झा लंबे समय तक पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के साथ काम करने करने वाले वैज्ञानिक डॉ मानस बिहारी वर्मा वैज्ञानिक-दृष्टि सम्पन्न  समाज की...
स्मृति

कॉमरेड रमेश सरीन को ख़िराज़-ए-अक़ीदत

अर्जुमंद आरा कॉमरेड रमेश सरीन का जीवन एक लंबा संघर्ष था। दो-तीन साल के थे जब किसी बीमारी में उनकी आँखें चली गईं। लेकिन बड़े...
स्मृति

स्मृति शेष कांतिकुमार जैन: अपने लेखन में एक पूरे क़द का आदमी!

प्रकाश कान्त उनसे पहली बार मिलना क़रीब पेैंतालीस साल पहले हुआ था। वे उन दिनों शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गुना में थे। मैं अपनी एक नौकरी...
सिने दुनिया

सिने दुनिया: सिंडलर्स लिस्ट (अमेरिकन): उसकी क़ब्र पर मुहब्बत के गुल दहकते हैं

  सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद हिंदुस्तान ही नहीं, दुनिया के तमाम देश आजाद हुए। हिटलर की सनक के चलते फ्रांस और ब्रिटेन ने जर्मनी...
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