समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

1173 Posts - 0 Comments
ज़ेर-ए-बहस

किसान आन्दोलनः आठ महीने का गतिपथ और उसका भविष्य-आठ

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण  अखिल भारतीय स्वरूप लेता किसान आंदोलन दिल्ली को घेरे हुए किसानों के पड़ाव के मजबूत होते ही  देश के अन्य भागों में किसान...
कविता

सुशील कुमार की कविताएँ मौजूदा सत्ता संरचना और व्यवस्था का प्रतिपक्ष रचती हैं

समकालीन जनमत
कौशल किशोर   मुक्तिबोध कालयात्री की बात करते हैं। मतलब कविता अपने काल के साथ सफर करती है । उसका अटूट रिश्ता काल से है...
ज़ेर-ए-बहस

किसान आन्दोलनः आठ महीने का गतिपथ और उसका भविष्य-सात

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण  किसान आन्दोलन का नया मोर्चा- गाजीपुर बार्डर  किसान धीरे-धीरे दिल्ली की सीमा पर जम रहे थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में  मजबूत जनाधार वाली...
ज़ेर-ए-बहस

किसान आन्दोलनः आठ महीने का गतिपथ और उसका भविष्य-छह

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण  पंजाब और हरियाणा की किसान एकता 26 और 27 नवम्बर  की  रात को किसान सिंघु, टीकरी  बॉर्डर की सड़कों पर बैठकर व्यतीत किये।...
ज़ेर-ए-बहस

किसान आन्दोलनः आठ महीने का गतिपथ और उसका भविष्य-पाँच

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण  दिल्ली की सीमा पर किसान  26‌-27 नवंबर, 2020 इस दिन दिल्ली को कुछ और ही देखना था। 26-27 नवंबर को रामलीला मैदान में...
ज़ेर-ए-बहस

किसान आन्दोलनः आठ महीने का गतिपथ और उसका भविष्य-चार

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण  दिल्ली किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि किसान आंदोलन के प्रति केन्द्र की सरकार हो या राज्यों की सरकारें, किसानों के सवाल पर उनका रुख...
ज़ेर-ए-बहस

किसान आन्दोलनः आठ महीने का गतिपथ और उसका भविष्य-तीन

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण  मोदी सरकार जब 2014 के मई में भारत के सत्ता पर काबिज होने के लिए कारपोरेट समर्थन के अदृश्य सहयोग और हिंदुत्व  राष्ट्रवादी...
जनमतज़ेर-ए-बहस

किसान आन्दोलनः आठ महीने का गतिपथ और उसका भविष्य-दो

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण  कृषि संकट का चक्रीय स्वरूप और सत्ता की  प्रतिक्रिया ‌ साठ के दशक के मध्य में कृषि  में संकट के संकेत आने लगे...
ज़ेर-ए-बहस

किसान आंदोलनः आठ महीने का गति पथ और उसका भविष्य-एक

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण  आठ महीने से किसान दिल्ली की तीन सीमाओं पर और हरियाणा-राजस्थान की सीमा शाहजहांपुर पर डेरा डाल कर बैठे हैं। किसानों ने इस...
कविता

शुभम श्री की कविताएँ: मामूली से दिखने वाले बेहद ज़रूरी सवाल

समकालीन जनमत
दीपशिखा शुभम की कविताएँ हमारे समय और समाज में मौजूद रोज़मर्रा के उन तमाम दृश्यों और ज़रूरतों की भावनात्मक अभिव्यक्ति हैं, जिन्हें आमतौर पर देखते...
कहानी

वास्को डी गामा की साइकिलः लोकतंत्र में उम्मीद और छल की कहानी

समकालीन जनमत
कुँवर प्रांजल सिंह सामान्यतः “आम और ख़ास” बनने की बीमारी और खूबी प्रत्येक भारतीय में लगभग- लगभग पायी जाती है l इस पूरी अवधारणा का...
कविता

राहुल द्विवेदी की कविताएँ: एक पुरुष का आत्मसंघर्ष

समकालीन जनमत
सोनी पाण्डेय कविता मनुष्य की संवेदनात्मक अभिव्यक्ति है।  वह संसार के दुःख को महसूस करता है और कभी गीत, कभी ग़ज़ल तो कभी किस्से, कहानी...
कविता

सपना भट्ट की कविताएँ: निर्मम हक़ीक़त के मध्य जीवन की आर्द्रता बचाने की जद्दोजहद

समकालीन जनमत
मंजुला बिष्ट हमारा मौजूदा समय मानवीय संघर्ष के साथ अदृश्य स्वास्थ्य शत्रु की गिरगिटिया गिरफ्त में है। हमारे समक्ष सपनों व निर्मम हकीकत के मध्य...
कविता

संजय शेफर्ड की कविताएँ: आजकल मैं तुम्हारी हँसी ओढ़ता हूँ..

समकालीन जनमत
गणेश गनी तो वह टीले दर टीले चढ़ते हुए चैहणी दर्रे के ठीक ऊपर पहुँच ही गया। बादल ठीक उसके समानांतर तैर रहे हैं। जो...
कविता

गोलेन्द्र की कविताएँ: अपनी बोली में जनता के दुखों और आक्रोश को ज़ाहिर करती नयी कलम

समकालीन जनमत
अनुपम त्रिपाठी समकालीन जनमत के लिए ‘नई कलम’ में आज बात करते हैं गोलेन्द्र पटेल की कविताओं पर। कई बार कच्चेपने की अपनी एक अलग...
कविता

शिरीष कुमार मौर्य की कविता में पहाड़ अपनी समस्त शक्ति एवं सीमाओं के साथ उपस्थित होता है

समकालीन जनमत
‘मनुष्यता के ग्रीष्म में रहता कवि- शिरीष कुमार मौर्य’ वसंत आते-आते मैं शिवालिक के ढलानों पर खिला फूल हूँ जंगली घासों का थोड़ी ही है...
शख्सियत

सूरजपाल चौहान: कच्चे अनुभव नहीं पकी हुई समझ के रचनाकार

समकालीन जनमत
दुखद खबरों का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा. इसी बीच खबर आ रही है कि हिंदी के वरिष्ठ दलित साहित्यकार सूरजपाल चौहान...
शख्सियत

कन्नड़ साहित्यकार सिद्धलिंगय्या: क्रांतिकारिता से सांस्कृतिक इयत्ता तक

समकालीन जनमत
  सर्वेश कुमार मौर्य कोरोना महामारी से लगातार जूझ रहे देश में कर्नाटक से भी एक बुरी खबर आ रही है; कन्नड़ साहित्य के प्रमुख...
कविता

स्त्री जीवन के यथार्थ को दर्शाती मंजुला बिष्ट की कविताएँ

समकालीन जनमत
सोनी पाण्डेय   मैं अक्सर सोचती हूँ कि पुरुषवादी समाज में हमेशा से औरतों का आंकलन ऐसा क्यों रहा कि वह कहने को विद्या की...
स्मृति

वरिष्ठ कन्नड़ दलित साहित्यकार सिद्धलिंगय्या को विदाई सलाम

समकालीन जनमत
हीरालाल राजस्थानी वरिष्ठ कन्नड़ दलित साहित्यकार माननीय सिद्धलिंगय्या (1954 से 11 जून 2021) का जाना एक युग का बीत जाना है. कन्नड़ के जाने माने...
Fearlessly expressing peoples opinion