समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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कविता

प्रिया वर्मा की कविताएँ शुचितावादी धारणाओं को धता बताती हैं

समकालीन जनमत
जोशना बैनर्जी आडवानी “आम्रपाली की कथा बांचो परिव्राजक! और अब कहो कि तुम्हारे डर को मिट जाना चाहिए। उस गलफंद को कहूँ मैं धन्यवाद? मुझे...
ख़बर

रामजी राय की किताब ‘मुक्तिबोध: स्वदेश की खोज’ का रायपुर में हुआ विमोचन

समकालीन जनमत
रायपुर. ऐसा बहुत कम होता है जब साहित्य के किसी आयोजन में लोगों की अच्छी-खासी मौजूदगी देखने को मिलती है. सामान्य तौर पर साहित्यिक आयोजन...
कविता

प्रेम नन्दन की कविताएँ लोकजीवन और उसके संघर्ष की कविताएँ हैं

समकालीन जनमत
कौशल किशोर   प्रेम नन्दन की कविताओं से गुजरते हुए लगता है कि लोकजीवन और उसका संघर्ष अपनी गरिमा के साथ उपस्थित है। यहां ‘पथराई...
कविता

पंखुरी सिन्हा की कविताएँ: तबाही के बरख़िलाफ़ स्मृतियों की पुकार

समकालीन जनमत
विपिन चौधरी जब कोई कविता, संसार के किसी भी शहर के भीतर बसी सामूहिक स्मृतियों के साथ उस शहर के इतिहास और वहाँ के सामाजिक...
कविता

शुक्ला चौधुरी : मैं लिखूँ कविता पेड़ों की/चिड़ियों की/ ख़ौफ़ नहीं/प्रेम की…..

समकालीन जनमत
कौशल किशोर शुक्ला चौधुरी ऐसी कवयित्री हैं जिन्हें आकाश की ऊँचाई का पता है। वे जानती हैं कि हाथ से आकाश को नहीं छू सकती...
कविता

हम सभी के घर में गणित के जादूगर हैं: ऊषा दशोरा की कविताएँ

समकालीन जनमत
अरुण शीतांश स्त्री जीवन की विडंबनाओं पर बहुत सारी कविताएँ हमने पढ़ी हैं और उनके माध्यम से उस जीवन की तमाम कही अनकही जटिलताओं से...
इतिहास

1857 की जंग-ए-आज़ादी में हिन्दू-मुस्लमान-सिख साझी क़ुर्बानियों की हैरत-अंगेज़ अनकही दास्तानें

समकालीन जनमत
शम्सुल इस्लाम साझी विरासत जिसका हिन्दुत्वादी टोली मटियामेट करने में लगी है 10 मई 1857, दिन रविवार को छिड़े भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में...
इतिहास

1857 फ़ौजी बग़ावत या मुक्ति संग्राम

समकालीन जनमत
शम्सुल इस्लाम भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शुरूआत 25 फरवरी 1857 को उस समय हुई थी, जब बंगाल के बरहमपुर में ईस्ट इण्डिया कम्पनी...
कविता

सुजाता गुप्ता की कविताएँ समाज की कुरूप सच्चाइयों से उपजी अकुलाहट हैं।

सौम्या सुमन कवि केदारनाथ सिंह ने कहा है कि कविता के पास अपना विचार होना चाहिए और जीवन जगत के बारे में उसका विचार जितना...
ज़ेर-ए-बहस

भारत जो एक जीवन-वृक्ष था उसे बड़ी बेरहमी से धराशायी किया जा रहा है

सबा नक़वी आज की तारीख में पूरे भारत में विभिन्न स्थानों पर सघन हिन्दुत्व की लामबंदी क्यों की जा रही है? क्या हमने अचानक अपने...
कविता

संध्या नवोदिता की कविताओं में जिजीविषा और यथार्थ की कड़वाहट के स्वर प्रमुख हैं

निरंजन श्रोत्रिय युवा कवयित्री संध्या नवोदिता की ये कविताएँ थिर तापमान की हैं। उनकी कविताओं में अमूर्तता, रागात्मकता, राजनीतिक चेतना और जनसंघर्ष के स्वर स्पष्ट...
कविता

भास्कर चौधुरी की कविताएँ: यहाँ कोई सरहद नहीं है

समकालीन जनमत
कौशल किशोर समकालीन रचनाशीलता दबाव में है। रचनाकार के निजी जीवन, अनुभव संसार, भाव-संवेदना,  लय-ध्वनि सभी अतिरिक्त दबाव में हैं। यह उसके अन्तर्य पर बाह्य...
ख़बर

साम्प्रदायिक ताकतों के खिलाफ दिल्ली के नागरिक समाज ने जंतर मंतर पर किया विरोध प्रदर्शन

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संघ-गिरोह अपने स्थापना-काल से ही मुसलमानों के खिलाफ अनर्गल दुष्प्रचार करने और नफरत फैलाने के गर्हित-घृणित कार्य में लगा हुआ है। सन् 2014 में सत्ता...
ख़बर

संविधान पर बुलडोजर नहीं सहेंगे

समकालीन जनमत
बुलडोजर को रोकेंगे, संघर्ष करेंगे जीतेंगे बलिया के निर्दोष पत्रकारों को रिहा करो, सांप्रदायिक हिंसा पर रोक लगाओ जैसे नारों के साथ आज इलाहाबाद के नागरिक...
जनमत

शिवम तोमर की कविताएँ समय की निर्मम रेखाओं को उनकी गतिशीलता के साथ दर्ज करती हैं

समकालीन जनमत
नितिन यादव शिवम तोमर की ये कविताएँ अनुपस्थिति में उपस्थिति की अनुगूंज की कविताएँ हैं; गहरे अकेलेपन और यंत्रणा की अभिव्यक्ति हैं। पिता पर शिवम...
कविता

प्रियंवदा की कविताएँ हिंदी कविता के आँचल में ग़ज़ल के फूल टाँकने का फ़न हैं

समकालीन जनमत
अजमल सिद्दीक़ी  प्रियंवदा के अब तक के साहित्यिक सफ़र को मैं ने बहुत क़रीब से देखा है , मैं इस सफ़र के हर उतार चढ़ाव...
कविता

महेश पुनेठा की कविताएँ जीवन, प्रकृति और परिवेशगत विडंबनाओं को धारदार रूप में अभिव्यक्त करती हैं

समकालीन जनमत
कल्पना पंत   ’भवानी प्रसाद मिश्र” की ’कवि’ शीर्षक कविता की आरंभिक पंक्तियाँ हैं  “जिस तरह हम बोलते हैं   उस तरह तू लिख  और इसके बाद...
जनमत

‘जल जंगल ज़मीन’ के आदिवासी संघर्ष और इतिहास को धूमिल करने का आपराधिक प्रयास है ‘आरआरआर'(RRR)

समकालीन जनमत
महेश कुमार साहू और अल्लाम राजैया (saahu and allam rajaiah) ने 1982 तेलगु भाषा में कोमराम भीम पर एक ऐतिहासिक उपन्यास लिखा था। इसका अँग्रेजी...
ज़ेर-ए-बहस

पांच राज्यों के चुनाव: लोकतंत्र और गणतंत्रात्मक भारत के समक्ष खड़े यक्ष प्रश्न

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण  2022 में हुए 5 राज्यों के चुनाव के परिणाम आ गये हैं। पंजाब में आप, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में भारतीय जनता पार्टी...
कविता

प्रदीप सैनी की कविताएँ अपने समय में फैलाई जा रही अविश्वसनीयता के ख़िलाफ़ प्रतिरोध दर्ज करती हैं

समकालीन जनमत
अनुपम त्रिपाठी एक छोटी सी कहानी से बात शुरू करूँ। एकबार जंगल के सभी जानवर पुराने राजा यानी शेर से बहुत तंग आ गए। तो...
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