Author : समकालीन जनमत

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विज्ञान

मानविकी बनाम प्रकृति-विज्ञान

समकालीन जनमत
(10 दिसंबर 1957 को कोलकाता में जन्मे लाल्टू विज्ञान, कविता, कहानी, पत्रकारिता, अनुवाद, नाटक, बाल साहित्य, नवसाक्षर साहित्य आदि विधाओं में समान गति से सक्रिय...
शख्सियत

1936 में ‘साहित्य का उद्देश्य’ शीर्षक से प्रेमचंद द्वारा दिए गए ऐतिहासिक भाषण की ऑडियो वीडियो प्रस्तुति

समकालीन जनमत
31 जुलाई 2020 प्रेमचंद की 140 वीं जयंती के अवसर पर समकालीन जनमत ने दो दिवसीय ‘जश्न-ए-प्रेमचंद’ का आयोजन किया। इस अवसर पर  समकालीन जनमत...
शख्सियत

प्रेमचंद और किसान संकट : गोपाल प्रधान

समकालीन जनमत
(31 जुलाई को प्रेमचंद की 140वीं जयंती के अवसर पर समकालीन जनमत जश्न-ए-प्रेमचंद का आयोजन कर रहा है। इस अवसर पर 30-31 जुलाई को समकालीन...
सिनेमा

“सरकार कितना ही दमन करे लेकिन हमें लड़ने की जरूरत है”

(पिछले पंद्रह वर्षों से प्रतिरोध का  सिनेमा अभियान सार्थक सिनेमा को छोटी -बड़ी सभी जगहों पर ले जाने की कोशिश में लगा हुआ है ....
शख्सियत

प्रेमचंद ! अब सब कहते हैं ईमान के डर से जान थोड़ी गवायेंगे!

समकालीन जनमत
(31 जुलाई को प्रेमचंद की 140वीं जयंती के अवसर पर समकालीन जनमत 30-31 जुलाई ‘जश्न-ए-प्रेमचंद’ का आयोजन कर रहा है। इस अवसर पर समकालीन जनमत...
खबर

अस्पताल के ठेका कर्मचारियों की छंटनी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

समकालीन जनमत
सूर्यप्रकाश राजधानी दिल्ली स्थित ‘लेडी हार्डिंग अस्पताल व मेडिकल कॉलेज’ में कोरोना संकट के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर काम करनेवाले स्वास्थ्य कर्मचारियों को...
शख्सियत

हिन्दी साहित्य का जातिवाद और प्रेमचंद: रामायन राम

समकालीन जनमत
(31 जुलाई को प्रेमचंद की 140वीं जयंती के अवसर पर समकालीन जनमत 30-31 जुलाई ‘जश्न-ए-प्रेमचंद’ का आयोजन कर रहा है। इस अवसर पर समकालीन जनमत...
कहानी

प्रेमचंद की कहानी ‘बूढ़ी काकी’ का पाठ : जश्न-ए-प्रेमचंद में बच्चों की भागीदारी

समकालीन जनमत
31 जुलाई को प्रेमचंद की 140वीं जयंती के अवसर पर समकालीन जनमत 30-31 जुलाई ‘जश्न-ए-प्रेमचंद’ का आयोजन कर रहा है। इस अवसर पर समकालीन जनमत...
स्मृति

महाश्वेता देवी की स्मृति में उनकी कहानी ‘प्याऊ’ का हिंदी अनुवाद

समकालीन जनमत
(समकालीन जनमत प्रस्तुत करता है महाश्वेता देवी के स्मृति दिवस 28 जुलाई पर कवयित्री मीता दास द्वारा अनुदित महाश्वेता देवी की कहानी ‘प्याऊ’ (रचना काल,...
कविता

अर्चना लार्क की कविताओं में समकाल की बारीक़ परख है

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय युवा कवयित्री अर्चना लार्क की काव्य संवेदना का पाट व्यापक है। वे अपनी संवेदना के विस्तृत परिसर में हर जीवंत घटना को समेट...

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