कविता अपने ढंग से जीने के हौसले का कवि राजेश कमलसमकालीन जनमतMarch 29, 2020April 2, 2020 by समकालीन जनमतMarch 29, 2020April 2, 202004044 सुधीर सुमन राजेश कमल लगभग ढाई दशक से अधिक समय से कविताएं लिख रहे हैं, लेकिन कविता पाठ और प्रकाशन से आम तौर पर बचते...
कवितासाहित्य-संस्कृति स्त्री की व्यथा और सामर्थ्य के कवि विवेक चतुर्वेदीसमकालीन जनमतMarch 22, 2020March 27, 2020 by समकालीन जनमतMarch 22, 2020March 27, 202003907 जसवीर त्यागी विवेक चतुर्वेदी समकालीन हिन्दी कविता के एक बेहतरीन कवि हैं। उनकी बड़ी खूबी यह है कि उनके स्वभाव और उनकी कविता में उतावलापन...
कविताजनमत विनय कुमार की कविताएँ ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से संवलित हैंसमकालीन जनमतMarch 1, 2020March 1, 2020 by समकालीन जनमतMarch 1, 2020March 1, 20204 2247 कुमार मुकुल यक्षिणी की भूमिका में विनय लिखते हैं – ‘…अतीत का बोध मुझे न तो गौरवान्वित करता है, न दुखी और न ही असहाय;...
कविताजनमत मौन में जीवन की साधना करता कवि जगतारजीत सिंहसमकालीन जनमतFebruary 9, 2020February 9, 2020 by समकालीन जनमतFebruary 9, 2020February 9, 202002797 संजीव कौशल जिस तरह पेड़ साल भर सारे मौसम सोखकर अगले साल फूल और फल देता है, कविता भी उसी तरह न जाने कितना जीवन...
कविताजनमत आरती की कविताएँ सवालों को बुनती हुई स्त्री का चित्र हैंसमकालीन जनमतJanuary 19, 2020January 19, 2020 by समकालीन जनमतJanuary 19, 2020January 19, 202003915 संजीव कौशल समाज तमाम तरह की राजनीतिक गतिविधियों का रणक्षेत्र है। यहां कोई न कोई अपनी राजनीतिक चाल चलता रहता है। ऐसे में कवि की...
कविताजनमत भगवान स्वरूप कटियार की कविताएँ : जीवन को बचाने के लिए ज़रूरी है प्रेमसमकालीन जनमतDecember 15, 2019December 15, 2019 by समकालीन जनमतDecember 15, 2019December 15, 201902261 कौशल किशोर ‘आज हम सब/हो गए हैं/अपनी-अपनी सरहदों में जी रहे हैं छोटे-छोटे उपनिवेश और एक-दूसरे के लिए/पैदा कर रहे हैं भय, आतंक, दहशत/और गुलामी...
कविताजनमत सुघोष मिश्र की कविता वर्तमान की जटिलताओं से उपजे द्वंद्व की अभिव्यक्ति हैसमकालीन जनमतDecember 8, 2019December 8, 2019 by समकालीन जनमतDecember 8, 2019December 8, 20192 3286 आलोक रंजन सुघोष मिश्र की कविताओं को पढ़कर लगा कि उनकी कविताओं से परिचय कराना सरल कार्य नहीं है । इसके पीछे का एक सीधा...
कविताजनमत भाषा के अनोखे बर्ताव के साथ कविता के मोर्चे पर चाक चौबंद कवि कुमार विजय गुप्तसमकालीन जनमतDecember 1, 2019December 1, 2019 by समकालीन जनमतDecember 1, 2019December 1, 201913318 नवनीत शर्मा इस कवि के यहां अनाज की बोरियों का दर्द के मारे फटा करेजा नुमायां होता है…। यह उन शब्दों की तलाश में है...
कविता विनय सौरभ लोक की धड़कती हुई ज़मीन के कवि हैंसमकालीन जनमतNovember 3, 2019November 4, 2019 by समकालीन जनमतNovember 3, 2019November 4, 20194 4455 प्रभात मिलिंद कवि अपनी कविता की यात्रा पर अकेला ही निकलता है. जब इस यात्रा के क्रम में पाठक उसके सहयात्री हो जाएँ तो समझिए...
कविता रंजना मिश्र की कविताओं में जीवन उदासी के साये में खड़ा हुआ भी जिजीविषा से भरा रहता है।समकालीन जनमतOctober 27, 2019October 31, 2019 by समकालीन जनमतOctober 27, 2019October 31, 201914305 प्रतिमा त्रिपाठी भाषाई उठापटक, शब्दों के खेल और अर्थों के रचे हुये मायावी संसार से बोझिल होती हुई कविताओं के इस समय में रंजना मिश्रा...
कविताजनमत श्रम के सौंदर्य के कवि हैं अनवर सुहैलसमकालीन जनमतOctober 20, 2019October 20, 2019 by समकालीन जनमतOctober 20, 2019October 20, 201903511 ज़ीनित सबा अनवर सुहैल समकालीन हिंदी साहित्य के प्रमुख कथाकार होने के साथ साथ महत्वपूर्ण कवि भी हैं. उन्हें लोग विशेष रूप से ‘गहरी जड़ें’ कहानी संग्रह और ‘पहचान’ उपन्यास...
कविताजनमत स्त्री जीवन की पीड़ाओं के नॉर्मलाइज़ होते जाने का विरोध हैं अपर्णा की कविताएँसमकालीन जनमतOctober 13, 2019October 13, 2019 by समकालीन जनमतOctober 13, 2019October 13, 20193 3746 संजीव कौशल अपर्णा अनेकवर्णा से मेरा परिचय उनकी कविताओं के रास्ते ही है और यह रास्ता इतना अलग और आकर्षक है कि यहां से गुज़रते...
कविताजनमत अंधेरे के ख़िलाफ़ ज़माने को आगाह करती हैं मुकुल सरल की कविताएँसमकालीन जनमतOctober 6, 2019October 6, 2019 by समकालीन जनमतOctober 6, 2019October 6, 20197 3499 गीतेश सिंह अभी कुछ सप्ताह पहले जब हम त्रिलोचन को याद कर रहे थे, तो उनकी एक कविता लगातार ज़ेहन में चलती रही -कविताएँ रहेंगी तो/ सपने...
कविताजनमत प्रज्ञा की कविता व्यक्ति पर समाज और सत्ता के प्रभाव से उठने वाली बेचैनी हैसमकालीन जनमतSeptember 29, 2019September 29, 2019 by समकालीन जनमतSeptember 29, 2019September 29, 201903442 निकिता नैथानी ‘कविताएँ आती हैं आने दो थोड़ी बुरी निष्क्रिय और निरीह हो तो भी..’ इस समय जब लोग आवाज़ उठाने और स्पष्ट रूप से...
कविता एकांत और संवेदना की नमी में आकंठ डूबा कवि प्रभात मिलिंदसमकालीन जनमतSeptember 22, 2019September 24, 2019 by समकालीन जनमतSeptember 22, 2019September 24, 201904096 रंजना मिश्र प्रभात मिलिंद की कविताओं से गुज़रना संवेदनशील आधुनिक मानव मन की निरी एकांत यात्रा तो है ही साथ ही परिवार समाज और देश...
कविताजनमत आत्मीयता का रंग और लोक का जीवट : इरेन्द्र की कविताएँसमकालीन जनमतSeptember 15, 2019September 15, 2019 by समकालीन जनमतSeptember 15, 2019September 15, 20193 4019 कुमार मुकुल आत्मीयता इरेन्द्र बबुअवा की कविताओं का मुख्य रंग है। इस रंग में पगे होने पर दुनियावी राग-द्वेष जल्दी छू नहीं पाता। भीतर बहती...
कविताजनमत ईमानदार जवाबों की तलाश में : ऐश्वर्या की कवितासमकालीन जनमतSeptember 8, 2019September 8, 2019 by समकालीन जनमतSeptember 8, 2019September 8, 201914727 अपराजिता शर्मा ‘जानने की क्रिया प्रत्यक्ष और एकतरफ़ा नहीं हो सकती!’ पहचान और परिचय से आगे बढ़ने के लिए जानने की इस क्रिया से गुज़रना...
कविताजनमत ‘सफ़र है कि ख़त्म नहीं होता’ : सोनी पाण्डेय की कविताएँसमकालीन जनमतAugust 18, 2019August 18, 2019 by समकालीन जनमतAugust 18, 2019August 18, 20194 3397 मदन कश्यप हिन्दी में स्त्री कवयित्रियों की सांकेतिक उपस्थिति तो आदिकाल से रही है। लेकिन 1990 की दशक में जो बदलाव आया उसका एक सकारात्माक...
कविता विजय राही की कविताएँ वर्तमान के साथ अंतःक्रिया करती हैंसमकालीन जनमतAugust 11, 2019August 17, 2019 by समकालीन जनमतAugust 11, 2019August 17, 201903809 अलोक रंजन एक कवि का विस्तार असीमित होता है और यदि कवि अपने उस विस्तार का सक्षम उपयोग करते हुए अपनी आंतरिक व्याकुलता को समय...
जनमतशख्सियतस्मृति उजले दिनों की उम्मीद का कवि वीरेन डंगवालसमकालीन जनमतAugust 5, 2019August 5, 2019 by समकालीन जनमतAugust 5, 2019August 5, 201913635 मंगलेश डबराल ‘इन्हीं सड़कों से चल कर आते हैं आततायी/ इन्हीं सड़कों से चल कर आयेंगे अपने भी जन.’ वीरेन डंगवाल ‘अपने जन’ के, इस...