समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

कविता

मामूली दृश्यों से जीवन का विचलित करने वाला वृत्तान्त तैयार करतीं शुभा की कविताएँ

उमा राग
मंगलेश डबराल   शुभा शायद हिंदी की पहली कवि हैं, जो अभी तक कोई भी संग्रह न छपवाने के बावजूद काफ़ी पहले विलक्षण  कवि के...
स्मृति

कामरेड शाह चाँद की याद

रामजी राय
जाने कितनी यादे हैं कामरेड शाह चाँद की। आईपीएफ और फिर इंकलाबी मुस्लिम कान्फ्रेंस में साथ काम करने की। कामरेड तकी रहीम से नोक-झोंक फिर...
साहित्य-संस्कृति

समानता का नया यूटोपिया रचती है ‘ देह ही देश ‘ – अनामिका

समकालीन जनमत
हिन्दू कालेज में प्रोफ़ेसर गरिमा श्रीवास्तव की किताब ‘ देह ही देश ‘ पर परिसंवाद  डॉ रचना सिंह   दिल्ली। ”देह ही देश” केवल यूरोप की...
स्मृति

रमाकांत द्विवेदी ‘रमता’ : क्रांति की रागिनी का गायक

सुधीर सुमन
101 वीं जयंती 30 अक्टूबर 2018 एक आलेख   ‘क्रांति के रागिनी हम त गइबे करब/ केहू का ना सोहाला त हम का करीं’, ‘हमनी...
ख़बरनाटकसाहित्य-संस्कृति

कोरस के सालाना कार्यक्रम ‘अजदिया भावेले’ में रजिया सज्जाद ज़हीर की कहानियों का पाठ एवं मंचन

समकालीन जनमत
28 अक्टूबर, पटना आज कोरस के सालाना कार्यक्रम ‘अजदिया भावेले’ की शृंखला में इस बार साहित्यकार, नाट्यकर्मी व एक्टिविस्ट रज़िया सज़्ज़ाद ज़हीर के जन्म-शती वर्ष...
कविताजनमत

प्रेम के बहाने एक अलग तरह का सामाजिक विमर्श रचती पल्लवी त्रिवेदी की कविताएँ

उमा राग
निरंजन श्रोत्रिय युवा कवयित्री पल्लवी त्रिवेदी की कविताओं को महज़ ‘प्रेम कविताएँ’ या रागात्मकता की कविताएँ कहने में मुझे ऐतराज़ है। पल्लवी की विलक्षण काव्य-प्रतिभा...
स्मृति

हृदय में व्यथा का रिसाव करती हैं सुरेश सेन निशांत की कविता

समकालीन जनमत
श्याम अंकुरम सुरेश सेन निशांत नहीं रहे. स्तब्धकारी खबर ! मेरा उनसे परिचय राजवर्धन के संपादन में कविता संकलन ‘स्वर –एकादश ‘ से हुआ था....
स्मृति

पहाड़ और नदियों ने खो दिया अपने कवि को

समकालीन जनमत
आज जब पहाड़, जंगल और जमीन सहित पूरी मानवता खतरे में है और उन्हें बचाने के लिए संघर्ष जारी है, ऐसे में एक कवि का...
कविताजनमत

नित्यानंद गायेन की कविताओं में प्रेम अपनी सच्ची ज़िद के साथ अभिव्यक्त होता है

उमा राग
कुमार मुकुल   नित्यानंद जब मिलते हैं तो लगातार बोलते हैं, तब मुझे अपने पुराने दिन याद आते हैं। कवियों की बातें , ‘कांट का...
साहित्य-संस्कृति

तेलंगाना एक बार फिर से जमींदारों के शिकंजे में कस गया है

समकालीन जनमत
एन. आर.श्याम “भारतवर्ष में समय-समय पर उत्पादन के साधनों पर मालिकाना हक, उत्पादन संबंधों में बदलाव और उत्पादन करने वाली शक्तियों की उन्नति, अभिवृद्धि के...
ग्राउन्ड रिपोर्टजनमतशख्सियतस्मृति

निराला की कविताएँ अपने समय के अंधेरे को पहचानने में हमारी मदद करती हैं: प्रो. विजय बहादुर सिंह

उमा राग
विवेक निराला    निराला की 57 वीं पुण्यतिथि पर आयोजित ‘छायावाद और निराला :कुछ पुनर्विचार’ विषय पर ‘निराला के निमित्त’ की ओर से आयोजित गोष्ठी...
कविता

बादल की कविता जीवन की कविता है : रविभूषण

सुधीर सुमन
बादल की कविताएं वर्गीय दृष्टि की कविताएं हैं : रामजी राय ‘शंभु बादल का कविकर्म’ पर हजारीबाग में आयोजन हजारीबाग के डीवीसी, प्रशिक्षण सभागार में...
कविता

शंभु बादल का कवि कर्म

कौशल किशोर
हरेक कवि की अपनी जमीन होती है जिस पर वह सृजन करता है और उसी से उसकी पहचान बनती है। निराला, पंत, प्रसाद, महादेवी समकालीन...
स्मृति

निराला की कविता मनुष्य की मुक्ति की कविता है

उमा राग
(महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला (21 फ़रवरी-15 अक्टूबर) की पुण्यतिथि पर अपने लेख के माध्यम से उन्हें याद कर रहें हैं विवेक निराला)  निराला को अपने...
कविताजनमत

अपने समय की आहट को कविता में व्यक्त करता कवि विवेक निराला

उमा राग
युवा कवि विवेक निराला की इन कविताओं को पढ़ कर लगता है मानो कविता उनके लिए एक संस्कार की तरह है-एकदम नैसर्गिक और स्वस्फूर्त! इन...
नाटक

हवालात : वैचारिक सौंदर्य का संवेदक परिदृश्य

समकालीन जनमत
राजेश कुमार नेमिचन्द्र जैन के नौ लघु नाटक संग्रह में एक नाटक ‘ हवालात’ है, जिसके लेखक हैं सर्वेश्वर दयाल सक्सेना। नेमिचन्द्र जी ने इस...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

अपने-अपने रामविलास: प्रणय कृष्ण

प्रणय कृष्ण
आज रामविलास जी का जन्मदिन पड़ता है.  इस अवसर पर प्रणय कृष्ण का लिखा आलेख ‘अपने अपने रामविलास’ समकालीन जनमत के पाठकों के लिए यहाँ...
नाटक

हिन्दू कालेज में ‘ छबीला रंगबाज का शहर ’ का मंचन

युवा लेखक प्रवीण कुमार द्वारा लिखित और रंगकर्मी- अभिनेता हिरण्य हिमकर द्वारा निर्देशित इस नाटक को दर्शकों ने मंत्रमुग्ध होकर देखा। कहानी का बड़ा हिस्सा...
कविताजनमत

रेतीले टिब्बों पर खड़े होकर काले बादलों की उम्मीद ओढ़ता कवि : अमित ओहलाण

उमा राग
कविता जब खुद आगे बढ़कर कवि का परिचय देने में सक्षम हो तो फिर उस कवि के लिए किसी परिचय की प्रस्तावना गढ़ने की ज़रुरत...
साहित्य-संस्कृति

गुजराती दलित साहित्य : बजरंग बिहारी तिवारी

गुजराती दलित साहित्य की नींव मजबूत है. उसकी उपलब्धियां गौरवपूर्ण हैं. उसका वर्तमान समृद्ध प्रतीत होता है. लेकिन, अपने भविष्य को लेकर उसे ज्यादा सावधान...
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