समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

नाटकसाहित्य-संस्कृति

मुम्बई की टीम द्वारा नाटक ‘अस एंड देम’ (Us and Them) का भव्य प्रदर्शन 

●कोरस द्वारा नुक्कड़ नाटक ‘गिरगिट’ व जनगीतों की हुई प्रस्तुति ●तीन दिवसीय नाट्योत्सव का हुआ शानदार समापन पटना 20.10.2019 स्थानीय कालिदास रंगालय में कोरस द्वारा...
पुस्तक

एक परिवार, एक देश के हवाले से पूरी दुनिया की कहानी कहता खालिद हुसैनी का उपन्यास द काइट रनर

समकालीन जनमत
ममता सिंह पेंगुइन बुक्स से आये अद्भुत उपन्यास ‘द काइट रनर’ के लेखक ख़ालिद हुसैनी का जन्म अफगानिस्तान के काबुल शहर में हुआ था। 1980...
नाटकसाहित्य-संस्कृति

नाट्योत्सव के दूसरे दिन कोरस ने किया ‘ ऐ लड़की ‘ का शानदार प्रदर्शन

समकालीन जनमत
●जनगीत व नुक्कड़ नाटक का भी हुआ प्रदर्शन ●आज मुम्बई की टीम के नाटक “US and Them’ से होगा नाट्योत्सव का समापन पटना:कोरस द्वारा आयोजित...
कविताजनमत

श्रम के सौंदर्य के कवि हैं अनवर सुहैल

समकालीन जनमत
ज़ीनित सबा अनवर सुहैल समकालीन हिंदी साहित्य के प्रमुख कथाकार होने के साथ साथ महत्वपूर्ण कवि भी हैं. उन्हें लोग विशेष रूप से ‘गहरी जड़ें’ कहानी संग्रह और ‘पहचान’ उपन्यास...
नाटकसाहित्य-संस्कृति

कोरस के तीसरे नाट्योत्सव का शानदार आगाज़

समकालीन जनमत
• पहले दिन माया कृष्ण राव के नाटक ‘इंडिया स्नैपशॉट्स’ का हुआ भव्य प्रदर्शन • आजादी और जम्हूरियत की हिमायती आवाज़ों के नाम समर्पित है...
साहित्य-संस्कृति

नागार्जुन के उपन्यासों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

समकालीन जनमत
आत्माराम सनातन धर्म महाविद्यालय, जनकवि नागार्जुन स्मारक निधि तथा रज़ा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 16 अक्टूबर को ‘नागार्जुन के उपन्यास : विविध आयाम’...
जनमतपुस्तक

मार्क्स और आधुनिक समाज

गोपाल प्रधान
2019 में मंथली रिव्यू प्रेस से माइकेल हाइनरिह की 2018 में छपी जर्मन किताब का अंग्रेजी अनुवाद ‘कार्ल मार्क्स ऐंड द बर्थ आफ़ माडर्न सोसाइटी:...
पुस्तक

लखनऊ की पांच रातें : अली सरदार जाफरी 

समकालीन जनमत
गीतेश सिंह कोई सरदार कब था इससे पहले तेरी महफ़िल में बहुत अहले सुखन उट्ठे, बहुत अहले -कलाम आए । “मुझे इंसानी हाथ बड़े खूबसूरत...
कविताजनमत

स्त्री जीवन की पीड़ाओं के नॉर्मलाइज़ होते जाने का विरोध हैं अपर्णा की कविताएँ

समकालीन जनमत
संजीव कौशल अपर्णा अनेकवर्णा से मेरा परिचय उनकी कविताओं के रास्ते ही है और यह रास्ता इतना अलग और आकर्षक है कि यहां से गुज़रते...
साहित्य-संस्कृति

कवि केदारनाथ सिंह पर केंद्रित ‘साखी’ के विशेषांक और उनकी कविताओं पर परिचर्चा

समकालीन जनमत
जन संस्कृति मंच, अलीगढ़ और हिंदी विभाग, श्री वार्ष्णेय कॉलेज, अलीगढ के संयुक्त तत्वावधान में वार्ष्णेय कॉलेज में तीन अक्टूबर को केदारनाथ सिंह पर केंद्रित...
साहित्य-संस्कृति

विस्थापन के दर्द को उकेरती हैं उमेश पंकज की कविताएं

कौशल किशोर
लखनऊ, 6 अक्टूबर। कवि उमेश पंकज  के पहले कविता संग्रह ‘एक धरती मेरे अन्दर’ का आज यहां स्थानीय कैफ़ी आज़मी एकेडमी में लोकार्पण हुआ। कार्यक्रम...
कविताजनमत

अंधेरे के ख़िलाफ़ ज़माने को आगाह करती हैं मुकुल सरल की कविताएँ

समकालीन जनमत
गीतेश सिंह अभी कुछ सप्ताह पहले जब हम त्रिलोचन को याद कर रहे थे, तो उनकी एक कविता लगातार ज़ेहन में चलती रही -कविताएँ रहेंगी तो/ सपने...
पुस्तक

सिनेमा के बारे में जावेद अख्तर से नसरीन मुन्नी कबीर की बातचीत

समकालीन जनमत
गीतेश सिंह भारतीय सिनेमा पर हिंदी में या तो बहुत कम साहित्य उपलब्ध है, या मेरी खोज की ही सीमा रही होगी कि बहुत दिनों से...
जनमतशख्सियतस्मृति

गांधी और उनके हत्यारे

इन्द्रेश मैखुरी
आज जब महात्मा गांधी की पैदाइश के 150 साल पूरे हो रहे हैं,तब लगता है कि एक चक्र पूरा हो कर दुष्चक्र की ओर बढ़...
स्वाद के बहाने

रानीवाड़ा के टुक्कड़

संजय जोशी
(‘प्रतिरोध का सिनेमा’ के राष्ट्रीय संयोजक संजय जोशी अपनी सिनेमा यात्राओं के सिलसिले में देश भर में घूमते रहते हैं । खाने-खिलाने के शौकीन संजय...
कविताजनमत

प्रज्ञा की कविता व्यक्ति पर समाज और सत्ता के प्रभाव से उठने वाली बेचैनी है

समकालीन जनमत
निकिता नैथानी ‘कविताएँ  आती हैं आने दो थोड़ी बुरी निष्क्रिय और निरीह हो तो भी..’ इस समय जब लोग आवाज़ उठाने और स्पष्ट रूप से...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति

वीरेन डंगवाल की याद: अचानक यह हुआ कि मैं रिसेप्शन में अकेला पड़ गया

समकालीन जनमत
अशोक पाण्डे जब उनसे पहली बार मिला वे नैनीताल के लिखने-पढ़ने वालों के बीच एक सुपरस्टार का दर्जा हासिल चुके थे. उनकी कविताओं की पहली...
जनमतपुस्तक

सुभाष राय की चिंताओं, सरोकार और लेखकीय दृष्टि से परिचित कराती एक पुस्तक ‘ जाग मछन्दर जाग’

समकालीन जनमत
प्रोफ़ेसर अरुण होता मिथक के अनुसार शिवजी पार्वती को योग एवं ज्ञान के गूढ तत्व बता रहे थे तो एक मत्स्य ने सब कुछ सुन लिया...
कहानी

उत्पीड़न के विरुद्ध उम्मीदों की ‘सुलगन’

समकालीन जनमत
आलोक रंजन कैलाश वानखेड़े की किताब ; सुलगन ! नौ कहानियों वाले इस संग्रह में इस नाम की कोई कहानी नहीं है लेकिन ‘सुलगन’ हर...
साहित्य-संस्कृति

‘जनता का अर्थशास्त्र ’ एक जरूरी किताब – प्रो रमेश दीक्षित

लखनऊ। आवारा पूंजी साम्राज्यवादी पूंजी का नया चेहरा है। वह राजनीति पर कब्जा जमाती है, उसे अपना गुलाम बनाती है। वह जिस अर्थशास्त्र को निर्मित...
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