समकालीन जनमत

Category : जनमत

कहानीजनमत

नेसार नाज़ की कहानी ‘मीरबाज़ खान’

दीपक सिंह
(नेसार नाज़ कथा साहित्य में बहुत परिचित नाम नहीं है | छत्तीसगढ़ के एक निहायत ही छोटे से कस्बे बैकुंठपुर (जो अब जिला मुख्यालय बन...
जनमत

समय को संबोधित सुभाष राय की कविताएँ

वरिष्ठ पत्रकार एवं जनसंदेश टाइम्स के प्रधान सम्पादक सुभाष राय का कविता संग्रह भले ही देर से आया हो पर अपने समय को सम्बोधित महत्वपूर्ण...
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स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर पटना में ‘कोरस’ द्वारा प्रतिरोध की एक शाम का आयोजन

समकालीन जनमत
14 अगस्त, पटना . स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर कोरस द्वारा सांस्कृतिक प्रतिरोध की एक शाम का आयोजन किया गया . यह आयोजन सरकारी...
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उमर खालिद पर हुए हमले से उठते सवाल

समकालीन जनमत
दिल्ली के कन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित ‘ख़ौफ़ से आज़ादी’ नामक कार्यक्रम में शामिल होने आए जेएनयू के शोध छात्र और एक्टिविस्ट उमर खालिद...
जनमत

‘कुछ नॉस्टैल्जिया तो है’ हेमंत कुमार की कहानी ‘रज्जब अली’ में

दीपक सिंह
(कथाकार हेमंत कुमार की कहानी ‘ रज्जब अली ’ पत्रिका ‘ पल-प्रतिपल ’ में प्रकाशित हुई है. इस कहानी की विषयवस्तु, शिल्प और भाषा को...
जनमत

इस ‘सिस्टेमेटिक’ सिस्टम से कब आजादी मिलेगी

शालिनी बाजपेयी
शालिनी वाजपेयी बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में स्थित बालिका गृह में सब ‘सिस्टेमेटिक’ चल रहा था। यहां मैंनें ‘ठीक’ शब्द का प्रयोग जानबूझ के नहीं किया...
जनमत

एक अंतहीन प्यास और तलाश की कथा विमलेश त्रिपाठी का उपन्यास ‘हमन हैं इश्क मस्ताना’

समकालीन जनमत
अनिला राखेचा हिंदी युग्म द्वारा प्रकाशित विमलेश त्रिपाठी  का ताज़ा-तरीन उपन्यास “हमन हैं इश्क मस्ताना” जितना अद्भुत है उतना ही बेजोड़ है इसका शीर्षक। उपन्यास...
कविताजनमत

अनुज लगुन की नई कविताएँ : रोटी के रंग पर ईमान लिख कर चलेंगे

उमा राग
अनुज लुगुन ने जब हिंदी की युवा कविता में प्रवेश किया तो वह एक शोर-होड़, करियरिस्ट भावना की आपाधापी, सस्ती यशलिप्सा से बौराई और पुरस्कारों...
जनमत

मंजू वर्मा का इस्तीफा जनांदोलनों की जीत, नीतीश व सुशील मोदी भी कटघरे में

समकालीन जनमत
आखिरकार बिहार की समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा को अपना इस्तीफा देना पड़ा है. निसन्देह यह बिहार के महिला आंदोलन की जीत है. ऐपवा के...
कविताजनमतशख्सियतस्मृति

वत्सल उम्मीद की ठुमक के साथ मैं तो सतत रहूँगा तुम्हारे भीतर नमी बनकर: वीरेन डंगवाल

उमा राग
करीब 16 बरस पहले वीरेन डंगवाल के संग्रह ‘दुश्चक्र में स्रष्टा’ पर लिखते हुए मैंने उल्लास, प्रेम और सौंदर्य को उनकी कविता के केंद्रीय तत्वों...
जनमतमीडिया

“ तुम्हारी तहजीब अपने खंजर से आप ख़ुदकुशी करेगी ”

ए.बी.पी. न्यूज़ में जिस तरह से मिलिंद खांडेकर और पुण्य प्रसून वाजपेयी की विदाई हुई और अभिसार शर्मा को खामोश किया गया,वह निश्चित ही सत्ता...
जनमत

किसान के क्रमिक दरिद्रीकरण की शोक गाथा है ‘ गोदान ‘

गोपाल प्रधान
प्रेमचंद ने गोदान में उपनिवेशवादी नीतियों से बरबाद होते भारतीय किसानी जीवन और इसके लिए जिम्मेदार ताकतों की जो पहचान आज के 75 साल पहले...
जनमतस्मृति

प्रेमचंद और अक्तूबर क्रांति

साम्राज्यवाद-उपनिवेशवाद विरोधी रवैये का एक निरंतरता में अनुपालन जितना प्रेमचंद के यहाँ दीखता है, वैसा हिंदी के किसी और लेखक में नहीं. असंख्य मजदूर, किसान,...
जनमत

कृषि अर्थव्यवस्था पर हमला है गौ रक्षा कानून

देश के जिन राज्यों में भी गौ रक्षा कानून लागू किया गया है मेरे खुद के सर्वे के अनुसार उन राज्यों में गौ-वंश की संख्या...
जनमत

मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड :बिहारी समाज पहले दिन से आंदोलित है

कुमार परवेज मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड को मीडिया में अब जगह मिल रही है क्योंकि इसे अब दबाया नहीं जा सकता. दबाने के बहुत...
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वैज्ञानिक-चित्त की खोज में पूरे जीवन बेचैन रहने वाला एक शिक्षाविद्

समकालीन जनमत
यशपाल बराबर इस बात को रेखांकित करते थे कि देश में सभी अपने बच्चों को विज्ञान पढ़ाना चाहते तो हैं किंतु वैज्ञानिक दृष्टि नहीं देना...
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फासीवाद के खिलाफ संघर्ष में मार्क्स के विचार से बेहतर विचार नहीं- दीपंकर भट्टाचार्य

समकालीन जनमत
क्रोनी पूंजीवाद, सांप्रदायिक विभाजन और मनुवादी के बीच गठजोड़ है. लिचिंग स्थाई परिघटना बना दी गई है. लिचिंग करने वालों को पता है कि उन्हें...
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सभ्यता का परदा हटातीं हैं आर. चेतन क्रांति की कवितायेँ

उमा राग
2004 में आए अपने पहले कविता  संग्रह ‘शोकनाच’ के साथ आर चेतन क्रांति ने इक्कीसवीं सदी की दुनिया के पेच शायद सबसे करीने से पकड़े।...
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स्वामी अग्निवेश पर हमले के विरोध में लखनऊ, रांची, गोरखपुर में विरोध प्रदर्शन

समकालीन जनमत
जन आंदोलनों के सम्मानित नेता स्वामी अग्निवेश पर झारखण्ड में हुए प्राणघातक हमले का जगह-जगह प्रतिरोध हो रहा है. विभिन्न संगठनों ने लखनऊ, रांची और...
जनमत

भीड़-दंड को प्रोत्साहित करता राज्य तंत्र

समकालीन जनमत
लिंचिंग में शरीक अधिकांश के लिए यह दंडमुक्त अपराध है. राज्यतंत्र ने इस दोहरेपन के साथ तालमेल बिठा लिया है. विभिन्न राजनीतिक संगठनों, सोशल मीडिया...
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