समकालीन जनमत

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अहसान नहीं अधिकार चाहिए: स्त्री अधिकार पर डॉ. अंबेडकर के विचार

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डॉ. पूर्णिमा मौर्या पिछले दिनों स्त्री स्वधीनता के सन्दर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने दंड संहिता की धारा 497 को असंवैधानिक घोषित करते हुए जो फैसला...
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भारत में स्त्री मुक्ति और डॉ. अम्बेडकर

डॉ रामायन राम
( डॉ. भीमराव अम्बेडकर की पुण्यतिथि के अवसर पर प्रस्तुत है जसम उत्तर प्रदेश के सचिव रामायन राम का स्त्री पराधीनता के इतिहास और नारी...
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6 दिसम्बर 1992 : एक फोटो जर्नलिस्ट की डायरी

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एस. के. यादव   अयोध्या : 6 दिसंबर 1992, समय 12.10 दोपहर चार लाख उन्मादी कारसेवकों की भीड़ के बीच एक झुंड कैमरा देखते ही...
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संविधान बचेगा, तभी देश भी बचेगा

रवि भूषण
25 नवम्बर 1949 को अम्बेडकर ने संविधान सभा में अन्तिम बार अपना भाषण, समापन भाषण दिया था जिसमें उन्होंने कई ऐसी बातें कही थीं, जो...
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नई करवट लेता भारत का किसान आन्दोलन

पुरुषोत्तम शर्मा
भारत का किसान आंदोलन आज एक नई करवट ले रहा है. एक तरफ देश में सत्तासीन भाजपा देश को कारपोरेट फासीवादी शासन की दिशा में...
जनमतस्मृति

खेतिहर समाज में सक्रिय शोषक-शक्तियों की पहचान करने वाले चिंतक ज्योतिबा फुले

समकालीन जनमत
(ज्योतिराव गोविंदराव फुले (11 अप्रैल 1827-28 नवम्बर 1890 के स्मृति दिवस पर उन्हें और उनके योगदान को याद कर रहें हैं सर्वेश कुमार मौर्य)  संपादक...
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आरएसएस प्रजातांत्रिक-धर्मनिरपेक्ष भारत के लिए सब से घातक आतंरिक खतरा

समकालीन जनमत
शम्सुल इस्लाम इतिहास इस सच्चाई का गवाह है कि अनेकों बार देश और उनके राजनैतिक निज़ाम बाहरी दुश्मनों के काराण नहीं, बल्कि आतंरिक तत्वों, जो...
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भारतीय संवैधानिक अदालतें और धर्मनिरपेक्षता (भाग-2)

समकालीन जनमत
इरफ़ान इंजीनियर (पिछले अंक से जारी)   पिछले अंक में हमने यह चर्चा की कि किस प्रकार, संविधान का अनुच्छेद 26 जहां विभिन्न धार्मिक समुदायों...
कविताजनमत

स्त्री की खुली दुनिया का वृत्त हमारे समक्ष प्रस्तुत करतीं कविताएँ

उमा राग
अच्युतानंद मिश्र निर्मला गर्ग की कविताओं में मौजूद सहजता ध्यान आकृष्ट करती है. सहजता से यहाँ तात्पर्य सरलीकरण नहीं है, बल्कि सहजता का अर्थ है...
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कहानी दो फैसलों की : आसिया बीबी और सबरीमाला

राम पुनियानी
आज दोनों पड़ोसी देशों में कई मामलों मे एक-से हालात हैं। कुछ दशक पहले तक भारत का चरित्र अपेक्षाकृत लोकतांत्रिक, उदार एवं धर्मनिरपेक्ष था किंतु...
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एक तरफ ‘ स्वच्छ भारत ‘ का ढोंग दूसरी तरफ हर 3 दिन में एक सफाईकर्मी की मौत

उर्मिला चौहान पूरे देश मे सफाई कर्मचारियों की हालत दिन पर दिन और खराब होती जा रही है। विडम्बना तो ये है कि 2014 में...
कविताजनमत

घर की सांकल खोलता हुआ कवि हरपाल

उमा राग
बजरंग बिहारी   कविता जीवन का सृजनात्मक पुनर्कथन है। इस सृजन में यथार्थ, कल्पना, आकांक्षा, आशंका और संघर्ष के तत्व शामिल रहते हैं। रचनाकार अपनी प्रवृत्ति,...
जनमतज़ेर-ए-बहस

नोटबंदी से काले धन पर प्रहार भी एक जुमला ही था

इन्द्रेश मैखुरी
  दो वर्ष पूर्व आज ही के दिन यानि 8 नवंबर को रात 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नोटबंदी की घोषणा की गयी थी....
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विकास, विस्थापन और साहित्य (संदर्भ झारखंड)

रामजी राय
आज इस बात में किसी को कोई संदेह नहीं रह गया है कि ग्लोबल पूंजीवाद के लाभ-लोभ के चलते दुनिया में गरीबी और पर्यावरण का...
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1984 के सिख क़त्ले-आम के मुजरिमों की तलाश का 34 साल लम्बा पाखंड !

शम्सुल इस्लाम
1984 के सिखों के क़त्लेआम के मामले में आरएसएस/भाजपा अपने आप को कांग्रेस से भिन्न साबित करने के लिए चाहे जो भी दावे करे लेकिन...
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विश्वविद्यालयों में काँचा इलैया की किताबों से कौन डरता है ?

लक्ष्मण यादव विश्वविद्यालय एक लोकतान्त्रिक मुल्क में अपने समय-समाज के अंतर्विरोधों से संवाद करते हुए तार्किक-वैज्ञानिक विवेक सम्पन्न बोध से लैस नागरिक तैयार करते हैं।...
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स्टैच्यू ऑफ यूनिटी नहीं, यह स्टैच्यू ऑफ डिस्प्लेसमेंट है

शशांक मुकुट शेखर सरकार हजारों आदिवासियों की मृत्यु का जश्न मनाने की तैयारियों में तल्लीन है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की...
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‘ मोदी सरकार ने हर मोर्चे पर किसानों और देश की जनता से धोखा किया है ’

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  सोनीपत (हरियाणा).  अखिल भारतीय किसान महासभा की राष्ट्रीय परिषद की दो दिवसीय बैठक आज हरियाणा के सोनीपत स्थित सर छोटूराम धर्मशाला में शुरू हुई।...
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दलित-बहुजन बौद्धिकता के विमर्श का दमन है प्रो. कांचा इलैया की पुस्तकों को पाठ्यक्रम से हटाना

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नई दिल्ली. जन संस्कृति मंच ने दिल्ली विश्वविद्यालय की स्टैंडिंग कमिटी द्वारा प्रो. कांचा इलैया की पुस्तकों को एम.ए राजनीति विज्ञान के पाठ्यक्रम से हटाए...
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प्रेम के बहाने एक अलग तरह का सामाजिक विमर्श रचती पल्लवी त्रिवेदी की कविताएँ

उमा राग
निरंजन श्रोत्रिय युवा कवयित्री पल्लवी त्रिवेदी की कविताओं को महज़ ‘प्रेम कविताएँ’ या रागात्मकता की कविताएँ कहने में मुझे ऐतराज़ है। पल्लवी की विलक्षण काव्य-प्रतिभा...
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