समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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जनमतशख्सियतस्मृति

प्रेमचंद की दलित स्त्रियाँ: वैभव सिंह

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वैभव सिंह प्रेमचंद जितना पुरुष-जीवन का अंकन करने वाले कथाकार हैं, उतना ही स्त्रियों के जीवन के भी विविध पक्षों को कथा में व्यक्त करते...
ख़बर

श्रम कानूनों का ख़ात्मा मंज़ूर नहीं: बिल्डिंग वर्कर्स यूनियन

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अभिषेक कुमार दिल्ली, 30 जुलाई 2019 : ऐक्टू से सम्बद्ध बिल्डिंग वर्कर्स यूनियन ने आज पूर्वी दिल्ली स्थित झिलमिल श्रम कार्यालय पर मोदी सरकार द्वारा...
जनमतशख्सियतस्मृति

किसान आत्म-हत्याओं के दौर में प्रेमचंद – प्रो. सदानन्द शाही

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 प्रो.सदानन्द शाही किसानों की आत्म हत्यायें हमारे समाज की भयावह सचाई है। भारत जैसे देश में किसान आत्महत्यायें कर रहे हैं यह शर्मशार कर देने...
कहानीशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

कफ़न: एक बहुस्तरीय कहानी

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प्रो. सदानंद शाही कफ़न प्रेमचन्द की ही नहीं हिन्दी की सर्वश्रेष्ठ कहानियों में एक है। कफ़न एक बहुस्तरीय कहानी है, जिसमें घीसू और माधव की बेबसी, अमानवीयता और निकम्मेपन...
साहित्य-संस्कृति

देखें प्रेमचंद की कहानियों पर बनी दो प्रस्तुतियाँ

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‘बूढ़ी काकी’ https://www.youtube.com/watch?v=H4D_eIQZGoE ‘पूस की रात’ https://www.youtube.com/watch?v=qv6loTEoMvg...
जनमतशख्सियतस्मृति

सदगति : ‘ग़म क्या सिर के कटने का’*

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प्रो. सदानन्द शाही सदगति दलित पात्र दुखी की कहानी है। दुखी ने बेटी की शादी तय की है। साइत विचरवाने के लिए पं0. घासीराम को बुलाने...
जनमतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति

बच्चों की निगाह में प्रेमचंद

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[2016 में 31 जुलाई को जसम के कार्यक्रम  ‘मशाल-ए-प्रेमचंद’ में बच्चों द्वारा बनाए गए चित्रों की प्रदर्शनी से  कुछ तस्वीरें ]...
जनमतशख्सियतस्मृति

मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया : गजानन माधव मुक्तिबोध

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एक छाया-चित्र है । प्रेमचन्द और प्रसाद दोनों खड़े हैं । प्रसाद गम्भीर सस्मित । प्रेमचन्द के होंठों पर अस्फुट हास्य । विभिन्न विचित्र प्रकृति...
जनमतशख्सियतस्मृति

रेलवे स्टेशन पर प्रेमचन्द

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डॉ. रेखा सेठी अभी हाल ही में नयी दिल्ली के रेलवे स्टेशन पर मुझे प्रेमचन्द की लोकप्रियता का नया अनुभव हुआ। स्टेशन के लगभग हर...
कविताजनमत

प्रतिरोध का रसायन तैयार करती उस्मान ख़ान की कविताएँ

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खुशियाँ अच्छी हैं बहुत, मगर  इसमें भी अतिश्योक्ति है! उस्मान की कविताओं का संसार, एक ऐसा संघन संसार है जहाँ एक हाथ को नहीं सूझता दूसरा...
साहित्य-संस्कृतिस्मृति

‘जीवन और साहित्य में घृणा का स्थान’ से कुछ अंश: प्रेमचंद

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निंदा, क्रोध और घृणा ये सभी दुर्गुण हैं, लेकिन मानव जीवन में से अगर इन दुर्गुणों को निकल दीजिए, तो संसार नरक हो जायेगा। यह...
जनमतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति

साहित्य का उद्देश्य: प्रेमचंद

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[1936 में प्रगतिशील लेखक संघ के प्रथम अधिवेशन लखनऊ में प्रेमचंद द्वारा दिया गया अध्यक्षीय भाषण] यह सम्मेलन हमारे साहित्य के इतिहास में स्मरणीय घटना है।...
जनमतस्मृति

प्रेमचंद के फटे जूते: हरिशंकर परसाई

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प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फोटो खिंचा रहे हैं। सिर पर किसी मोटे कपड़े की टोपी, कुरता और धोती पहने...
जनमतज़ेर-ए-बहसस्मृति

प्रेमचंद साहित्य में दलित विमर्श: प्रो. चमनलाल

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प्रो. चमनलाल प्रेमचंद के दलित विमर्श को लेकर हिन्दी लेखकों में काफी विवाद है। प्रेमचंद के जीवनकाल के दौरान भी उनके साहित्य को लेकर विवाद...
जनमतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति

प्रेमचंद जी:  महादेवी वर्मा

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प्रेमचंदजी से मेरा प्रथम परिचय पत्र के द्वारा हुआ. तब मैं आठवीं कक्षा की विद्यार्थिनी थी. मेरी “दीपक” शीर्षक एक कविता शायद “चाँद” में प्रकाशित...
जनमतशख्सियतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति

‘सांप्रदायिकता और संस्‍कृति’ : प्रेमचंद (प्रेमचंद पर शृंखला की शुरुआत)

समकालीन जनमत
31 जुलाई को कथाकार प्रेमचंद का जन्‍मदिन है। समकालीन जनमत अपने पाठकों के लिए आज से 31 जुलाई तक प्रेमचंद पर एक विशेष शृंखला की शुरुआत...
कहानी

अनकहा आख्यान: जया जादवानी

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डॉ. हर्षबाला शर्मा कहानी और कविता के भीतर बहते इन्तज़ार की नदी कहानी पढ़ते हुए अगर कविता भीतर जन्म लेने लगे और आप उसमें बहते...
ज़ेर-ए-बहस

हिमा दास: हम जो नहीं देखते हैं

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नित्यानंद गायेन हिमा दास ने इतिहास रचा, 5 दिनों में हिमा दास ने जीता चौथा गोल्ड मेडल. यह वाक्य मेरा नहीं है. अख़बार की हेडलाइन...
जनमतशख्सियत

मानवीय मूल्यों और अधिकारों के कवि राजेश जोशी

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विवेक निराला 18 जुलाई, राजेश जोशी का जन्मदिनहै। राजेश जोशी आज की कविता के उन महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षरों में हैं, जिनसे समकालीन कविता की पहचान बनी है।...
साहित्य-संस्कृति

असम के मियाँ कवियों के साथ एकजुटता में दिल्ली में प्रेस वार्ता

समकालीन जनमत
प्रेस कॉन्फ्रेंस 18 जुलाई, 2019 दोपहर 1 से 2:30 बजे, प्रेस क्लब, नई दिल्ली यद्यपि ‘मियाँ’ शब्द का शाब्दिक अर्थ उर्दू में सज्जन है, बंगाली...
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