समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

1173 Posts - 0 Comments
ख़बर

चिन्मयानंद की गिरफ़्तारी की मांग को लेकर लखनऊ में हुआ धरना

समकालीन जनमत
लखनऊ, 14 सितंबर। राजधानी लखनऊ में बलात्कार आरोपी चिन्मयानंद को तत्काल गिरफ़्तार कर उनकी सम्पत्ति को जप्त करने की मांग को लेकर शहीद स्मारक पर...
कविताजनमत

ईमानदार जवाबों की तलाश में : ऐश्वर्या की कविता

समकालीन जनमत
अपराजिता शर्मा ‘जानने की क्रिया प्रत्यक्ष और एकतरफ़ा नहीं हो सकती!’ पहचान और परिचय से आगे बढ़ने के लिए जानने की इस क्रिया से गुज़रना...
कविताजनभाषाजनमत

अपने समय से सार्थक संवाद हैं सुस्मिता पाठक की कविताएँ

समकालीन जनमत
रमण कुमार सिंह समकालीन मैथिली कविता में सुस्मिता पाठक एक सुपरिचित और सम्मानित नाम है। मैथिली में स्त्री लेखन को आधुनिक चेतना और नया तेवर...
ख़बर

एन आर सी की फाइनल सूची पर भाकपा(माले) का बयान

समकालीन जनमत
नई दिल्‍ली 31 अगस्‍त असम में नेशनल रजिस्‍टर ऑफ सिटीजन्‍स (एनआरसी) की फाइनल सूची प्रकाशित हो चुकी है. 19 लाख से ज्‍यादा लोग (कुल 19,06,657)...
कविताजनमत

अंधेरे की घुसपैठ के प्रतिरोध में रोशनी की सुरंग बनाते नवगीत

समकालीन जनमत
डॉ. दीपक सिंह डॉ. राजेंद्र गौतम  कवि, समीक्षक और शिक्षाविद के रूप में एक जाना-पहचाना नाम है | बरगद जलते हैं (1997), पंख होते हैं...
ख़बरजनमत

अभिव्यक्ति की आज़ादी पर रोक लगाने का विरोध

समकालीन जनमत
दिनांकः 18 अगस्त, 2019 11 व 16 अगस्त , 2019 को एडवोकेट मोहम्मद शोएब, संदीप पाण्डेय व अन्य साथियों को कश्मीर के लोगों के समर्थन...
ख़बर

ऑल इंडिया पीपल्स फ़ोरम की राष्ट्रीय परिषद की बैठक दुर्ग में संपन्न

समकालीन जनमत
  केन्द्र सरकार के कश्मीर संबंधी असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक निर्णयों के ख़िलाफ़ जन प्रतिरोध अभियान चलाने का फैसला 2 अक्टूबर को होगा देश भर में...
कविताजनमत

‘सफ़र है कि ख़त्म नहीं होता’ : सोनी पाण्डेय की कविताएँ

समकालीन जनमत
मदन कश्यप हिन्दी में स्त्री कवयित्रियों की सांकेतिक उपस्थिति तो आदिकाल से रही है। लेकिन 1990 की दशक में जो बदलाव आया उसका एक सकारात्माक...
कविता

विजय राही की कविताएँ वर्तमान के साथ अंतःक्रिया करती हैं

समकालीन जनमत
अलोक रंजन  एक कवि का विस्तार असीमित होता है और यदि कवि अपने उस विस्तार का सक्षम उपयोग करते हुए अपनी आंतरिक व्याकुलता को समय...
ख़बर

शिक्षा के निजीकरण- भगवाकरण के खिलाफ देश स्तर पर छात्रों को गोलबंद कर संघर्ष तेज करेगी आइसा

समकालीन जनमत
रैली निकालकर आइसा ने की राज्य सम्मेलन की शुरुआत! देश को बर्बाद करने पर तुली है भाजपा सरकार- धीरेन्द्र झा-संस्थापक महासचिव आइसा शिक्षा के निजीकरण-...
ख़बर

पटना में नागरिक प्रतिवाद पर बजरंग दल के हमले के ख़िलाफ़ कार्यवाही की मांग!

समकालीन जनमत
पटना 9 अगस्त 2019 भाकपा-माले विधायक महबूब आलम, राज्य कमिटी सदस्य कुमार परवेज व आरवाईए के राज्य सचिव सुधीर कुमार की तीन सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल...
जनमतज़ेर-ए-बहस

‘ 370 को लेकर आरएसएस आंबेडकर के नाम पर फैला रही झूठ ‘

समकालीन जनमत
 आर. राम अनुच्छेद 370 को लेकर संसद और संसद के बाहर एक झूठ फैलाया जा रहा है कि डॉ आंबेडकर ने अनुच्छेद 370 को लागू...
जनमतज़ेर-ए-बहस

जम्मू-कश्मीर और ‘नफ़रत का महोत्सव’

समकालीन जनमत
प्रियदर्शन जम्मू-कश्मीर से जुड़े केंद्र सरकार के ताज़ा फ़ैसलों पर सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया देखिए तो लगेगा कि हिंदुस्तान ने जैसे जम्मू-कश्मीर पर कोई जीत...
जनमतशख्सियतस्मृति

उजले दिनों की उम्मीद का कवि वीरेन डंगवाल

समकालीन जनमत
मंगलेश डबराल ‘इन्हीं सड़कों से चल कर आते हैं आततायी/ इन्हीं सड़कों से चल कर आयेंगे अपने भी जन.’ वीरेन डंगवाल ‘अपने जन’ के, इस...
जनमतयात्रा वृतान्त

जित देखूँ तित लाल… (प्राग यात्रा-संस्मरण)

समकालीन जनमत
डॉ. रेखा उप्रेती सामान बाँध लिया है| वियना में बिताया यह दिन किसी नायाब तोहफे सा हमारी झोली में आ गिरा है और अब प्राग...
कविताजनमत

स्मृति और प्रेम का कवि कुंदन सिद्धार्थ

समकालीन जनमत
जैसे पूरा गांव ही कमरे में समा गया हो! जब भी कोई शहर से लौटकर गाँव आता तो सारे लोग उसे घेरकर घण्टों शहर की...
ख़बर

ट्रेड यूनियनों ने केंद्र सरकार द्वारा श्रम अधिकारों पर हो रहे हमलों के ख़िलाफ़ किया प्रदर्शन_

समकालीन जनमत
नई दिल्ली, 2 अगस्त 2019 ऐक्टू व अन्य केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व फेडरेशनों ने आज देशभर में मोदी सरकार के मज़दूर विरोधी कोड बिल के...
जनमत

हतभागे किसान: प्रेमचन्द

समकालीन जनमत
(प्रेमचन्द ने यह लेख 19 दिसम्बर 1932 में लिखा था। उनके इस लेख के साथ समकालीन जनमत प्रेमचंद पर अपनी यह शृंखला समाप्त करता है। इस...
जनमतशख्सियतस्मृति

नायक विहीन समय में प्रेमचंद

समकालीन जनमत
प्रो. सदानन्द शाही कुछ तारीखें कागज के कैलेण्डरों पर दर्ज होती हैं और याद रखी जाती हैं या पर कुछ तारीखें ऐसी भी होती हैं...
जनमतशख्सियतस्मृति

प्रेमचंद की दलित स्त्रियाँ: वैभव सिंह

समकालीन जनमत
वैभव सिंह प्रेमचंद जितना पुरुष-जीवन का अंकन करने वाले कथाकार हैं, उतना ही स्त्रियों के जीवन के भी विविध पक्षों को कथा में व्यक्त करते...
Fearlessly expressing peoples opinion