समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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ज़ेर-ए-बहस

गांधी बनाम गांधी

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यह वर्ष महात्मा गांधी की 150वीं जयंती का वर्ष है.  इस वर्ष में गांधी को लेकर अलग अलग नजरिये से बातें हो रही हैं। गांधी...
कविता

अर्पिता राठौर की कविताएँ लघुता की महत्ता की अभिव्यक्ति हैं

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साक्षी सिंह अर्पिता की कलम एकदम नई है और ख़ुद को अभिव्यक्त करने की बेचैनी से ज़्यादा जो अभिव्यक्त है उसके हर सम्भव आयाम को...
ख़बर

‘कश्मीर में दमन के सौ दिन’ लखनऊ में महिला और नागरिक संगठनों ने दिखाई एकजुटता

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मीना सिंह आज दिनांक 13नवंबर को कश्मीरी अवाम के ख़िलाफ़ हुई सरकारी दमन के 100 दिन पूरे हुए हैं। उनके सवालों पर एकजुटता दिखाने के...
कविता

नबनीता देब सेन की कविताओं में प्रेम और रिश्तों की अभूतपूर्व संवेदनाओं और द्वंद्वों को स्वर मिला है

समकालीन जनमत
मीता दास बंगाली साहित्य की प्रमुख लेखिका नबनीता देब सेन 81 साल की थीं। पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित लेखिका ने 7/11/19 गुरुवार की शाम 7.30...
जनमतज़ेर-ए-बहस

अयोध्‍या में विवादित भूमि के मालिकाने के मुकदमे में सर्वोच्‍च न्‍यायालय के फैसले पर भाकपा(माले) पोलितब्‍यूरो का बयान

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नई दिल्‍ली 9 नवम्‍बर. यह महत्‍वपूर्ण है कि अयोध्‍या में विवादित स्‍थल पर सर्वोच्‍च न्‍यायालय का फैसला किसी भी तरह से 6 दिसम्‍बर 1992 को...
कविताजनमत

वीरेनियत 4: सन्नाटा छा जाए जब मैं कविता सुनाकर उठूँ

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पंकज चतुर्वेदी ‘वीरेनियत-4’ के अन्तर्गत इंडिया हैबिटेट सेण्टर, नयी दिल्ली में शुभा जी का कविता-पाठ सुना। उनकी कविताएँ समकालीन परिस्थितियों से उपजे इतने गहन तनाव...
कविताजनमत

वीरेनियत 4: अनसुनी पर ज़रूरी आवाज़ों का मंच

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अदनान कफ़ील ‘दरवेश’ कल ‘वीरेनियत’ के चौथे संस्करण में जाने का मौक़ा मिला। दिल्ली की आब-ओ-हवा में इस वक़्त ज़हर की तासीर घुली हुई है।कुहेलिका...
कविताजनमत

वीरेनियत 4: जहाँ कविता के बाद का गहन सन्नाटा बजने लगा

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आशुतोष कुमार दिन वैसे अच्छा नहीं था। दिल्ली आसपास का दम काले धुंए में घुट रहा था। छुट्टियों के कारण बहुत से दोस्त शहर से...
कविता

विनय सौरभ लोक की धड़कती हुई ज़मीन के कवि हैं

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प्रभात मिलिंद कवि अपनी कविता की यात्रा पर अकेला ही निकलता है. जब इस यात्रा के क्रम में पाठक उसके सहयात्री हो जाएँ तो समझिए...
कविता

रंजना मिश्र की कविताओं में जीवन उदासी के साये में खड़ा हुआ भी जिजीविषा से भरा रहता है।

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प्रतिमा त्रिपाठी भाषाई उठापटक, शब्दों के खेल और अर्थों के रचे हुये मायावी संसार से बोझिल होती हुई कविताओं के इस समय में रंजना मिश्रा...
ख़बरजनमत

झारखंड जनाधिकार महासभा ने स्टैन स्वामी पर कुर्की कार्यवाही की निंदा की

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21 अक्टूबर को खूंटी पुलिस ने रांची के निकट नामकुम में स्थित बगाइचा परिसर में 83-वर्षीय स्टैन स्वामी के निवास पर कुर्की कार्रवाई की. पुलिस...
ख़बरग्राउन्ड रिपोर्ट

रेहड़ी-खोखा-पटरी उजाड़ने के विरोध में हुआ रोज़गार मार्च व प्रतिरोध सभा

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अभिषेक कुमार दिल्ली, 20 अक्टूबर, 2019 : आज दिल्ली के मयूर विहार फेज – 3 में रेहड़ी-खोखा-पटरी उजाड़ने के खिलाफ़ ‘रोज़गार मार्च’ निकाला गया। मार्च...
कविताजनमत

श्रम के सौंदर्य के कवि हैं अनवर सुहैल

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ज़ीनित सबा अनवर सुहैल समकालीन हिंदी साहित्य के प्रमुख कथाकार होने के साथ साथ महत्वपूर्ण कवि भी हैं. उन्हें लोग विशेष रूप से ‘गहरी जड़ें’ कहानी संग्रह और ‘पहचान’ उपन्यास...
कविताजनमत

स्त्री जीवन की पीड़ाओं के नॉर्मलाइज़ होते जाने का विरोध हैं अपर्णा की कविताएँ

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संजीव कौशल अपर्णा अनेकवर्णा से मेरा परिचय उनकी कविताओं के रास्ते ही है और यह रास्ता इतना अलग और आकर्षक है कि यहां से गुज़रते...
कविताजनमत

अंधेरे के ख़िलाफ़ ज़माने को आगाह करती हैं मुकुल सरल की कविताएँ

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गीतेश सिंह अभी कुछ सप्ताह पहले जब हम त्रिलोचन को याद कर रहे थे, तो उनकी एक कविता लगातार ज़ेहन में चलती रही -कविताएँ रहेंगी तो/ सपने...
जनमत

साइकिल चिंतन : विजय कुमार

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  सड़क पर तरह-तरह के वाहनों की एक सामूहिक गति होती है – अक्सर खौफनाक और हिंसक गति. अंधाधुंध गति और रेल-पेल के बीच एक...
कविताजनमत

प्रज्ञा की कविता व्यक्ति पर समाज और सत्ता के प्रभाव से उठने वाली बेचैनी है

समकालीन जनमत
निकिता नैथानी ‘कविताएँ  आती हैं आने दो थोड़ी बुरी निष्क्रिय और निरीह हो तो भी..’ इस समय जब लोग आवाज़ उठाने और स्पष्ट रूप से...
जनमतपुस्तक

सुभाष राय की चिंताओं, सरोकार और लेखकीय दृष्टि से परिचित कराती एक पुस्तक ‘ जाग मछन्दर जाग’

समकालीन जनमत
प्रोफ़ेसर अरुण होता मिथक के अनुसार शिवजी पार्वती को योग एवं ज्ञान के गूढ तत्व बता रहे थे तो एक मत्स्य ने सब कुछ सुन लिया...
कहानी

उत्पीड़न के विरुद्ध उम्मीदों की ‘सुलगन’

समकालीन जनमत
आलोक रंजन कैलाश वानखेड़े की किताब ; सुलगन ! नौ कहानियों वाले इस संग्रह में इस नाम की कोई कहानी नहीं है लेकिन ‘सुलगन’ हर...
ख़बरजनमत

उत्तराखंड के एक गाँव में स्कूली बच्चों के लिए ‘संगवारी’ ने की नाट्य कार्यशाला

समकालीन जनमत
21 और 22 सितम्बर के दौरान दिल्ली की सँगवारी थियेटर ग्रुप की दो सदस्यीय टीम उत्तराखण्ड , रामनगर के ढेला गाँव में वहाँ की सांस्कृतिक...
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