समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

1173 Posts - 0 Comments
स्मृति

हीरा सिंह राणा के गीतों में पहाड़ का लोक धड़कता है

समकालीन जनमत
नवेंदु मठपाल 13 जून की सुबह सुबह जैसे ही फेसबुक खोला एक मित्र की वाल पर उत्तराखण्ड के लोकगायक, कुमाउनी कवि हीरा सिंह राणा जी...
ख़बर

झारखंड जनाधिकार महासभा ने कोयले के कामर्शियल खनन का विरोध किया, विरोध प्रदर्शन का आह्वान

समकालीन जनमत
झारखंड जनाधिकार महासभा ने कोयला की कामर्शियल खनन की अनुमति देने के केंद्र सरकार के फैसले का विरोध करते हुए इसके खिलाफ बड़े पैमाने पर...
साहित्य-संस्कृति

कहानी-पाठ और परिचर्चा

समकालीन जनमत
कहानी-पाठ और परिचर्चा  कहानी– अंतिम कक्षा लेखक– अल्फोंस दोदे रिपोर्ट– मोहम्मद उमर रविवार, यानी 14 जून 2020 को महादेवी वर्मा स्मृति महिला पुस्तकालय, प्रयागराज की...
ख़बर

माँग प्रचार सप्ताह में बिहार में प्रदर्शन कर आशा कर्मी मांग रहीं अपना हक़

समकालीन जनमत
पटना. ऑल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन के आह्वान पर आशा-मध्यान्ह भोजन रसोईया-आंगनबाड़ी कर्मियों सहित अन्य स्कीम वर्करों का ऐक्टू के न्याय अभियान के तहत देशव्यापी...
कविता

कठिन भरपाइयों की कोशिश हैं अमर की कविताएँ

समकालीन जनमत
विनोद विट्ठल मनुष्य ने सामुदायिकता और साझा करने के विरल मूल्यों से जो कुछ हासिल किया था उस सबको कोरोना-काल में बुरी तरह से खो...
पुस्तक

गाथा इक सूरमे दी : जन नायक कामरेड बलदेव सिंह मान पर एक खोज खोज पूर्ण पुस्तक

समकालीन जनमत
सुखदर्शन नत्त  पंजाब के नक्सलवादी आन्दोलन से उभर कर सामने आये जन नायक और राजनैतिक नेताओं की पहली पंक्ति में आने वाले कामरेड बलदेव सिंह...
कहानी

वीभत्स- पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’

समकालीन जनमत
वीभत्स पांडेय बेचन शर्मा  ‘उग्र’ शौच-फरागत से निपटकर सुमेरा जाट घर की ओर लौटा आ रहा था। अब सबेरा और खुल गया था। पास-पड़ोस के...
कविताजनमत

रोहित ठाकुर प्रकृति की पुकार के कवि हैं

समकालीन जनमत
जसवीर त्यागी “नए ब्रांड का प्रेम उतारा था बाज़ार में /जिसने पहले/ लॉन्च किये हैं उसी कंपनी ने/ हत्या के नए उपकरण/ दाल-भात लिट्टी चोखे...
ख़बर

सीपीआई-एमएल दिल्ली कमेटी ने पूर्वी दिल्ली दंगा पीड़ितों के लिए राहत और पुनर्वास अभियान  फ़िर से शुरू किया।

समकालीन जनमत
सुचेता डे इस वर्ष 24 फरवरी से उत्तरी पूर्वी दिल्ली में सोचे समझे ढंग से सांप्रदायिक हमले करवाए गए जिसमें सैकड़ों घर जल गए। सैकड़ों...
कविता

‘जॉर्ज फ्लॉयड हम भी साँस नहीं लेे पा रहे हैं’

समकालीन जनमत
25 मई 2020 को अमेरिका मिनेपॉलिस शहर में अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय के 46 वर्षीय जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद के बाद पूरा अमेरिका सुलग उठा...
कविता

राजेन्द्र देथा की कविताओं में सहज मनुष्‍यता के उत्‍प्रेरक चित्र हैं

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल शिशु सोते नहीं अर्द्धरात्रि तक विश्राम भी नहीं करेंगे वे थोड़ा और हँसेंगे अभी और बताएंगे तुम्हें कि हँसना क्या होता है? सोते...
शिक्षा

स्कूली बच्चे और ऑनलाइन पढ़ाई: क्या हम तैयार हैं?

समकालीन जनमत
डॉ. दीना नाथ मौर्य पिछले दिनों स्पेन में जब 49 दिनों की तालाबंदी के बाद बच्चों को खेलने के लिए पार्कों में ले जाया गया...
ख़बर

डूटा के रेफरेंडम से सामने आई ऑनलाइन परीक्षा की हक़ीक़त

समकालीन जनमत
राजीव कुँवर कुछ साल पहले जब आप दिल्ली विश्वविद्यालय आए होंगे तब मैट्रो स्टेशन का नाम था ‘विश्वविद्यालय’। अब उसका नाम बदले हुए रंग में...
जनमत

कोरोना और ईद-उल-फ़ित्र के बीच प्रवासी मज़दूर

समकालीन जनमत
आरफ़ा अनीस पूरी दुनिया इस वक़्त कोरोना नामक वैश्विक महामारी की चपेट में है। सीमित संसाधनों और ग़लत राजनीतिक नीतियों के बीच भारत में अब...
ख़बर

सांस्कृतिक-सामाजिक संगठनों ने कहा : मानवाधिकार-कर्मियों और लेखकों-पत्रकारों की गिरफ्तारियों पर रोक लगे

समकालीन जनमत
 जन संस्कृति मंच, दलित लेखक संघ, प्रगतिशील लेखक संघ, न्यू सोशलिस्ट इनिशिएटिव, प्रतिरोध का सिनेमा, संगवारी, जन नाट्य मंच और जनवादी लेखक संघ ने असहमति...
ज़ेर-ए-बहस

दिल्ली पुलिस ने बदला ‘आपदा’ को ‘अवसर’ में

समकालीन जनमत
संजीव कुमार हत्यारों के लिए, हत्यारों के साथ, सदैव! दिल्ली पुलिस ने जिस तरह आपदा को अवसर में बदला है, वह अभूतपूर्व है. कल ‘पिंजरा...
ज़ेर-ए-बहस

मजदूरों की यातना का समाधान है-भूमि सुधार !

समकालीन जनमत
डॉ. आर. राम   महामारी और तालाबंदी से बेरोजगार होकर सड़कों पर बदहाल हालत में पैदल अपने घरों को जाते हुये मरते-खपते   मजदूरों की तस्वीरें...
कविता

कविता कृष्णपल्लवी की कविताएँ बाहरी कोलाहल और भीतरी बेचैनी से अर्जित कविताएँ हैं

समकालीन जनमत
विपिन चौधरी साहित्यिक एक्टिविज्म का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाने वाली पोस्टर-कविता, हमेशा से विरोध प्रदर्शनों का अहम् हिस्सा रही हैं. सबसे सघन समय में...
शिक्षा

बच्चों की रचनात्मकता को ऑनलाइन विकसित करता “जश्न ए बचपन”

समकालीन जनमत
उत्तराखण्ड के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के फोरम “रचनात्मक शिक्षक मण्डल” ने लॉक डाउन के दिनों में बच्चों की रचनात्मकता को बनाये रखने के...
व्यंग्य

आख़िर क्यों? दी नेशन वॉन्ट्स टू नो!

समकालीन जनमत
( एक तरफ़ महामारी और दूसरी तरफ़ सरकारी तंत्र की नाकामी के कारण मानव जीवन की हाड़ कंपा देने वाली ऐसी भयानक बेक़दरी को उसके...
Fearlessly expressing peoples opinion