ख़बर घंटाघर पर लहराता जनसमुद्र, संगवारी ने पेश किया सांस्कृतिक कार्यक्रमकौशल किशोरFebruary 10, 2020February 10, 2020 by कौशल किशोरFebruary 10, 2020February 10, 202001709 लखनऊ. इन दिनों लखनऊ का घंटाघर सुर्खियों में है। शाहीनबाग से सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में औरतों ने जिस धरने के शुरुआत की...
ख़बर लखनऊ का घंटाघर जहाँ से रोशनी का फव्वारा फूट रहा हैकौशल किशोरJanuary 24, 2020January 24, 2020 by कौशल किशोरJanuary 24, 2020January 24, 202002909 लखनऊ के घंटाघर से लौटा हूं। पर क्या लौट पाया हूं ? यह वह जगह बन गयी जहां से रोशनी का फव्वारा फूट रहा है।...
ख़बर लेखक संगठनों ने की सामाजिक कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांगकौशल किशोरDecember 29, 2019January 1, 2020 by कौशल किशोरDecember 29, 2019January 1, 202001998 लखनऊ, 29 दिसम्बर 2019 केन्द्र की सरकार द्वारा लाये गये नागरिक संशोधन कानून और प्रस्तावित एनआरसी के विरुद्ध देश के लोकतांत्रिक, अमनपसन्द, देशभक्त और संविधान...
ख़बर लेखक संगठनों का सीएए और एनआरसी के खिलाफ राष्ट्रीय प्रतिवाद में भागीदारी का आह्वानकौशल किशोरDecember 18, 2019December 18, 2019 by कौशल किशोरDecember 18, 2019December 18, 201901975 प्रलेस, जलेस, जसम इप्टा की उत्तर प्रदेश इकाइयों ने नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ देश भर के लोकतांत्रिक, अमनपसंद और संविधान में आस्था...
ज़ेर-ए-बहस महिला हिंसा और समकालीन स्त्री काव्य चेतनाकौशल किशोरNovember 12, 2019November 12, 2019 by कौशल किशोरNovember 12, 2019November 12, 201904733 शमशेर बहादुर सिंह की मशहूर कविता है ‘काल से होड़’। अपनी इस कविता में वे कहते हैं ‘काल तुझसे होड़ है मेरी – अपराजित तू/तुझ...
पुस्तकसाहित्य-संस्कृति ‘ मोदीनामा ’ : हिन्दुत्व का उन्मादकौशल किशोरNovember 4, 2019November 4, 2019 by कौशल किशोरNovember 4, 2019November 4, 201901918 मोदी सरकार दूसरी बार सत्तासीन हुई है। पिछली बार की तुलना में उसका मत प्रतिशत बढ़ा है। उसकी सीटों में भी इजाफा हुआ है।...
पुस्तकसाहित्य-संस्कृति ‘ जनता का अर्थशास्त्र ’ : एक जरूरी किताबकौशल किशोरOctober 31, 2019October 31, 2019 by कौशल किशोरOctober 31, 2019October 31, 201902433 भगवान स्वरूप कटियार की नयी किताब ‘जनता का अर्थशास्त्र’ ऐसे समय में आयी है जब देश आर्थिक मंदी की चपेट में है। विकास का...
साहित्य-संस्कृति विस्थापन के दर्द को उकेरती हैं उमेश पंकज की कविताएंकौशल किशोरOctober 6, 2019October 6, 2019 by कौशल किशोरOctober 6, 2019October 6, 20193 3436 लखनऊ, 6 अक्टूबर। कवि उमेश पंकज के पहले कविता संग्रह ‘एक धरती मेरे अन्दर’ का आज यहां स्थानीय कैफ़ी आज़मी एकेडमी में लोकार्पण हुआ। कार्यक्रम...
कवितासाहित्य-संस्कृति उमेश पंकज का कविता पाठ: ‘मेहतर से नहीं कोई इंसान बेहतर’कौशल किशोरAugust 25, 2019August 25, 2019 by कौशल किशोरAugust 25, 2019August 25, 201903707 लखनऊ, 25 अगस्त। ‘वह पेड़ पर चढ़ कर/हरा बन गयी…..पेड़ से वह गिर गयी/रोप दी गयी मिट्टी में/वह फिर से उग रही है/उस तरह जिस...
कविताशख्सियत यथार्थ के अन्तर्विरोधों को उदघाटित करते कवि राजेन्द्र कुमारकौशल किशोरJuly 24, 2019July 24, 2019 by कौशल किशोरJuly 24, 2019July 24, 201902539 ( जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष, कवि और आलोचक राजेन्द्र कुमार (24/7/1943) आज 76 साल के हो गए. एक शिक्षक, कवि, आलोचक और एक ...
ख़बर कवि रामेश्वर प्रशान्त नहीं रहेकौशल किशोरJune 6, 2019June 6, 2019 by कौशल किशोरJune 6, 2019June 6, 20194 2836 क्रान्तिकारी कवि व एक्टिविस्ट रामेश्वर प्रशान्त का निधन आज 6 जून को सुबह साढ़े दस बजे बेगूसराय के गढ़हरा में हो गया। काफी अरसे से...
ख़बरसिनेमा प्रतिरोध का सिनेमा ने की दीपा धनराज की फिल्म ‘वी हैव नॉट कम हियर टु डाई’ की स्क्रीनिंगकौशल किशोरFebruary 18, 2019February 18, 2019 by कौशल किशोरFebruary 18, 2019February 18, 201902248 लखनऊ, 18 फरवरी। ‘प्रतिरोध का सिनेमा’ के सिलसिले का आरम्भ करते हुए 17 फरवरी को लखनऊ में डाक्यूमेन्ट्री फिल्म ‘वी हैव नाॅट कम हियर टू...
साहित्य-संस्कृति जसम की ओर से रचना पाठ ‘पंख खोलूं और उड़ चलूं आसमान में’कौशल किशोरJanuary 6, 2019January 14, 2019 by कौशल किशोरJanuary 6, 2019January 14, 20193 1265 लखनऊ: रचनाकार समय और समाज को अपने सृजन का विषय बनाता है। आम आदमी की पीड़ा व संघर्ष की अभिव्यक्ति आज की रचनाओं की विशेषता...
नाटकशख्सियत हम सब सफ़दर, हमको मारोकौशल किशोरJanuary 2, 2019January 2, 2019 by कौशल किशोरJanuary 2, 2019January 2, 201902577 कौशल किशोर नये साल का पहला दिन, चारों तरफ कोहरा फेैला था। हाड़ कंपाती ठंडी हवा हड्डियों को छेद रही थी।लखनऊ के गोमती नदी के...
कविता शंभु बादल का कवि कर्मकौशल किशोरOctober 15, 2018October 16, 2018 by कौशल किशोरOctober 15, 2018October 16, 201803030 हरेक कवि की अपनी जमीन होती है जिस पर वह सृजन करता है और उसी से उसकी पहचान बनती है। निराला, पंत, प्रसाद, महादेवी समकालीन...
कवितासाहित्य-संस्कृति ‘ रेख्ता के तुम ही नहीं हो उस्ताद ग़ालिब, कहते हैं अगले जमाने में कोई मीर भी था ’कौशल किशोरMarch 6, 2018July 7, 2020 by कौशल किशोरMarch 6, 2018July 7, 202005210 लखनऊ में ‘ब याद: मीर तकी मीर’ का आयोजन ‘रेख्ता के तुम ही नहीं हो उस्ताद ग़ालिब/कहते हैं अगले जमाने में कोई मीर भी था’. ...