समकालीन जनमत

Tag : फासीवाद

जनमत

नफरती  हिंसा और बर्बरता के स्रोत

जयप्रकाश नारायण 
2025 के आखिरी सप्ताह में देश भर में  हिंसा और क्रूरतापूर्ण घटनाओं की बाढ़ देखी गई।आज शांति चाहने वाले देशभक्त और लोकतांत्रिक नागरिकों के मन...
जनमत

मोहम्मद दीपक को सलाम , प्रतिरोध को सामूहिक बनाइये 

शांतम निधि
जनवरी 2026 के अंतिम दिनों में उत्तराखंड के एक छोटे से शहर कोटद्वार में जो हुआ, वह किसी स्थानीय विवाद की कहानी नहीं है। यह...
पुस्तक

रूसी क्रांति का लाल तारा

गोपाल प्रधान
लेफ़्टवर्ड, विजय प्रसाद, रेड स्टार ओवर द थर्ड वर्ल्ड ,...
जनमत

राहुल गाँधी के बयान के निहितार्थ और फासीवाद के खतरे

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण    विपक्ष के नेता (एलओपी) राहुल गांधी ने ऐसा क्यों कहा कि ‘मैं जानता हूं कि मैं आग से खेल रहा हूं’ और...
जनमत

राहुल सांकृत्यायन की जयंती पर परिचर्चा का हुआ आयोजन

समकालीन जनमत
आज़मगढ़ के रैदोपुर स्थित राहुल चिल्ड्रेन एकेडमी में राहुल सांकृत्यायन की जयंती पर परिचर्चा का आयोजन हुआ। ‘सनातन, बौद्ध धर्म और आज का समय(सन्दर्भः राहुल...
ज़ेर-ए-बहस

भारत में फ़ासीवाद की शिनाख्त: अगर अब नहीं, तो कब ?

सीपीआई(एम) के आगामी 24वें कांग्रेस से पहले पार्टी की पोलित ब्यूरो द्वारा जारी एक आंतरिक नोट, जिसे मीडिया में प्रमुखता से रिपोर्ट किया गया है,...
जनमत

ठन्डे उत्तरों के पीछे खौलते सवालों की कविता

समकालीन जनमत
मनीष आज़ाद मौमिता आलम की ही समकालीन कवि और दलित एक्टिविस्ट मीना कंडासामी कविता के बारे में कहती हैं कि यह वह जगह है, जहाँ...
जनमत

जसम सम्मेलन के बहाने कुछ बातें

दिवाकर मुक्तिबोध बस्तर के आदिवासियों के हितों के लिए वर्षों से संघर्षरत सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार ने जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय सम्मेलन में जो...
ज़ेर-ए-बहस

भारतीय समाज की विविधता के बारीक तंतुओं पर पर टिका लोकतंत्र ही बड़ी प्रतिरोधी ताकत है

जयप्रकाश नारायण  गुजरात के बड़गांम के विधायक जिग्नेश मेवानी को यह पता नहीं था, कि कोई प्रशिक्षित दस्ता उनके दरवाजे पर रात्रि के 11:30 बजे...
ज़ेर-ए-बहस

पांच राज्यों के चुनाव: लोकतंत्र और गणतंत्रात्मक भारत के समक्ष खड़े यक्ष प्रश्न

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण  2022 में हुए 5 राज्यों के चुनाव के परिणाम आ गये हैं। पंजाब में आप, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में भारतीय जनता पार्टी...
ज़ेर-ए-बहस

एक बड़े राजनीतिक बदलाव के मुहाने पर खड़ा भारत

हमारा देश भारत आज एक बड़े राजनीतिक बदलाव के मुहाने पर खड़ा है. आजादी के बाद देश में कई बड़े जन आन्दोलन हुए, जिन्होंने भारतीय...
ज़ेर-ए-बहसस्मृति

नेहरू और फासीवाद : संघ विरोध के मायने

मुकेश आनंद
स्मृति दिवस पर विशेष 1917 ईस्वी में रूस में सम्पन्न हुई मजदूरों की क्रांति ने सारी दुनिया के समाजों के प्रतिक्रियावादी तत्वों को भयभीत, चौकन्ना...
पुस्तकसाहित्य-संस्कृति

फ़ासीवाद से लड़ाई की एक दास्तान

गोपाल प्रधान
2019 में रैंडम हाउस से कैरोलीन मूरहेड की किताब ‘ ए हाउस इन द माउनटेन्स : द वीमेन हू लिबरेटेड इटली फ़्राम फ़ासिज्म ’ का...
ख़बरपुस्तक

फ़ासीवाद से लड़ाई

गोपाल प्रधान
(इस किताब को पढ़ते हुए लगातार महसूस होता रहा कि बात किसी अन्य देश की नहीं, अपने ही प्यारे भारत की हो रही है ।...
जनमतमीडिया

कार्पोरेट न्यूज मीडिया : धनतंत्र के लिए और धनतंत्र-फासीवाद की सेवा में

आनंद प्रधान
अधिकांश न्यूज चैनलों पर इन दिनों 24×7 अहर्निश “बहस”, “महाबहस”, “दंगल”, “ताल ठोंक के” और इस जैसे और कई चर्चाओं के प्राइम टाइम कार्यक्रमों में...
जनमत

गौरी लंकेश को अपने विचारों में जिंदा रखें

समकालीन जनमत
यह मातम मनाने का वक्त नहीं है. लंकेश के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम लंकेश की मुहिम को आगे बढ़ाएँ. ‘फेक न्यूज फैक्ट्री’...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

सत्ता संपोषित मौजूदा फासीवादी उन्माद प्रेमचंद की विरासत के लिए सबसे बड़ा खतरा:डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सुमन

समकालीन जनमत
लोकतंत्र, संविधान और साझी संस्कृति के नेस्तनाबूद करने की हो रही है गहरी साजिश-कल्याण भारती प्रेमचंद के सपनों के भारत से ही बचेगी हमारी साझी...
साहित्य-संस्कृतिस्मृति

प्रेमचंद ने राष्ट्रवाद की अवधारणा के फासीवादी चरित्र को काफी पहले ही देख लिया था : प्रो. रविभूषण

प्रेमचंद ने आज से काफी पहले ही आवारा पूंजी के ग्लोबल चरित्र और उसके साम्राज्यवादी गठजोड़ की शिनाख्त कर ली थी . उन्होंने राष्ट्रवाद की...
जनमत

फासीवाद का परीक्षण पूरे सवाब पर है

"अभी पूरी दुनिया में क्या चल रहा है इसे समझने के लिए हमें दो चीजों पर गौर करने की जरूरत है। पहला यह है कि...
जनमत

हिटलर और फ़ासीवाद का नया उभार

गोपाल प्रधान
सोवियत संघ के पतन और विश्व अर्थतंत्र में आए बदलावों के चलते तेजी से उभरी नवफ़ासीवादी सक्रियता फिलहाल अंतर्राष्ट्रीय राजनीति की सबसे खतरनाक प्रवृत्ति बन...
Fearlessly expressing peoples opinion