Tag : फासीवाद

ज़ेर-ए-बहस

एक बड़े राजनीतिक बदलाव के मुहाने पर खड़ा भारत

हमारा देश भारत आज एक बड़े राजनीतिक बदलाव के मुहाने पर खड़ा है. आजादी के बाद देश में कई बड़े जन आन्दोलन हुए, जिन्होंने भारतीय...
ज़ेर-ए-बहस स्मृति

नेहरू और फासीवाद : संघ विरोध के मायने

मुकेश आनंद
स्मृति दिवस पर विशेष 1917 ईस्वी में रूस में सम्पन्न हुई मजदूरों की क्रांति ने सारी दुनिया के समाजों के प्रतिक्रियावादी तत्वों को भयभीत, चौकन्ना...
पुस्तक साहित्य-संस्कृति

फ़ासीवाद से लड़ाई की एक दास्तान

गोपाल प्रधान
2019 में रैंडम हाउस से कैरोलीन मूरहेड की किताब ‘ ए हाउस इन द माउनटेन्स : द वीमेन हू लिबरेटेड इटली फ़्राम फ़ासिज्म ’ का...
ख़बर पुस्तक

फ़ासीवाद से लड़ाई

गोपाल प्रधान
(इस किताब को पढ़ते हुए लगातार महसूस होता रहा कि बात किसी अन्य देश की नहीं, अपने ही प्यारे भारत की हो रही है ।...
जनमत मीडिया

कार्पोरेट न्यूज मीडिया : धनतंत्र के लिए और धनतंत्र-फासीवाद की सेवा में

आनंद प्रधान
अधिकांश न्यूज चैनलों पर इन दिनों 24×7 अहर्निश “बहस”, “महाबहस”, “दंगल”, “ताल ठोंक के” और इस जैसे और कई चर्चाओं के प्राइम टाइम कार्यक्रमों में...
जनमत

गौरी लंकेश को अपने विचारों में जिंदा रखें

समकालीन जनमत
यह मातम मनाने का वक्त नहीं है. लंकेश के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम लंकेश की मुहिम को आगे बढ़ाएँ. ‘फेक न्यूज फैक्ट्री’...
शख्सियत साहित्य-संस्कृति

सत्ता संपोषित मौजूदा फासीवादी उन्माद प्रेमचंद की विरासत के लिए सबसे बड़ा खतरा:डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सुमन

समकालीन जनमत
लोकतंत्र, संविधान और साझी संस्कृति के नेस्तनाबूद करने की हो रही है गहरी साजिश-कल्याण भारती प्रेमचंद के सपनों के भारत से ही बचेगी हमारी साझी...
साहित्य-संस्कृति स्मृति

प्रेमचंद ने राष्ट्रवाद की अवधारणा के फासीवादी चरित्र को काफी पहले ही देख लिया था : प्रो. रविभूषण

प्रेमचंद ने आज से काफी पहले ही आवारा पूंजी के ग्लोबल चरित्र और उसके साम्राज्यवादी गठजोड़ की शिनाख्त कर ली थी . उन्होंने राष्ट्रवाद की...
जनमत

फासीवाद का परीक्षण पूरे सवाब पर है

"अभी पूरी दुनिया में क्या चल रहा है इसे समझने के लिए हमें दो चीजों पर गौर करने की जरूरत है। पहला यह है कि...
जनमत

हिटलर और फ़ासीवाद का नया उभार

गोपाल प्रधान
सोवियत संघ के पतन और विश्व अर्थतंत्र में आए बदलावों के चलते तेजी से उभरी नवफ़ासीवादी सक्रियता फिलहाल अंतर्राष्ट्रीय राजनीति की सबसे खतरनाक प्रवृत्ति बन...

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