पुस्तक उषा राय के कविता संग्रह ‘भीमा कोरेगाँव तथा अन्य कविताएँ’ की पुस्तक समीक्षासमकालीन जनमतAugust 24, 2025August 24, 2025 by समकालीन जनमतAugust 24, 2025August 24, 2025084 पवन करण ●यह कास का फूल है इसके पत्ते हाथ चीर देते हैं घाव भले ही भर जाये पर कसक रह जाती है बड़ा खुद्दार...
पुस्तक हृषीकेश सुलभ के उपन्यास ‘दाता पीर’ की पुस्तक समीक्षासमकालीन जनमतAugust 3, 2025August 3, 2025 by समकालीन जनमतAugust 3, 2025August 3, 20250118 पवन करण दाता पीर एक सुनार का बेटा था। चाँद के टुकड़े जैसा सुंदर। उसने आवाज़ लगाई कि कुछ गढ़वा लो, कुछ बनवा लो। उसने...
पुस्तक ‘गहन है यह अंधकारा’ की पुस्तक समीक्षासमकालीन जनमतJuly 27, 2025July 27, 2025 by समकालीन जनमतJuly 27, 2025July 27, 2025082 पवन करण कोई भी भाषा हो वह दुर्जनों की ज़बान से बोले जाते समय कसमसाती होगी। जो ग़लत और झूठ बोला जा रहा है और...
पुस्तक पवन करण के कविता संग्रह ‘स्त्री मुग़ल’ की पुस्तक समीक्षासमकालीन जनमतJuly 20, 2025July 22, 2025 by समकालीन जनमतJuly 20, 2025July 22, 20250106 अलका बाजपेयी ‘स्त्री मुगल’ ( राधाकृष्ण प्रकाशन, 2023) पवन करण जी की 100 कविताओं का एक संग्रह है जो कि मुग़ल साम्राज्य के भीतर रहने...
पुस्तक विमल कुमार के काव्य संग्रह ‘मृत्यु की परिभाषा बदल दो’ की पुस्तक समीक्षासमकालीन जनमतJuly 13, 2025July 13, 2025 by समकालीन जनमतJuly 13, 2025July 13, 2025061 पवन करण इस दौर में कवि विमल कुमार की सक्रिय रचनात्मक निरंतरता उल्लेखनीय और आश्वस्तिकारी है। ‘सपने में एक औरत’ से बातचीत से बरास्ते ‘जंगल...
पुस्तक सुमेर सिंह राठौर की डायरी ‘बंजारे की चिठ्ठियाँ’ की पुस्तक समीक्षासमकालीन जनमतJuly 6, 2025July 7, 2025 by समकालीन जनमतJuly 6, 2025July 7, 2025098 पवन करण चिट्ठियाँ जो ख़ुद को भेजनी थीं, अपने डरों से लड़ने की कोशिश में, बंजारे की चिट्ठियाँ बन गईं- ‘बंजारे की चिट्ठियाँ’ पढ़ने के...
पुस्तक मुस्तफ़ा ख़ान के काव्यसंग्रह ‘पत्थरों की भाषा’ की पुस्तक समीक्षासमकालीन जनमतJune 29, 2025June 29, 2025 by समकालीन जनमतJune 29, 2025June 29, 2025047 पवन करण भाषा पत्थरों की मगर आहत नहीं करती किसी को: मुस्तफ़ा ख़ान की कविताएँ मुस्तफ़ा ख़ान लंबे समय से कविताएँ लिख रहे हैं। समय-समय...
पुस्तक शांति नायर के कविता संग्रह ‘ज्यामिति’ की पुस्तक समीक्षाउमा रागJune 15, 2025 by उमा रागJune 15, 2025062 पवन करण जिनके पास जितने नुकीले कोण हैं वे उतने ही अधिक पुरुष हैं। शांति नायर की कविताएँ बातचीत में भाग लेने पहुँचती हैं, ज़रा...
पुस्तक बोधिसत्व के कविता संग्रह ‘अयोध्या में कालपुरुष’ की पुस्तक समीक्षासमकालीन जनमतJune 8, 2025June 8, 2025 by समकालीन जनमतJune 8, 2025June 8, 2025063 पवन करण जो प्रेम हठ नहीं करता वो बच नहीं सकता! ए.के. रामानुजन की तीन सौ रामायण निबंध-पुस्तक जिसे रामानुजन ने पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय में...
पुस्तक भाषा सिंह के कविता संग्रह योनि-सत्ता संवाद की पुस्तक समीक्षासमकालीन जनमतJune 1, 2025June 1, 2025 by समकालीन जनमतJune 1, 2025June 1, 20250157 पवन करण मेरे आदमी नहीं हो तुम, मेरे आंसू नहीं ढलकते हैं तुम्हारे गालों पर…. भाषा सिंह की कविताएँ पढ़ने की प्रक्रिया में मन में...
पुस्तक प्रिया वर्मा के काव्य संग्रह ‘स्वप्न के बाहर पाँव’ की पुस्तक समीक्षासमकालीन जनमतMay 25, 2025May 25, 2025 by समकालीन जनमतMay 25, 2025May 25, 2025070 पवन करण ●गिनती में रहने के लिए दुर्घटनाओं में शरीक़ होना क्यों है ज़रूरी? ●यह भी क्या मामूली सुख है, कि गए हुए की परछाईं...
पुस्तक सविता भार्गव के कविता संग्रह ‘थमी हुई बारिश में दोपहर’ की पुस्तक समीक्षासमकालीन जनमतMay 11, 2025May 11, 2025 by समकालीन जनमतMay 11, 2025May 11, 2025086 पवन करण मैं चुप रहकर समय को चीख़ में बदल देती हूँ.. कवि सविता भार्गव अपने एकांत में निवास करती हैं। एकांत ही उनका प्रकाश...
पुस्तक श्रुति कुशवाहा के कविता संग्रह ‘सुख को भी दुःख होता है’ की पुस्तक समीक्षासमकालीन जनमतMay 4, 2025May 4, 2025 by समकालीन जनमतMay 4, 2025May 4, 20250102 पवन करण इन दिनों मर्जियों का शासन है….. मेरा भोजन, मेरे कपड़े मेरी आस्था पर भारी है ….उनकी मर्जी कवि श्रुति कुशवाहा के कविता संग्रह...
पुस्तक ज्योति रीता के कविता संग्रह ‘अतिरिक्त दरवाज़ा’ की पुस्तक समीक्षासमकालीन जनमतApril 27, 2025April 27, 2025 by समकालीन जनमतApril 27, 2025April 27, 20250118 पवन करण स्त्रियों को तो बिगड़ना ही था, स्त्रियों ने बिगड़ने में बहुत वक्त़ लगा दिया.. स्त्री कितनी दूर तक होती है? खुद को...
पुस्तक संजीव कौशल के कविता संग्रह ‘फूल तारों के डाकिए हैं’ की पुस्तक समीक्षासमकालीन जनमतApril 20, 2025April 20, 2025 by समकालीन जनमतApril 20, 2025April 20, 2025087 पवन करण आदमी के अपराध औरत की भेंट चाहते हैं यह सबक वह पिट-पिटकर सीख रही है- संजीव कौशल की कविता की स्त्रियों से (...
पुस्तक रूपम मिश्र के काव्य संग्रह ‘एक जीवन अलग से’ की समीक्षासमकालीन जनमतApril 13, 2025April 13, 2025 by समकालीन जनमतApril 13, 2025April 13, 2025091 पवन करण एक अभुआता समाज कायनात की सारी बुलबुलों की गर्दन मरोड़ रहा है….! रुपम मिश्र की कविताएँ हिंदी कविता की समृद्धि की सूचक हैं।...
कविता पवन करण की कविताएँ साहस एवं सजगता का प्रतीक हैंसमकालीन जनमतJune 30, 2024July 2, 2024 by समकालीन जनमतJune 30, 2024July 2, 20240220 अंकिता रासुरी पवन करण की कविताओं में मौजूदा समाज एवं उसकी विडंबनाएँ मौजूद हैं। कैसे समाज बिखर रहा है बल्कि ऐसा जानबूझकर किया जा रहा...