समकालीन जनमत

Category : जनमत

जनमत

वैज्ञानिक-चित्त की खोज में पूरे जीवन बेचैन रहने वाला एक शिक्षाविद्

समकालीन जनमत
यशपाल बराबर इस बात को रेखांकित करते थे कि देश में सभी अपने बच्चों को विज्ञान पढ़ाना चाहते तो हैं किंतु वैज्ञानिक दृष्टि नहीं देना...
जनमत

फासीवाद के खिलाफ संघर्ष में मार्क्स के विचार से बेहतर विचार नहीं- दीपंकर भट्टाचार्य

समकालीन जनमत
क्रोनी पूंजीवाद, सांप्रदायिक विभाजन और मनुवादी के बीच गठजोड़ है. लिचिंग स्थाई परिघटना बना दी गई है. लिचिंग करने वालों को पता है कि उन्हें...
जनमत

सभ्यता का परदा हटातीं हैं आर. चेतन क्रांति की कवितायेँ

उमा राग
2004 में आए अपने पहले कविता  संग्रह ‘शोकनाच’ के साथ आर चेतन क्रांति ने इक्कीसवीं सदी की दुनिया के पेच शायद सबसे करीने से पकड़े।...
जनमत

स्वामी अग्निवेश पर हमले के विरोध में लखनऊ, रांची, गोरखपुर में विरोध प्रदर्शन

समकालीन जनमत
जन आंदोलनों के सम्मानित नेता स्वामी अग्निवेश पर झारखण्ड में हुए प्राणघातक हमले का जगह-जगह प्रतिरोध हो रहा है. विभिन्न संगठनों ने लखनऊ, रांची और...
जनमत

भीड़-दंड को प्रोत्साहित करता राज्य तंत्र

समकालीन जनमत
लिंचिंग में शरीक अधिकांश के लिए यह दंडमुक्त अपराध है. राज्यतंत्र ने इस दोहरेपन के साथ तालमेल बिठा लिया है. विभिन्न राजनीतिक संगठनों, सोशल मीडिया...
जनमत

भीड़ हमला-हत्या की घटनाएँ निर्देशित घटनाएँ हैं

समकालीन जनमत
इन निर्देशित गिरोहों को बाकायदे हत्या की मशीन में तब्दील किया जा रहा है. गौरी लंकेश के हत्यारे का बयान इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिसमें...
जनमत

फासीवाद का परीक्षण पूरे सवाब पर है

"अभी पूरी दुनिया में क्या चल रहा है इसे समझने के लिए हमें दो चीजों पर गौर करने की जरूरत है। पहला यह है कि...
जनमत

जाति, धर्म और व्यवस्था की कोख से पैदा हो रही मॉब लिंचिंग जैसी बर्बर संस्कृति

गरीब और कमजोर पर जुल्म करने की प्रवृत्ति का फैलाव इसलिए बढ़ा है कि न्यायिक व्यवस्था ठीक से काम नहीं कर रही है. जब तक...
जनमत

बथानी टोला जनसंहार : न्याय का इंतजार कब तक ?

चंदन
22 साल पहले 11 जुलाई, 1996 को दो बजे दिन में रणवीर सेना के कोई 50-60 हथियारबन्द लोगों ने बथानी टोला को घेर कर हमला...
जनमत

पेप्सी को सण्डीला में पानी लूटने की छूट क्यों

ऐसा अनुमान है कि पेप्सी संयंत्र 5 से 15 लाख लीटर पानी रोजाना जमीन के नीचे से निकाल रहा है. एक लीटर शीतल पेय बनाने...
जनमत

सारण के स्कूल में छात्रा के साथ सात महीने से गैंग रेप

समकालीन जनमत
सारण जिले के एकमा थाने क्षेत्र के परसागढ़ स्थित एक प्राइवेट स्कूल में 10 वीं क्लास की एक छात्रा के साथ सात महीने से लगातार...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति

प्रेम के निजी उचाट से लौटती स्त्री की कविता : विपिन चौधरी की कवितायेँ

उमा राग
  विपिन की कवितायेँ लगातार बाहर-भीतर यात्रा करती हुईं एक ऐसी आंतरिकता को खोज निकालती हैं जो स्त्री का अपना निजी उचाट भी है और दरख्तों,...
जनमतशिक्षा

देशी-विदेशी पूँजी के मुनाफे को बढ़ाने के लिए उच्च शिक्षा के ऊपर लगातार हमले होंगे

समकालीन जनमत
उच्च शिक्षा में हो रहे बदलावों को मात्र भाजपा-कांग्रेस के नजरिए से नहीं, बल्कि शासक वर्ग के नजरिए से देखना ही ठीक होगा. तभी हम...
जनमत

हजारीबाग : बागों से कंक्रीट में बदलता शहर

समकालीन जनमत
हजारीबाग के पर्यावरण की बात है, अब पहले जैसी बात नहीं रही. यह शहर कंक्रीट में बदलता जा रहा है. इस बार की यात्रा में...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति

संजीव कौशल की कविताएँ : प्रतिगामी विचारों का विश्वसनीय प्रतिपक्ष

उमा राग
जागृत राजनीतिक चेतना, समय और समाज की विडम्बनाओं की गहरी समझ और भाषा की कलात्मक पारदर्शिता के कारण संजीव कौशल की कवितायेँ नयी सदी की युवा...
जनमत

देवदरबार जागीर मठ और पाकिस्तानी मुरीद

समकालीन जनमत
बणदेवनाथ जी का कहना था कि आमतौर पर दोनों मुल्क के लोग बहुत प्रेमी है बस बहुत कम लोग है जो हमलोगों के बीच नफरत...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति

कबीर और नागार्जुन की जयंती से जन एकता सांस्कृतिक यात्रा आरम्भ

समकालीन जनमत
बेगूसराय. आज ज्येष्ठ पूर्णिमा दिनांक 28/06/2018 को जन संस्कृति मंच की ओर से कबीर और आधुनिक कबीर नागार्जुन की सम्मिलित जयंती मनायी गयी। इस जयंती...
कविताग्राउन्ड रिपोर्टजनमतसाहित्य-संस्कृति

अनुपम सिंह की कविताओं पर जसम की घरेलू गोष्ठी की रपट

राम नरेश राम
अनुपम की कविताएँ अपने वक्त, अपने समाज और अपनी काया के अनुभव से उपजी हुई कविताएँ हैं- योगेंद्र आहूजा पिछली 23 जून 2018 को जसम...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति

‘समय है सम्भावना का’ : सत्ता के मौन की पहचान है

राम नरेश राम
जगदीश पंकज जी का कविता संग्रह ‘समय है सम्भावना का’ इसी वर्ष आया है. जगदीश पंकज जी नवगीतकार हैं. दलित साहित्य में नवगीत की कोई...
जनमतशख्सियत

खैनी खिलाओ न यार! /उर्फ / मौत से चुहल (सखा, सहचर, सहकर्मी, कामरेड महेश्वर की एक याद)

रामजी राय
अपने प्रियतर लोगों- कृष्णप्रताप (के.पी.), गोरख, कामरेड विनोद मिश्र, महेश्वर पर चाहते हुए भी आज तक कुछ नहीं लिख सका। पता नहीं क्यों? इसकी वज़ह...
Fearlessly expressing peoples opinion