समकालीन जनमत

Category : जनमत

जनमतपुस्तक

स्त्री रचनाशीलता को समझने की एक कोशिश

समकालीन जनमत
रेखा सेठी स्त्री लेखन, स्त्री की चिंतनशील मनीषा के विकास का ही ग्राफ है जिससे सामाजिक इतिहास का मानचित्र गढ़ा जाता है और जेंडर तथा...
जनमत

शासक वर्ग को जेएनयू दुश्मन क्यों लगता है ?

मीनल
बीते सात-आठ वर्षों में हम सभी ने जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी यानि जेएनयू का नाम हर तरह के अच्छी-बुरी ख़बरों में लगातार सुना है. हममें से...
जनमतज़ेर-ए-बहस

क्या धर्मनिरपेक्ष राज्य अपनी देखरेख में मंदिर बनवायेगा

राम पुनियानी
छह दिसंबर 1992 की तरह, 9 नवम्बर 2019 भी भारत के इतिहास में एक मील का पत्थर बन गया है. छह दिसंबर को दिन-दहाड़े जो...
जनमत

नागरिकों से देश बनता है, नागरिकता छीनने वाली सरकार कौन होती है – कन्नन

पटना के गांधी संग्राहालय में नागरिक संवाद के आयेाजन में बोले कन्नन गोपीनाथन एनआरसी, नागरिकता संशोधन विधयेक व डिटेंशन कैंपों की हालत पर एआईपीएफ के...
जनमतशख्सियतस्मृति

“यह थी भूमिका हम-तुम मिले थे जब” मुक्तिबोध स्मरण (जन्मदिन 13 नवम्बर)

रामजी राय
मुक्तिबोध और उनकी कविता के बारे में लोग कहते हैं कि वो विकल-बेचैन, छटपटाते कवि हैं. लेकिन देखिये तो दरअसल, मुक्तिबोध कविता की विकलता के...
जनमत

दिल्ली पुलिस के नाम खुला पत्र

इन्द्रेश मैखुरी
प्यारी दिल्ली पुलिस और उसके बहादुर जवानों, जे.एन.यू. के छात्र-छात्राओं पर लाठी भाँजते,उन्हें खींचते-घसीटते और उन पर पानी-प्रहार करते आपकी तस्वीरें देखी. क्या मुस्तैदी और...
जनमतज़ेर-ए-बहस

अयोध्‍या में विवादित भूमि के मालिकाने के मुकदमे में सर्वोच्‍च न्‍यायालय के फैसले पर भाकपा(माले) पोलितब्‍यूरो का बयान

समकालीन जनमत
नई दिल्‍ली 9 नवम्‍बर. यह महत्‍वपूर्ण है कि अयोध्‍या में विवादित स्‍थल पर सर्वोच्‍च न्‍यायालय का फैसला किसी भी तरह से 6 दिसम्‍बर 1992 को...
कविताजनमत

वीरेनियत 4: सन्नाटा छा जाए जब मैं कविता सुनाकर उठूँ

समकालीन जनमत
पंकज चतुर्वेदी ‘वीरेनियत-4’ के अन्तर्गत इंडिया हैबिटेट सेण्टर, नयी दिल्ली में शुभा जी का कविता-पाठ सुना। उनकी कविताएँ समकालीन परिस्थितियों से उपजे इतने गहन तनाव...
कविताजनमत

वीरेनियत 4: अनसुनी पर ज़रूरी आवाज़ों का मंच

समकालीन जनमत
अदनान कफ़ील ‘दरवेश’ कल ‘वीरेनियत’ के चौथे संस्करण में जाने का मौक़ा मिला। दिल्ली की आब-ओ-हवा में इस वक़्त ज़हर की तासीर घुली हुई है।कुहेलिका...
कविताजनमत

वीरेनियत 4: जहाँ कविता के बाद का गहन सन्नाटा बजने लगा

समकालीन जनमत
आशुतोष कुमार दिन वैसे अच्छा नहीं था। दिल्ली आसपास का दम काले धुंए में घुट रहा था। छुट्टियों के कारण बहुत से दोस्त शहर से...
जनमत

झारखंड में भाजपा सरकार : कुशासन, भ्रष्टाचार और जन-विरोधी विकास के पांच साल

रघुवर दास की नेतृत्व वाली भाजपा सरकार झारखंड की पहली सरकार है जिसने अपने पांच सालों का समय पूरा किया. यह एक मौका था राज्य...
ख़बरजनमत

झारखंड जनाधिकार महासभा ने स्टैन स्वामी पर कुर्की कार्यवाही की निंदा की

समकालीन जनमत
21 अक्टूबर को खूंटी पुलिस ने रांची के निकट नामकुम में स्थित बगाइचा परिसर में 83-वर्षीय स्टैन स्वामी के निवास पर कुर्की कार्रवाई की. पुलिस...
जनमत

आरएसएस/भाजपा भारत-रत्न सावरकर भारत छोड़ो आंदोलन कुचलने में अंग्रेज़ों के साथ थे

शम्सुल इस्लाम
  अंग्रेज़ों भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत 7 अगस्त 1942 को अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने बम्बई में अपनी बैठक में एक क्रांतिकारी प्रस्ताव पारित...
जनमतविज्ञान

ब्रह्मांड की समझ बेहतर बनाने के लिए हुए काम पर मिला 2019 का नोबेल पुरस्कार

समकालीन जनमत
संयुक्त पुरस्कार में जेम्स पीबल्स हिस्सेदार हैं, जिन्होंने ब्रह्मांड और आकाशगंगाओं के बनने पर ठोस अंदाजे लगाए। वहीं माइकल मेयर और डिडिएर क्यूलॉज को सूर्य...
कविताजनमत

श्रम के सौंदर्य के कवि हैं अनवर सुहैल

समकालीन जनमत
ज़ीनित सबा अनवर सुहैल समकालीन हिंदी साहित्य के प्रमुख कथाकार होने के साथ साथ महत्वपूर्ण कवि भी हैं. उन्हें लोग विशेष रूप से ‘गहरी जड़ें’ कहानी संग्रह और ‘पहचान’ उपन्यास...
जनमतपुस्तक

मार्क्स और आधुनिक समाज

गोपाल प्रधान
2019 में मंथली रिव्यू प्रेस से माइकेल हाइनरिह की 2018 में छपी जर्मन किताब का अंग्रेजी अनुवाद ‘कार्ल मार्क्स ऐंड द बर्थ आफ़ माडर्न सोसाइटी:...
कविताजनमत

स्त्री जीवन की पीड़ाओं के नॉर्मलाइज़ होते जाने का विरोध हैं अपर्णा की कविताएँ

समकालीन जनमत
संजीव कौशल अपर्णा अनेकवर्णा से मेरा परिचय उनकी कविताओं के रास्ते ही है और यह रास्ता इतना अलग और आकर्षक है कि यहां से गुज़रते...
कविताजनमत

अंधेरे के ख़िलाफ़ ज़माने को आगाह करती हैं मुकुल सरल की कविताएँ

समकालीन जनमत
गीतेश सिंह अभी कुछ सप्ताह पहले जब हम त्रिलोचन को याद कर रहे थे, तो उनकी एक कविता लगातार ज़ेहन में चलती रही -कविताएँ रहेंगी तो/ सपने...
जनमत

साइकिल चिंतन : विजय कुमार

समकालीन जनमत
  सड़क पर तरह-तरह के वाहनों की एक सामूहिक गति होती है – अक्सर खौफनाक और हिंसक गति. अंधाधुंध गति और रेल-पेल के बीच एक...
जनमतशख्सियतस्मृति

गांधी और उनके हत्यारे

इन्द्रेश मैखुरी
आज जब महात्मा गांधी की पैदाइश के 150 साल पूरे हो रहे हैं,तब लगता है कि एक चक्र पूरा हो कर दुष्चक्र की ओर बढ़...
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