पुस्तक ज्योति रीता के कविता संग्रह ‘अतिरिक्त दरवाज़ा’ की पुस्तक समीक्षासमकालीन जनमतApril 27, 2025April 27, 2025 by समकालीन जनमतApril 27, 2025April 27, 20250114 पवन करण स्त्रियों को तो बिगड़ना ही था, स्त्रियों ने बिगड़ने में बहुत वक्त़ लगा दिया.. स्त्री कितनी दूर तक होती है? खुद को...
जनमत ठन्डे उत्तरों के पीछे खौलते सवालों की कवितासमकालीन जनमतFebruary 9, 2025February 10, 2025 by समकालीन जनमतFebruary 9, 2025February 10, 20250504 मनीष आज़ाद मौमिता आलम की ही समकालीन कवि और दलित एक्टिविस्ट मीना कंडासामी कविता के बारे में कहती हैं कि यह वह जगह है, जहाँ...
पुस्तक विनय सौरभ का कविता संग्रह ‘बख़्तियारपुर’ स्मृतियों के माध्यम से वर्तमान को परखने की एक सफल कोशिश हैसमकालीन जनमतJune 23, 2024June 23, 2024 by समकालीन जनमतJune 23, 2024June 23, 20240511 प्रज्ञा गुप्ता आज के समय में जब संबंधों की उष्मा के मायने कम हो रहे हैं; हमारी संवेदना के लिए घटनाएं मात्र एक खबर...
जनमत खोई चीज़ों का शोक: जीवन की स्मृतियों से झकझोर खायी कविताएँसमकालीन जनमतFebruary 6, 2022February 6, 2022 by समकालीन जनमतFebruary 6, 2022February 6, 2022075 अनुपम सिंह समकालीन हिंदी कविता में सविता सिंह प्रकृति के क़रीब रहने वाली कवियों में से हैं। सविता सिंह प्रकृति के प्रत्येक क्रियाकलाप को अनिवार्य...
जनमतपुस्तक सत्य का अनवरत अन्वेषण हैं राकेश रेणु के ‘इसी से बचा जीवन’ की कविताएँसुशील मानवJune 14, 2020June 15, 2020 by सुशील मानवJune 14, 2020June 15, 20204 3664 कविता क्या है और इसका काम क्या है- इस पर अनेक बातें हैं, अनेक परिभाषाएं हैं। लेकिन मौजूदा समय सत्य पर संकट का समय...
पुस्तक गाथा इक सूरमे दी : जन नायक कामरेड बलदेव सिंह मान पर एक खोज खोज पूर्ण पुस्तकसमकालीन जनमतJune 12, 2020June 14, 2020 by समकालीन जनमतJune 12, 2020June 14, 20203 3811 सुखदर्शन नत्त पंजाब के नक्सलवादी आन्दोलन से उभर कर सामने आये जन नायक और राजनैतिक नेताओं की पहली पंक्ति में आने वाले कामरेड बलदेव सिंह...
पुस्तक ‘अस्थि फूल’: यात्रा एक अंधी सुरंग कीकैलाश बनवासीApril 7, 2020April 8, 2020 by कैलाश बनवासीApril 7, 2020April 8, 202005185 ‘अस्थि फूल ’ उपन्यास पूरा पढ़ लेने के बाद, बल्कि पूरा पढ़ने के दौरान,पृष्ठ-दर-पृष्ठ एक बात का तीव्र से तीव्रतर अहसास होता रहा कि इसे...
पुस्तक फ़ासीवाद की ओर यात्रा: चौराहे पर अमेरिकागोपाल प्रधानAugust 25, 2018August 25, 2018 by गोपाल प्रधानAugust 25, 2018August 25, 20189 2398 बड़े व्यवसायी, तानाशाह सरकार और फौजी ढांचे का यही संयुक्त मोर्चा सभी देशों में फ़ासीवादी शासन के उभार के वक्त नजर आया है. इसके अलावे...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति ‘समय है सम्भावना का’ : सत्ता के मौन की पहचान हैराम नरेश रामJune 25, 2018June 25, 2018 by राम नरेश रामJune 25, 2018June 25, 20186 2729 जगदीश पंकज जी का कविता संग्रह ‘समय है सम्भावना का’ इसी वर्ष आया है. जगदीश पंकज जी नवगीतकार हैं. दलित साहित्य में नवगीत की कोई...