मीडिया गुरिल्ला इमरजेंसी के दौर में मीडिया : मध्यप्रदेश की कहानीजावेद अनीसSeptember 27, 2018September 28, 2018 by जावेद अनीसSeptember 27, 2018September 28, 201802858 भारत में मीडिया की विश्वसनीयता लगातार गिरी है, 2018 विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत 180 देशों की सूची में 2 अंक नीचे खिसकर...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति जबरदस्त कवि, बड़े सम्पादक, सिनेमा और संगीत के अध्येता, गंभीर पाठक, भाषाओं और यारों के धनी विष्णु खरे की यादसमकालीन जनमतSeptember 26, 2018 by समकालीन जनमतSeptember 26, 20183 2628 अशोक पाण्डे अलविदा विष्णु खरे – 1 जबरदस्त कवि, बड़े सम्पादक, सिनेमा और संगीत के अध्येता, गंभीर पाठक, भाषाओं और यारों के धनी उस आदमी...
जनमतसिनेमास्मृति कल्पना लाज़मी के सिनेमा में एक सशक्त स्त्री की छवि उभरकर सामने आती हैसमकालीन जनमतSeptember 25, 2018September 25, 2018 by समकालीन जनमतSeptember 25, 2018September 25, 201802758 यूनुस खान कल्पना लाजमी का जाना हिंदी फिल्म जगत का एक बड़ा नुकसान है। बहुत बरस पहले एक सीरियल आया था ‘लोहित किनारे’। ये...
मीडिया पत्रकारों के उत्पीड़न के ख़िलाफ़ जनमत तैयार करने के संकल्प के साथ CAAJ कन्वेंशन का समापनसमकालीन जनमतSeptember 25, 2018September 25, 2018 by समकालीन जनमतSeptember 25, 2018September 25, 201801890 नई दिल्ली. दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन हॉल में 22-23 सितंबर को आयोजित कमेटी अगेन्स्ट असॉल्ट ऑन जर्नलिज़्म (CAAJ) सम्मेलन पत्रकारों के उत्पीड़न के ख़िलाफ़ देश भर...
शख्सियतसिनेमा अभिव्यक्ति के प्रति ईमानदार एक रचनाकार की त्रासदी ‘मंटो’समकालीन जनमतSeptember 23, 2018 by समकालीन जनमतSeptember 23, 20185 2913 अमरेंद्र नाथ त्रिपाठी ‘मंटो’ बायोपिक फिल्म की बहुत समय से प्रतीक्षा कर रहा था। समय-समय पर आने वाले ट्रेलर या वीडियो के टुकड़े इंतिजार को...
जनमतसाहित्य-संस्कृति जनगीतों का सामाजिक सन्दर्भसमकालीन जनमतSeptember 23, 2018September 24, 2018 by समकालीन जनमतSeptember 23, 2018September 24, 201803636 डॉ. राजेश मल्ल साहित्य अपने अन्तिम निष्कर्षों में एक सामाजिक उत्पाद होता है। कत्र्ता के घोर उपेक्षा के बावजूद समय और समाज की सच्चाई...
जनमतशख्सियतसिनेमा ज़मीर को हर शै से ऊपर रखने वाले मंटोसमकालीन जनमतSeptember 23, 2018 by समकालीन जनमतSeptember 23, 201803436 अखिलेश प्रताप सिंह. खुदा ज्यादा महान हो सकता है लेकिन मंटो ज्यादा सच्चे दिखते हैं और उससे भी ज्यादा मनुष्य, क्योंकि मंटो को सब कुछ...
कविताजनमतस्मृति चार आयामों का एक कवि विष्णु खरेउमा रागSeptember 23, 2018September 23, 2018 by उमा रागSeptember 23, 2018September 23, 201804556 मंगलेश डबराल यह बात आम तौर पर मुहावरे में कही जाती है कि अमुक व्यक्ति के न रहने से जो अभाव पैदा हुआ है...
स्मृति वैज्ञानिक दृष्टि और आलोचनात्मक यथार्थ वाले विचार संपन्न कवि थे विष्णु खरे: आलोक धन्वासमकालीन जनमतSeptember 23, 2018 by समकालीन जनमतSeptember 23, 201803080 विष्णु खरे जनता के आक्रोश के संगठित होने की कामना करने वाले कवि हैं। उनकी कविताएं जनसाधारण के जीवन के दृश्यचित्रों की तरह हैं। वर्णनात्मकता...
चित्रकला भारतीय चित्रकला और ‘कथा ‘ : 2अशोक भौमिकSeptember 22, 2018December 9, 2019 by अशोक भौमिकSeptember 22, 2018December 9, 20196 3039 हमने देखा की जिस समाज में दृश्य को 'पढ़ना' सिखाया जाता हो वहाँ कथाओं का 'चित्रण' ही हो सकता है, कला का सृजन नहीं। चित्रकार...
चित्रकला कामरेड चंद्रशेखर का एक चित्रसमकालीन जनमतSeptember 20, 2018 by समकालीन जनमतSeptember 20, 20185 2187 आज कामरेड चंद्रशेखर का जन्म दिन है. सत्तर के दशक में बनारस के कुछ प्रतिभाशाली चित्रकारों ने नक्सलवादी विचारधारा के करीब रहकर बहुत महत्वपूर्ण...
स्मृति चंद्रशेखर : नई पीढ़ी का नायकप्रणय कृष्णSeptember 20, 2018September 20, 2018 by प्रणय कृष्णSeptember 20, 2018September 20, 201810 2976 चंद्रशेखर की सबसे प्रिय किताब थी लेनिन की पुस्तक ‘क्या करें’। नेरुदा के संस्मरण भी उन्हें बेहद प्रिय थे। अकसर अपने भाषणों में वे पाश...
ख़बरशख्सियतसाहित्य-संस्कृति विष्णु खरे: बिगाड़ के डर से ईमान का सौदा नहीं कियामृत्युंजयSeptember 19, 2018September 19, 2018 by मृत्युंजयSeptember 19, 2018September 19, 201813240 विष्णु जी नहीं रहे। हिंदी साहित्य संसार ने एक ऐसा बौद्धिक खो दिया, जिसने ‘बिगाड़ के डर से ईमान’ की बात कहने से कभी भी...
कविताजनमतस्मृति जीवन को एक कार्निवल के रूप में देखने वाला कवि कुँवर नारायणसमकालीन जनमतSeptember 19, 2018September 19, 2018 by समकालीन जनमतSeptember 19, 2018September 19, 201804274 कमोबेश दो शताब्दियों की सीमा-रेखा को छूने वाली कुँवर नारायण की रचना-यात्रा छह दशकों से भी अधिक समय तक व्याप्त रही है। उनका पूरा...
शख्सियतसिनेमा कबूतरी देवी को लोगों के बीच ले जाने की शुरुआतसंजय जोशीSeptember 19, 2018September 19, 2018 by संजय जोशीSeptember 19, 2018September 19, 20183 3615 नैनीताल के निचले हिस्से तल्लीताल में बाजार से ऊपर चढ़ते हुए एक रास्ता खूब सारे हरे-भरे पेड़ों वाले कैम्पस तक ख़तम होता है. यह कैम्पस...
साहित्य-संस्कृति जड़ समाज को झिझोड़ने की जरूरत है – डाॅ नासिरा शर्मासमकालीन जनमतSeptember 19, 2018 by समकालीन जनमतSeptember 19, 201803082 जन संस्कृति मंच ने 17 सितम्बर को लखनऊ में उर्दू के मशहूर शायर तशना आलमी की पहली बरसी पर ‘ अदब में बाईं पसली खवातीन...
कवितासाहित्य-संस्कृति मैंने स्थापित किया अपना अलौकिक स्मारक (अलेक्सान्द्र सेर्गेयेविच पुश्किन की कविताएँ)उमा रागSeptember 16, 2018September 16, 2018 by उमा रागSeptember 16, 2018September 16, 201802672 मूल रूसी से अनुवाद : वरयाम सिंह; टिप्पणी : पंकज बोस पुश्किन के बारे में सोचते ही एक ऐसा तिकोना चेहरा जेहन में कौंधता है...
सिनेमा ‘अपनी धुन में कबूतरी’ की पहली स्क्रीनिंग नैनीताल मेंसंजय जोशीSeptember 15, 2018 by संजय जोशीSeptember 15, 20183 3858 प्रीमियर शो दुपहर 3.30 जी जी आई सी, तल्लीताल, नैनीताल उत्तराखंड के पुराने लोगों के कानों में अब भी कबूतरी देवी के गाने गूंजते रहते।...
चित्रकला भारतीय चित्रकला में ‘ कथा ’समकालीन जनमतSeptember 15, 2018December 9, 2019 by समकालीन जनमतSeptember 15, 2018December 9, 201904533 ’ ( एक लम्बे समय से भारतीय चित्रकला में जो कुछ हुआ वह ‘कथाओं’ के ‘चित्रण’ या इलस्ट्रेशन के अतिरिक्त कुछ भी नहीं था इसलिए...
कहानी शरतचंद्र का कथा-साहित्यप्रियम अंकितSeptember 15, 2018April 8, 2020 by प्रियम अंकितSeptember 15, 2018April 8, 20204 2214 एक कथाशिल्पी के रूप में शरतचंद्र जहां तक और जिस हद तक भावप्रवण हैं, वहां तक उनका साहित्य आज भी श्रेष्ठ बना हुआ है| लेकिन...