समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

मीडिया

गुरिल्ला इमरजेंसी के दौर में मीडिया : मध्यप्रदेश की कहानी

जावेद अनीस
  भारत में मीडिया की विश्वसनीयता लगातार गिरी है, 2018 विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत 180 देशों की सूची में 2 अंक नीचे खिसकर...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

जबरदस्त कवि, बड़े सम्पादक, सिनेमा और संगीत के अध्येता, गंभीर पाठक, भाषाओं और यारों के धनी विष्णु खरे की याद

अशोक पाण्डे अलविदा विष्णु खरे – 1 जबरदस्त कवि, बड़े सम्पादक, सिनेमा और संगीत के अध्येता, गंभीर पाठक, भाषाओं और यारों के धनी उस आदमी...
जनमतसिनेमास्मृति

कल्पना लाज़मी के सिनेमा में एक सशक्त स्त्री की छवि उभरकर सामने आती है

समकालीन जनमत
यूनुस खान   कल्‍पना लाजमी का जाना हिंदी फिल्‍म जगत का एक बड़ा नुकसान है। बहुत बरस पहले एक सीरियल आया था ‘लोहित किनारे’। ये...
मीडिया

पत्रकारों के उत्पीड़न के ख़िलाफ़ जनमत तैयार करने के संकल्प के साथ CAAJ कन्वेंशन का समापन

समकालीन जनमत
नई दिल्ली. दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन हॉल में 22-23 सितंबर को आयोजित कमेटी अगेन्स्ट असॉल्ट ऑन जर्नलिज़्म (CAAJ) सम्मेलन पत्रकारों के उत्पीड़न के ख़िलाफ़ देश भर...
शख्सियतसिनेमा

अभिव्यक्ति के प्रति ईमानदार एक रचनाकार की त्रासदी ‘मंटो’

अमरेंद्र नाथ त्रिपाठी ‘मंटो’ बायोपिक फिल्म की बहुत समय से प्रतीक्षा कर रहा था। समय-समय पर आने वाले ट्रेलर या वीडियो के टुकड़े इंतिजार को...
जनमतसाहित्य-संस्कृति

जनगीतों का सामाजिक सन्दर्भ

समकालीन जनमत
डॉ. राजेश मल्ल   साहित्य अपने अन्तिम निष्कर्षों में एक सामाजिक उत्पाद होता है। कत्र्ता के घोर उपेक्षा के बावजूद समय और समाज की सच्चाई...
जनमतशख्सियतसिनेमा

ज़मीर को हर शै से ऊपर रखने वाले मंटो

अखिलेश प्रताप सिंह. खुदा ज्यादा महान हो सकता है लेकिन मंटो ज्यादा सच्चे दिखते हैं और उससे भी ज्यादा मनुष्य, क्योंकि मंटो को सब कुछ...
कविताजनमतस्मृति

चार आयामों का एक कवि विष्णु खरे

उमा राग
मंगलेश डबराल   यह बात आम तौर पर मुहावरे में कही जाती है कि अमुक व्यक्ति के न रहने से जो अभाव पैदा हुआ है...
स्मृति

वैज्ञानिक दृष्टि और आलोचनात्मक यथार्थ वाले विचार संपन्न कवि थे विष्णु खरे: आलोक धन्वा

विष्णु खरे जनता के आक्रोश के संगठित होने की कामना करने वाले कवि हैं। उनकी कविताएं जनसाधारण के जीवन के दृश्यचित्रों की तरह हैं। वर्णनात्मकता...
चित्रकला

भारतीय चित्रकला और ‘कथा ‘ : 2

अशोक भौमिक
हमने देखा की जिस समाज में दृश्य को 'पढ़ना' सिखाया जाता हो वहाँ कथाओं का 'चित्रण' ही हो सकता है, कला का सृजन नहीं। चित्रकार...
चित्रकला

कामरेड चंद्रशेखर का एक चित्र

  आज कामरेड चंद्रशेखर का जन्म दिन है. सत्तर के दशक में बनारस के कुछ प्रतिभाशाली चित्रकारों ने नक्सलवादी विचारधारा के करीब रहकर बहुत महत्वपूर्ण...
स्मृति

चंद्रशेखर : नई पीढ़ी का नायक

प्रणय कृष्ण
चंद्रशेखर की सबसे प्रिय किताब थी लेनिन की पुस्तक ‘क्या करें’। नेरुदा के संस्मरण भी उन्हें बेहद प्रिय थे। अकसर अपने भाषणों में वे पाश...
ख़बरशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

विष्णु खरे: बिगाड़ के डर से ईमान का सौदा नहीं किया

मृत्युंजय
विष्णु जी नहीं रहे। हिंदी साहित्य संसार ने एक ऐसा बौद्धिक खो दिया, जिसने ‘बिगाड़ के डर से ईमान’ की बात कहने से कभी भी...
कविताजनमतस्मृति

जीवन को एक कार्निवल के रूप में देखने वाला कवि कुँवर नारायण

समकालीन जनमत
  कमोबेश दो शताब्दियों की सीमा-रेखा को छूने वाली कुँवर नारायण की रचना-यात्रा छह दशकों से भी अधिक समय तक व्याप्त रही है। उनका पूरा...
शख्सियतसिनेमा

कबूतरी देवी को लोगों के बीच ले जाने की शुरुआत

संजय जोशी
नैनीताल के निचले हिस्से तल्लीताल में बाजार से ऊपर चढ़ते हुए एक रास्ता खूब सारे हरे-भरे पेड़ों वाले कैम्पस तक ख़तम होता है. यह कैम्पस...
साहित्य-संस्कृति

जड़ समाज को झिझोड़ने की जरूरत है – डाॅ नासिरा शर्मा

जन संस्कृति मंच ने 17 सितम्बर को लखनऊ में उर्दू के मशहूर शायर तशना आलमी की पहली बरसी पर ‘ अदब में बाईं पसली खवातीन...
कवितासाहित्य-संस्कृति

मैंने स्थापित किया अपना अलौकिक स्मारक (अलेक्सान्द्र सेर्गेयेविच पुश्किन की कविताएँ)

उमा राग
 मूल रूसी से अनुवाद : वरयाम सिंह; टिप्पणी : पंकज बोस पुश्किन के बारे में सोचते ही एक ऐसा तिकोना चेहरा जेहन में कौंधता है...
सिनेमा

‘अपनी धुन में कबूतरी’ की पहली स्क्रीनिंग नैनीताल में

संजय जोशी
प्रीमियर शो दुपहर 3.30 जी जी आई सी, तल्लीताल, नैनीताल उत्तराखंड के पुराने लोगों के कानों में अब भी कबूतरी देवी के गाने गूंजते रहते।...
चित्रकला

भारतीय चित्रकला में ‘ कथा ’

समकालीन जनमत
’ ( एक लम्बे समय से भारतीय चित्रकला में जो कुछ हुआ वह ‘कथाओं’ के ‘चित्रण’ या इलस्ट्रेशन के अतिरिक्त कुछ भी नहीं था इसलिए...
कहानी

शरतचंद्र का कथा-साहित्य

प्रियम अंकित
एक कथाशिल्पी के रूप में शरतचंद्र जहां तक और जिस हद तक भावप्रवण हैं, वहां तक उनका साहित्य आज भी श्रेष्ठ बना हुआ है| लेकिन...
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