समकालीन जनमत

Author : गोपाल प्रधान

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प्रो. गोपाल  प्रधान अम्बेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली में प्राध्यापक हैं. उन्होंने विश्व साहित्य की कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का अनुवाद , समसामयिक मुद्दों पर लेखन और उनका संपादन किया है
जनमत

स्वाधीनता आंदोलन का वाम तेवर

गोपाल प्रधान
                                       आज़ादी का अमृत महोत्सव उसके लिए लड़ने वालों को याद करने का भी मौका है। यह आज़ादी उपनिवेशवाद से लड़ाई करके हासिल की...
पुस्तक

हिंदुत्व के उत्थान से उपजी निराशा

गोपाल प्रधान
अभय कुमार दुबे की किताब ‘हिंदू-एकता बनाम ज्ञान की राजनीति’ का प्रकाशन वाणी प्रकाशन से 2019 में हुआ । शीर्षक ही बिना किसी लाग लपेट...
पुस्तक

राजनीतिक प्रतिरोध में अहिंसा की भूमिका

गोपाल प्रधान
किताब में यही बताया गया है कि बीसवीं सदी में जनता ने हिंसा के बगैर सत्ता पर कब्जा करने की क्षमता अर्जित की । लेखकों...
साहित्य-संस्कृति

   प्रगतिशील साहित्य के पक्ष में बहस का एक तेवर : केदारनाथ अग्रवाल का आलोचनात्मक लेखन

गोपाल प्रधान
केदारनाथ अग्रवाल के आलोचनात्मक लेखन पर उनके जीवनकाल में ध्यान नहीं दिया गया । रामविलास शर्मा भी उनके गद्य की तारीफ़ उनकी चिट्ठियों के प्रसंग...
पुस्तक

‘उड़ता बनारस’: स्थापत्य में फ़ासीवाद                                       

गोपाल प्रधान
सुरेश प्रताप की किताब ‘ उड़ता बनारस ’ हमसे वर्तमान शासन के कुछ कारनामों को गहरी निगाह से देखने की मांग करती है । पिछले...
स्मृति

भविष्य के समाज की ताबीज

गोपाल प्रधान
नहीं जानता कि महान व्यक्ति किस तरह के होते हैं लेकिन कामरेड बृजबिहारी पांडे बिना शक महान थे। उनका अहैतुक स्नेह मुझे समय समय पर...
पुस्तक

सरकार का अपने ही नागरिकों से युद्ध

गोपाल प्रधान
लेख के शीर्षक से भ्रम सम्भव है कि यह किताब नागरिकता संबंधी कानूनों के बारे में है लेकिन दुर्भाग्य से हमारे देश की सरकार लम्बे...
पुस्तक

कुर्सी के लिए कत्ल: गोपाल प्रधान

गोपाल प्रधान
2019 में शब्दलोक प्रकाशन से छपी किताब ‘सत्ता की सूली’ को तीन पत्रकारों ने मिलकर लिखा है । इस किताब ने वर्तमान पत्रकारिता को चारण...
पुस्तक

मानव विकास का भौतिकवादी नजरिया

गोपाल प्रधान
हिंदी भाषा में कुछ भी वैचारिक लिखने की कोशिश खतरनाक हो सकती है । देहात के विद्यार्थियों के लिए कुंजी लिखना ही इस भाषा का...
साहित्य-संस्कृति

नागार्जुन की आलोचना

गोपाल प्रधान
नागार्जुन कवि थे, उपन्यासकार थे। थोड़ा ध्यान देकर देखें तो अनुवादक भी थे। लेकिन आलोचक ? और वह भी तब जब खुद उन्होंने आलोचक के...
पुस्तक

खेती का इतिहास

गोपाल प्रधान
 2020 में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास यानी नेशनल बुक ट्रस्ट से प्रकाशित सुषमा नैथानी की किताब ‘अन्न कहाँ से आता है’ सही अर्थ में हिंदी की...
पुस्तक

क्रांतिकारी दुनिया-‘रेवोल्यूशनरी वर्ल्ड: ग्लोबल अपहीवेल इन द माडर्न एज’

2021 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस से डेविड मोटाडेल के संपादन में ‘रेवोल्यूशनरी वर्ल्ड: ग्लोबल अपहीवेल इन द माडर्न एज’ का प्रकाशन हुआ । संपादक की...
पुस्तक

इतिहास की सीख: मार्क्सिज्म 1844-1990: ओरिजीन्स, बिट्रेयल, रीबर्थ

गोपाल प्रधान
1992 में रटलेज से रोजर एस गाटलिएब की किताब ‘मार्क्सिज्म 1844-1990: ओरिजीन्स, बिट्रेयल, रीबर्थ’ का प्रकाशन हुआ । किताब के नौ अध्याय चार हिस्सों में...
कविता

धूमिल की ‘नक्सलबाड़ी’

गोपाल प्रधान
धूमिल की यह कविता उनके पहले काव्य संग्रह ‘संसद से सड़क तक’ में कुल चार पृष्ठों में प्रकाशित है । संग्रह से पहले 1967 में...
पुस्तक

धर्म के आवरण में विद्रोह की अनूठी अभिव्यक्ति

गोपाल प्रधान
कनक तिवारी की 2021 में सूर्य प्रकाशन मन्दिर, बीकानेर से प्रकाशित किताब ‘ विद्रोही वेदान्ती का भारत बोध (विवेकानन्द को समझने की कोशिश) ’ को...
पुस्तक

सरहद और सुरक्षा

गोपाल प्रधान
2021 में हेमार्केट बुक्स से हर्षा वालिया की किताब ‘ बार्डर & रूल : ग्लोबल माइग्रेशन, कैपिटलिज्म, ऐंड द राइज आफ़ रेशियल नेशनलिज्म ’ का...
ज़ेर-ए-बहस

किसान आंदोलन और लोकतंत्र

गोपाल प्रधान
सिद्ध है कि किसान आंदोलन का सवाल अब केवल खेती के लाभकर होने से ही जुड़ा नहीं रह गया है। इसकी सफलता पर लोकतंत्र और...
पुस्तक

क्रांतिकारी विचारों की दास्तान

गोपाल प्रधान
लेखक ने जोर देकर कहा है कि मार्क्स को समझना बौद्धिक व्यायाम मात्र नहीं है। उनके विचार अधिकाधिक अराजक होती जा रही दुनिया को समझने...
पुस्तक

मार्क्सवाद और उत्तर-मार्क्सवाद

गोपाल प्रधान
2021 में रटलेज से अलेक्स कलीनिकोस, स्तातिस कूवेलाकिस और लुचिया प्रादेला के संपादन में ‘ रटलेज हैंडबुक आफ़ मार्क्सिज्म ऐंड पोस्ट-मार्क्सिज्म’ का प्रकाशन हुआ ।...
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