Author : गोपाल प्रधान

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प्रो. गोपाल  प्रधान अम्बेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली में प्राध्यापक हैं. उन्होंने विश्व साहित्य की कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का अनुवाद , समसामयिक मुद्दों पर लेखन और उनका संपादन किया है
जनमत

किसान के क्रमिक दरिद्रीकरण की शोक गाथा है ‘ गोदान ‘

गोपाल प्रधान
प्रेमचंद ने गोदान में उपनिवेशवादी नीतियों से बरबाद होते भारतीय किसानी जीवन और इसके लिए जिम्मेदार ताकतों की जो पहचान आज के 75 साल पहले...
पुस्तक

राजनीति में अतिवादी मध्य मार्ग

गोपाल प्रधान
2015 में वर्सो से तारिक अली की पतली सी किताब ‘ द एक्सट्रीम सेन्टर: ए वार्निंग’ का प्रकाशन हुआ । पतली होने के बावजूद किताब...
जनमत

हिटलर और फ़ासीवाद का नया उभार

गोपाल प्रधान
सोवियत संघ के पतन और विश्व अर्थतंत्र में आए बदलावों के चलते तेजी से उभरी नवफ़ासीवादी सक्रियता फिलहाल अंतर्राष्ट्रीय राजनीति की सबसे खतरनाक प्रवृत्ति बन...
जनमत दुनिया शख्सियत स्मृति

कार्ल मार्क्स : एक जीवन परिचय

दुनिया के मजदूरों के, सिद्धांत और कर्म दोनों मामलों में, सबसे बड़े नेता कार्ल मार्क्स (1818-1883) का जन्म 5 मई को त्रिएर नगर में हुआ...
साहित्य-संस्कृति

एंगेल्स की शाहकार किताब ‘ द ओरिजिन आफ़ द फ़ेमिली, प्राइवेट प्रापर्टी एंड द स्टेट ’

गोपाल प्रधान
2010 में त्रिस्तम हन्ट की नई भूमिका के साथ एंगेल्स की महान किताब ‘द ओरिजिन आफ़ द फ़ेमिली, प्राइवेट प्रापर्टी एंड द स्टेट’ का प्रकाशन...

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