समकालीन जनमत

Category : ज़ेर-ए-बहस

ख़बरज़ेर-ए-बहस

वाह फ़ैज़ प्यारे , थरथरा रहे हैं हुक्मरां सुन कर गीत तुम्हारे !

इन्द्रेश मैखुरी
वाह फ़ैज़ साहब,क्या कहने आपके. आपकी शायरी,आपकी नज़्में क्या तूफान मचाये हुए हैं. उत्तर प्रदेश में एक ऐसे बुजुर्ग को शांति भंग का नोटिस दिया...
ज़ेर-ए-बहस

पुलिस, मुसलमान और हिंदी मीडिया

समकालीन जनमत
उत्तर भारत में प्रतिबंधित संगठनों में सिमी का नाम सर्वाधिक चर्चित है। आज भी रह रह कर किसी घटना के समय या सांप्रदायिक माहौल को...
ज़ेर-ए-बहस

‘गोदी मीडिया गो बैक’ के नारे क्यों लग रहे हैं?

सुशील मानव
‘गोदी मीडिया गो बैक, गोदी मीडिया गो बैक, गोदी मीडिया गो बैक’ एनआरसी सीएए के खिलाफ़ हो रहे आंदोलन में ये नारा दिल्ली से लेकर...
जनमतज़ेर-ए-बहस

नागरिकता संशोधन विधेयक पर बहस: झूठ का भ्रमजाल कौन ज़िम्मेदार था देश के विभाजन के लिए?

राम पुनियानी
संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित नागरिकता संशोधन अधिनियम पर विविध प्रतिक्रयाएं सामने आईं हैं, जिनमें से कई नकारात्मक हैं. एक ओर जहाँ उत्तरपूर्व में...
जनमतज़ेर-ए-बहस

सत्ता द्वारा जनांदोलनों के ख़िलाफ़ काउंटर प्रोटेस्ट खड़ा करने का नया चलन

सुशील मानव
‘नागरिकता संशोधन अधिनयम-2019’ व ‘राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर’ के खिलाफ़ पूरे देश में जबर्दस्त आंदोलन चल रहे हैं। इनमें छात्र आंदोलन, नागरिक आंदोलन और राजनीतिक दलों...
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मऊ : बवाल के पीछे झांकती साजिश

के के पांडेय
16 दिसंबर, दिन के 1:12 मिनट पर अचानक मऊ रिजेक्ट सी ए ए नाम के व्हाट्सएप ग्रुप से एक मैसेज आता है ,”आज 2:00 बजे...
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यह सच बोलने के लिए चुकाई गयी कीमत है: सुशांत सिंह

समकालीन जनमत
अशोक पान्डे सुशांत और मेरी स्कूली पढ़ाई नैनीताल के एक ही स्कूल से हुई. बिड़ला विद्यामंदिर में वे मेरे जूनियर रहे और मेरे पास आउट...
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गुजरात केंद्रीय विश्विद्यालय के छात्र और शिक्षक जामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के समर्थन में आये

समकालीन जनमत
16 दिसम्बर 2019: आज शाम गुजरात केंद्रीय विश्विद्यालय के छात्र और शिक्षक संघ, देश के विश्वविद्यालयों में नागरिकता संशोधन कानून के प्रतिरोध को दबाने के...
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जामिया विश्वविद्यालय में दिल्ली पुलिस की बर्बरता और नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ आजमगढ़ में प्रतिवाद मार्च

दुर्गा सिंह
आज़मगढ़, 16 दिसम्बर 2019: नागरिकता संशोधन कानून CAA के खिलाफ़ तथा जामिया विश्वविद्यालय में लाइब्रेरी और हाॅस्टल में घुसकर दिल्ली पुलिस द्वारा की गयी बर्बर, पाशविक...
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय : जामिया के समर्थन, कैब के विरोध में उतरे छात्र

16दिसंबर, इलाहाबाद: देश भर में चल रहे आंदोलनों की तपिश आज इलाहाबाद विश्विद्यालय में भी महसूस की गई। इलाहाबाद विश्विद्यालय के छात्रसंघ भवन गेट पर...
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आख़िर क्यों हैं दिल्ली में शिक्षक और छात्र सड़कों पर?

समकालीन जनमत
राजीव कुँवर दिल्ली की सड़कों पर पुलिस को आखिर क्यों छात्र एवं शिक्षकों के ऊपर लाठी भाँजनी पड़ रही है ? आप उन्हीं पुलिस वालों...
ज़ेर-ए-बहसशख्सियत

वंचितों और पराधीन लोगों की ओर से बोलने वाले पहले दार्शनिक थे बुद्ध– प्रो. गोपाल प्रधान

” जिसे बौद्ध दर्शन का दुःखवाद कहा जाता है उसे अगर सामान्य जीवन के अर्थों में परिभाषित करें तो क्या परिभाषा निकलती है कि दुःख...
ज़ेर-ए-बहस

जे.एन.यू. : बात निकली है तो..

इन्द्रेश मैखुरी
जे.एन.यू. अधेड़ छात्र और मोहन थपलियाल जे.एन.यू. के खिलाफ विषवमन करते हुए यह बात सबसे ज्यादा उछाली जा रही है कि वहाँ तो अधेड़ उम्र...
जनमतज़ेर-ए-बहस

क्या धर्मनिरपेक्ष राज्य अपनी देखरेख में मंदिर बनवायेगा

राम पुनियानी
छह दिसंबर 1992 की तरह, 9 नवम्बर 2019 भी भारत के इतिहास में एक मील का पत्थर बन गया है. छह दिसंबर को दिन-दहाड़े जो...
ज़ेर-ए-बहस

गांधी बनाम गांधी

समकालीन जनमत
यह वर्ष महात्मा गांधी की 150वीं जयंती का वर्ष है.  इस वर्ष में गांधी को लेकर अलग अलग नजरिये से बातें हो रही हैं। गांधी...
ज़ेर-ए-बहस

महिला हिंसा और समकालीन स्त्री काव्य चेतना

कौशल किशोर
शमशेर बहादुर सिंह की मशहूर कविता है ‘काल से होड़’। अपनी इस कविता में वे कहते हैं ‘काल तुझसे होड़ है मेरी – अपराजित तू/तुझ...
जनमतज़ेर-ए-बहस

अयोध्‍या में विवादित भूमि के मालिकाने के मुकदमे में सर्वोच्‍च न्‍यायालय के फैसले पर भाकपा(माले) पोलितब्‍यूरो का बयान

समकालीन जनमत
नई दिल्‍ली 9 नवम्‍बर. यह महत्‍वपूर्ण है कि अयोध्‍या में विवादित स्‍थल पर सर्वोच्‍च न्‍यायालय का फैसला किसी भी तरह से 6 दिसम्‍बर 1992 को...
ज़ेर-ए-बहस

साम्प्रदायिकता का प्रश्न और दलित स्त्री कविता

राजनीति से दलित साहित्य की दूरी कभी नहीं रही| धर्म और संस्कृति के क्षेत्र में वर्णवादी जकड़न से जूझते हुए दलित साहित्य ने राजनीति के...
ज़ेर-ए-बहस

मार्क्सवाद की नवीनता: गोपाल प्रधान

गोपाल प्रधान
(जयपुर में जलेस की ओर से आयोजित कार्यशाला में बोलना साहित्य और विचारधारा पर था लेकिन पिछले कुछ वर्षों से मार्क्सवाद पर जारी काम के...
ज़ेर-ए-बहससाहित्य-संस्कृति

हिंदी का दलित साहित्य: वर्तमान चुनौती और भविष्यगत सम्भावना

गोपाल प्रधान
अन्य भाषाओं के बारे में नहीं मालूम लेकिन हिंदी में दलित साहित्य को अपनी जगह बनाने के लिए शायद किसी भी साहित्यिक प्रवृत्ति से अधिक...
Fearlessly expressing peoples opinion