समकालीन जनमत

Category : ज़ेर-ए-बहस

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नागरिकता संशोधन विधेयक पर बहस: झूठ का भ्रमजाल कौन ज़िम्मेदार था देश के विभाजन के लिए?

राम पुनियानी
संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित नागरिकता संशोधन अधिनियम पर विविध प्रतिक्रयाएं सामने आईं हैं, जिनमें से कई नकारात्मक हैं. एक ओर जहाँ उत्तरपूर्व में...
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सत्ता द्वारा जनांदोलनों के ख़िलाफ़ काउंटर प्रोटेस्ट खड़ा करने का नया चलन

सुशील मानव
‘नागरिकता संशोधन अधिनयम-2019’ व ‘राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर’ के खिलाफ़ पूरे देश में जबर्दस्त आंदोलन चल रहे हैं। इनमें छात्र आंदोलन, नागरिक आंदोलन और राजनीतिक दलों...
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मऊ : बवाल के पीछे झांकती साजिश

के के पांडेय
16 दिसंबर, दिन के 1:12 मिनट पर अचानक मऊ रिजेक्ट सी ए ए नाम के व्हाट्सएप ग्रुप से एक मैसेज आता है ,”आज 2:00 बजे...
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यह सच बोलने के लिए चुकाई गयी कीमत है: सुशांत सिंह

समकालीन जनमत
अशोक पान्डे सुशांत और मेरी स्कूली पढ़ाई नैनीताल के एक ही स्कूल से हुई. बिड़ला विद्यामंदिर में वे मेरे जूनियर रहे और मेरे पास आउट...
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गुजरात केंद्रीय विश्विद्यालय के छात्र और शिक्षक जामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के समर्थन में आये

समकालीन जनमत
16 दिसम्बर 2019: आज शाम गुजरात केंद्रीय विश्विद्यालय के छात्र और शिक्षक संघ, देश के विश्वविद्यालयों में नागरिकता संशोधन कानून के प्रतिरोध को दबाने के...
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जामिया विश्वविद्यालय में दिल्ली पुलिस की बर्बरता और नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ आजमगढ़ में प्रतिवाद मार्च

दुर्गा सिंह
आज़मगढ़, 16 दिसम्बर 2019: नागरिकता संशोधन कानून CAA के खिलाफ़ तथा जामिया विश्वविद्यालय में लाइब्रेरी और हाॅस्टल में घुसकर दिल्ली पुलिस द्वारा की गयी बर्बर, पाशविक...
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय : जामिया के समर्थन, कैब के विरोध में उतरे छात्र

16दिसंबर, इलाहाबाद: देश भर में चल रहे आंदोलनों की तपिश आज इलाहाबाद विश्विद्यालय में भी महसूस की गई। इलाहाबाद विश्विद्यालय के छात्रसंघ भवन गेट पर...
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आख़िर क्यों हैं दिल्ली में शिक्षक और छात्र सड़कों पर?

समकालीन जनमत
राजीव कुँवर दिल्ली की सड़कों पर पुलिस को आखिर क्यों छात्र एवं शिक्षकों के ऊपर लाठी भाँजनी पड़ रही है ? आप उन्हीं पुलिस वालों...
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वंचितों और पराधीन लोगों की ओर से बोलने वाले पहले दार्शनिक थे बुद्ध– प्रो. गोपाल प्रधान

” जिसे बौद्ध दर्शन का दुःखवाद कहा जाता है उसे अगर सामान्य जीवन के अर्थों में परिभाषित करें तो क्या परिभाषा निकलती है कि दुःख...
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जे.एन.यू. : बात निकली है तो..

इन्द्रेश मैखुरी
जे.एन.यू. अधेड़ छात्र और मोहन थपलियाल जे.एन.यू. के खिलाफ विषवमन करते हुए यह बात सबसे ज्यादा उछाली जा रही है कि वहाँ तो अधेड़ उम्र...
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क्या धर्मनिरपेक्ष राज्य अपनी देखरेख में मंदिर बनवायेगा

राम पुनियानी
छह दिसंबर 1992 की तरह, 9 नवम्बर 2019 भी भारत के इतिहास में एक मील का पत्थर बन गया है. छह दिसंबर को दिन-दहाड़े जो...
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गांधी बनाम गांधी

समकालीन जनमत
यह वर्ष महात्मा गांधी की 150वीं जयंती का वर्ष है.  इस वर्ष में गांधी को लेकर अलग अलग नजरिये से बातें हो रही हैं। गांधी...
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महिला हिंसा और समकालीन स्त्री काव्य चेतना

कौशल किशोर
शमशेर बहादुर सिंह की मशहूर कविता है ‘काल से होड़’। अपनी इस कविता में वे कहते हैं ‘काल तुझसे होड़ है मेरी – अपराजित तू/तुझ...
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अयोध्‍या में विवादित भूमि के मालिकाने के मुकदमे में सर्वोच्‍च न्‍यायालय के फैसले पर भाकपा(माले) पोलितब्‍यूरो का बयान

समकालीन जनमत
नई दिल्‍ली 9 नवम्‍बर. यह महत्‍वपूर्ण है कि अयोध्‍या में विवादित स्‍थल पर सर्वोच्‍च न्‍यायालय का फैसला किसी भी तरह से 6 दिसम्‍बर 1992 को...
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साम्प्रदायिकता का प्रश्न और दलित स्त्री कविता

राजनीति से दलित साहित्य की दूरी कभी नहीं रही| धर्म और संस्कृति के क्षेत्र में वर्णवादी जकड़न से जूझते हुए दलित साहित्य ने राजनीति के...
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मार्क्सवाद की नवीनता: गोपाल प्रधान

गोपाल प्रधान
(जयपुर में जलेस की ओर से आयोजित कार्यशाला में बोलना साहित्य और विचारधारा पर था लेकिन पिछले कुछ वर्षों से मार्क्सवाद पर जारी काम के...
ज़ेर-ए-बहससाहित्य-संस्कृति

हिंदी का दलित साहित्य: वर्तमान चुनौती और भविष्यगत सम्भावना

गोपाल प्रधान
अन्य भाषाओं के बारे में नहीं मालूम लेकिन हिंदी में दलित साहित्य को अपनी जगह बनाने के लिए शायद किसी भी साहित्यिक प्रवृत्ति से अधिक...
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प्रार्थना का साम्प्रदायीकरण और छात्र-सत्याग्रह

कैलाश बनवासी
  क्या देश के स्कूलों में अब सब कुछ वही होगा जो फिरकापरस्त संगठन चाहेंगे ? प्रार्थना से लेकर सिलेबस तक क्या सब कुछ उन्हीं के...
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बाढ़ नहीं, सरकार निर्मित जलजमाव की चपेट में पटना

शशांक मुकुट शेखर
रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून पानी गये ना ऊबरे, मोती, मानुष, चून सैकड़ों साल पहले रहीम द्वारा रचित इस दोहे को पूंजीवादी युग...
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शराब पर्वतीय क्षेत्रों में पूरे सामाजिक तंतु को ही तहस-नहस कर रही है

इन्द्रेश मैखुरी
बीते दिनों देहारादून में जहरीली शराब पीने से 7 लोगों की मौत हो गयी. इससे पहले इसी साल फरवरी के महीने में रुड़की में जहरीली...
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