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टिक-टॉक के भ्रमजाल में फंसते युवा

वर्तमान में भारत सबसे युवा देश है. देश के युवाओं की तेजी से डिजिटल वर्ल्ड में शिफ्टिंग हो रही है.  कुछ सालों पहले तक 300-400 रुपये में 1-1.5 जीबी इंटरनेट डाटा मिलता था. उतने में ही पूरा महीना गुजरता था. मगर आज के युवाओं के एक दिन के इन्टरनेट डाटा का खर्च कुछ सालों पहले के महीने भर के खर्च से ज्यादा है. कई गुणा ज्यादा.

लगभग 2 साल पहले अचानक से इंटरनेट पर ‘म्यूजिकली’ नामक एप्लिकेशन के नोटिफिकेशन आने शुरू हुए. देखते-देखते इसके ग्रोथ ने रिकॉर्ड तोड़ दिया. बाद में ‘म्यूजिकली’ एप्लीकेशन का नाम बदलकर ‘टिक-टॉक’ कर दिया गया. ऐसा म्यूजिकली और टिक-टॉक के विलय के बाद हुआ. उसके बाद से यह सबसे तेजी से डाउनलोड होने वाले एप्लीकेशन में से एक हो गया है.

वर्तमान में भारत में टिक-टॉक के 200 मिलियन से ज्यादा यूजर हैं. इसमें से एक्टिव यूजर की संख्या 120 मिलियन से ज्यादा है. सिर्फ 2019 में अबतक टिक-टॉक ने भारत में 9 करोड़ से ज्यादा नए यूजर जेनरेट किए हैं. यह एप्लीकेशन दुनिया भर में 33 भाषाओँ में उपलब्ध हैं जिसमें से सिर्फ भारत में यह 11 भाषाओँ में उपलब्ध है.

वर्तमान में टिक-टॉक भारत में अंग्रेजी, हिंदी, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, तमिल, तेलगु, मराठी, ओड़िया तथा पंजाबी में उपलब्ध है. टिक-टॉक के कुल यूजर्स में 16-24 वर्ष के युवाओं की संख्या लगभग 41% या इससे ज्यादा है.

आलम यह है कि भारत में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाला हर दूसरा-तीसरा युवा टिक-टॉक इस्तेमाल करता है. हाल के समय में इसने कई यूथ सेलेब्रिटी पैदा किए हैं. कुछ को बॉलीवुड में काम भी मिल रहा है. टिक-टॉक ने अपना ‘अवार्ड शो’ तथा ‘फैन फेस्ट’ का आयोजन भी शुरू किया है.

युवाओं के डेजिग्नेशन में ‘टिक-टॉक सेलेब्रिटी’ ऐड होना शुरू हो गया है. मगर भारतीय युवाओं में टिक-टॉक का बढ़ता प्रभाव इन युवाओं को किस ओर ले जा रहा है ?

टिक-टॉक पर रेगुलर विडियो बनाने वाले युवाओं के अनुसार 15 सेकंड का एक बढ़िया विडियो बनाने में कई बार 4-6 घंटे भी लग जाते हैं. साथ ही इतने ही समय के एक वीडियो बनाने में दर्जनों रिटेक देने पड़ते हैं. मगर इसका क्रेज इस तरह का है कि युवा 15 सेकंड के एक विडियो पर घंटों खर्च करने से गुरेज नहीं करते. कई मिलियन यूजर्स तो ऐसे हैं जो इसे फुल टाइम की तरह कर रहे हैं. मगर अपने दिनचर्या का अधिकांश समय टिक-टॉक पर खर्च करने वाले इन युवाओं को हासिल क्या हो रहा है ?

इतने मिलियन यूजर्स में पहचान बनाने वाले यूजर्स की संख्या मात्र दर्जनों या सैकड़ों में है. पहचान भी कहाँ ? सिर्फ टिक-टॉक कम्युनिटी में. इसके कारण इन करोड़ों युवाओं की शिफ्टिंग तेजी से इसी कम्युनिटी में हो रहा है. मतलब कि इन युवाओं से संवाद करने के लिए आपको टिक-टॉक पर जाना होगा. वहां भी संवाद का कोई डायरेक्ट जरिया नहीं है. इन युवाओं का टिक-टॉक से बाहर की दुनिया से सरोकार तेजी से नगण्य होता जा रहा है. इनका जीवन पूरी तरह से टिक-टॉक डेवलपर्स पर निर्भर होता जा रहा है. इन युवाओं के लिए दुनिया के मायने टिक-टॉक तक ही सिमटते जा रहे हैं.

टिक-टॉक पर उपलब्ध कंटेंट इन युवाओं को पूरी तरह से बौद्धिक रूप से पंगु तथा बीमार बना रहा है. मजा और इंटरटेनमेंट के नाम पर सेक्सिएस्ट जोक, बिना सिर-पैर की बातें, गालियां, महिला विरोधी कंटेंट, भद्दे सर्काज्म और फेक स्वैग इन युवाओं को मानसिक/बौद्धिक रूप से गहरे अंधकार की ओर धकेल रहा है. इनके लिए टिक-टॉक की दुनिया की सच होती जा रही है. टिक-टॉक भारत के युवाओं के कई जेनरेशन को मानवीय प्रवृतियों से पूरी तरह दूर कर रहा है. अगर अतिशीघ्र टिक-टॉक और इस जैसे तमाम एप्लीकेशन को बैन नहीं किया गया तो भारत के युवाओं की कई पीढियां मानसिक बर्बादी के उस कगार पर पहुंच जाएगा जहाँ से उसकी वापसी अत्यंत मुश्किल हो जाएगी.

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