समकालीन जनमत

Category : जनमत

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पूनम वासम की कविताएँ सजग ऐंद्रिय बोध और वस्तु-पर्यवेक्षण की कविताएँ हैं

उमा राग
हिन्दी कविता में आदिवासी जमीन से आने वाली पहली कवयित्री सुशीला सामद हैं। उनका संग्रह “प्रलाप” नाम से 1935 में, सुभद्रा कुमारी चौहान और महादेवी...
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शिवराज सरकार की हिटलरशाही

जावेद अनीस
मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की सरकार द्वारा लगातार ऐसे कदम उठाये गये हैं जो कुछ अलग ही तस्वीर पेश करते हैं. इस दौरान कई...
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नफरत की विचारधारा और बढ़ती असहिष्णुता

समकालीन जनमत
हिन्दू राष्ट्रवादी ब्रिगेड अब इस भगवाधारी स्वामी को निशाना बना रही है. उन पर हमला, उसी श्रृंखला का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत डॉ दाभोलकर की...
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बिहार : बिहिंया ने बर्बर मध्ययुगीन घटनाओं का दिलायी याद

चंदन
भोजपुर के बिहियां में भीड़तंत्र के नाम पर उन्मादी गिरोह द्वारा एक महिला जो अपने जीवन जीने के जद्दोजहद में वर्षों से बिहियां बाज़ार पर...
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लखनऊ में शीरोज बतकही की 9वीं कड़ी : न्याय का अधिनायकवाद बनाम जनविरोधी न्याय तंत्र

समकालीन जनमत
आज तीन करोड़ के लगभग मुकदमे विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं. हमारे जातिवादी समाज में दलितों और पिछड़ों की न्यायालयों में न के बराबर भागीदारी...
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एक समाज के रूप में कहाँ पहुँच गए हैं हम ?

इन्द्रेश मैखुरी
इस घटना में पहले दिन से जैसे आरोपियों को भीड़ के हवाले करने की मांग की गयी,वह चिंताजनक संकेत हैं. कल्पना करके देखिये कि पहले...
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पीएचएमसी, पटना में डॉ संजय कुमार के इलाज में लापरवाही, हालत बिगड़ने पर एम्स लाया गया

समकालीन जनमत
जानलेवा हमले में बुरी तरह घायल महात्‍मा गाँधी केंद्रीय विश्‍वविद्यालय, मोतिहारी के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉ संजय कुमार की हालत और बिगड़ने पर उन्हें इलाज के...
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प्रेमचंद का यह जो ‘हिन्दू पाठ’ है

समकालीन जनमत
प्रेमचंद को गलत ढ़ंग से प्रस्तुत कर संघ परिवार अपने पक्ष में हिन्दी मानस को निर्मित करने में लगा है। यह हमला एक साथ प्रेमचंद...
कविताजनमत

विश्व कविता : तादयूश रुज़ेविच की कविताएँ

उमा राग
  〈 तादयूश रुज़ेविच (9 अक्टूबर 1921-24 अप्रैल 2014) पोलैंड के कवि, नाटककार और अनुवादक थे। उनकी कविताओं के बहुत सी भाषाओं में अनुवाद हुए...
ख़बरजनमतशिक्षा

डॉ. संजय कुमार पर हुए बर्बर हमले के ख़िलाफ़ दिल्ली टीचर्स इनिशिएटिव का बयान

समकालीन जनमत
दिल्ली टीचर्स इनिशिएटिव प्रो. संजय कुमार पर हुए बर्बर हमले की कठोर शब्दों में भर्त्सना करता है. प्रो. संजय कुमार महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी,...
जनमत

‘ भीड़-तंत्र’ को कैसे समझें !

समकालीन जनमत
कॉर्पोरेट मीडिया की अगुआई में इन दिनों सत्ता के सभी संस्थान एक हाथ से साम्प्रदायिक नफ़रत बाँट रहे हैं, दूसरे हाथ से भारत की सम्पदा-सम्प्रभुता...
जनमत

अटल बिहारी वाजपेयी और भारतीय दक्षिणपंथ की विकास यात्रा

समकालीन जनमत
आरएसएस के सिद्धांतकार गोविन्‍दाचार्य ने उन्‍हें भाजपा का उदारवादी ‘मुखौटा’ कहा था, जबकि आडवाणी भाजपा का असली चेहरा थे. वे एक ऐसे दौर में भाजपा...
कहानीजनमत

नेसार नाज़ की कहानी ‘मीरबाज़ खान’

दीपक सिंह
(नेसार नाज़ कथा साहित्य में बहुत परिचित नाम नहीं है | छत्तीसगढ़ के एक निहायत ही छोटे से कस्बे बैकुंठपुर (जो अब जिला मुख्यालय बन...
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समय को संबोधित सुभाष राय की कविताएँ

वरिष्ठ पत्रकार एवं जनसंदेश टाइम्स के प्रधान सम्पादक सुभाष राय का कविता संग्रह भले ही देर से आया हो पर अपने समय को सम्बोधित महत्वपूर्ण...
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स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर पटना में ‘कोरस’ द्वारा प्रतिरोध की एक शाम का आयोजन

समकालीन जनमत
14 अगस्त, पटना . स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर कोरस द्वारा सांस्कृतिक प्रतिरोध की एक शाम का आयोजन किया गया . यह आयोजन सरकारी...
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उमर खालिद पर हुए हमले से उठते सवाल

समकालीन जनमत
दिल्ली के कन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित ‘ख़ौफ़ से आज़ादी’ नामक कार्यक्रम में शामिल होने आए जेएनयू के शोध छात्र और एक्टिविस्ट उमर खालिद...
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‘कुछ नॉस्टैल्जिया तो है’ हेमंत कुमार की कहानी ‘रज्जब अली’ में

दीपक सिंह
(कथाकार हेमंत कुमार की कहानी ‘ रज्जब अली ’ पत्रिका ‘ पल-प्रतिपल ’ में प्रकाशित हुई है. इस कहानी की विषयवस्तु, शिल्प और भाषा को...
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इस ‘सिस्टेमेटिक’ सिस्टम से कब आजादी मिलेगी

शालिनी बाजपेयी
शालिनी वाजपेयी बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में स्थित बालिका गृह में सब ‘सिस्टेमेटिक’ चल रहा था। यहां मैंनें ‘ठीक’ शब्द का प्रयोग जानबूझ के नहीं किया...
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एक अंतहीन प्यास और तलाश की कथा विमलेश त्रिपाठी का उपन्यास ‘हमन हैं इश्क मस्ताना’

समकालीन जनमत
अनिला राखेचा हिंदी युग्म द्वारा प्रकाशित विमलेश त्रिपाठी  का ताज़ा-तरीन उपन्यास “हमन हैं इश्क मस्ताना” जितना अद्भुत है उतना ही बेजोड़ है इसका शीर्षक। उपन्यास...
कविताजनमत

अनुज लगुन की नई कविताएँ : रोटी के रंग पर ईमान लिख कर चलेंगे

उमा राग
अनुज लुगुन ने जब हिंदी की युवा कविता में प्रवेश किया तो वह एक शोर-होड़, करियरिस्ट भावना की आपाधापी, सस्ती यशलिप्सा से बौराई और पुरस्कारों...
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