समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

स्मृति

याद किए गए वरिष्ठ जन पत्रकार व प्रगतिशील मैथिली साहित्यकार अग्निपुष्प

समकालीन जनमत
शामिल हुए माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य जन संस्कृति मंच व समकालीन जनमत का आयोजन पटना, 25.05.2025 चर्चित जन पक्षधर हिंदी पत्रिका समकालीन जनमत के संस्थापक...
कविता

टेकचंद की कविताएँ वर्तमान समय के असंतोष को चिन्हित करती हैं

उमा राग
ख़ुदेजा ख़ान किसी भी साहित्यकार की लेखन के प्रति प्रतिबद्धता तब तक अधूरी है जब तक वो जन सरोकारों से न जुड़े। देश- दुनिया के...
पुस्तक

जुवि शर्मा की ‘अबोली की डायरी’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
गति उपाध्याय ‘अबोली की डायरी’ लेखिका ‘जुवि शर्मा’ की पहली किताब है। पहली किताब का अर्थ ‘कथेतर साहित्य’ में इनकी ‘पहली किताब’ से है। इसके...
पुस्तक

विपिन शर्मा की लप्रेक ‘तुम जिंदगी का नमक हो’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
कल्पना पन्त मामला इश्क का , राजनीति पार्टीशन की पर हमारा अमृतसर अभी नहीं आया.. तुम जिंदगी का नमक हो 2023 में पुस्तकनामा से प्रकाशित...
पुस्तक

प्रिया वर्मा के काव्य संग्रह ‘स्वप्न के बाहर पाँव’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
पवन करण ●गिनती में रहने के लिए दुर्घटनाओं में शरीक़ होना क्यों है ज़रूरी? ●यह भी क्या मामूली सुख है, कि गए हुए की परछाईं...
पुस्तक

साधारण जन की कहानियां समेटे संग्रह

दुर्गा सिंह
  हरीश चन्द्र पाण्डे एक कवि के रूप में प्रतिष्ठित हैं। ‘कुछ भी मिथ्या नहीं है’, ‘एक बुरूंश कहीं खिलता है’, ‘भूमिकाएँ खत्म नहीं होतीं’,...
पुस्तक

परवर्ती मार्क्स की राहें

2025 में वर्सो से केविन बी एंडरसन की किताब ‘द लेट मार्क्स’ रेवोल्यूशनरी रोड्स: कोलोनियलिज्म, जेंडर, ऐंड इंडिजेनस कम्युनिज्म’ का प्रकाशन हुआ । मार्क्स ने...
स्मृति

जयंती पर याद किए गए मिथिलांचल के सुप्रसिद्ध जन कवि सुरेन्द्र प्रसाद

समस्तीपुर। मिथिलांचल के सुप्रसिद्ध जनकवि एवं मार्क्सवादी विचारक डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद की जयंती के अवसर पर 17 मई को जन संस्कृति मंच के तत्वावधान में ‘...
स्मृति

कलाकारों को आज की जीवन-स्थितियों को चित्रित करना चाहिए : संतोष सहर

आरा: ‘‘ राकेश दिवाकर चित्रकला के क्षेत्र में एक अच्छे संगठक और कला के गहरे अध्येता थे। वे केवल यथार्थ के नहीं, बल्कि संभावित यथार्थ...
साहित्य-संस्कृति

जेंडर और क्वीयर संवेदनशीलता कार्यशाला : क्वीयर जीवन इस व्यवस्था के लिए चुनौती है

लखनऊ, 19 मई। ऐसे समय में जब क्वीयर और जेंडर नॉन-कनफॉर्मिंग लोगों के अस्तित्व को या तो निशाना बनाया जा रहा है, या फिर बाज़ार...
साहित्य-संस्कृति

लोक से कला को छीन बनाया गया शास्त्रीय : रणेंद्र

समकालीन जनमत
देहरादून।  रविवार को दून लाइब्रेरी एवं रिसर्च सेंटर में आयोजित प्रो. लाल बहादुर वर्मा स्मृति व्याख्यान की तीसरी श्रृखंला के तहत मुख्य वक्ता कथाकार व...
साहित्य-संस्कृति

समलैंगिक रिश्तों की गहराई से पड़ताल करता है जया जादवानी का उपन्यास “ काया ”

समकालीन जनमत
रायपुर. जन संस्कृति मंच की रायपुर ईकाई द्वारा स्थानीय वृंदावन हॉल में वरिष्ठ  कथाकार जया जादवानी के नवीनतम उपन्यास काया ( मंजुल प्रकाशन ) का...
कविता

मोहन मुक्त की कविताएँ भाषा में वर्णाश्रमी प्रपंचों को तोड़ने वाली राजनीतिक चेतना की बानगी हैं

समकालीन जनमत
केतन यादव एक पूर्वकथन यह कि मेरी भूमिका मात्र इस कवि से परिचय कराने की होगी बाकि बात कवि की कविताएँ खुद कहेंगी। यह एक...
पुस्तक

‘निराला का कथा साहित्य’ पर आयोजित हुई परिचर्चा

समकालीन जनमत
पूजा   इलाहाबाद, जसम की जिला इकाई की श्रृंखला ‘किताब पर बातचीत’ के अंतर्गत दुर्गा सिंह की किताब ‘निराला का कथा साहित्य’  पर परिचर्चा 4...
स्मृति

भोजपुरी भाषा-साहित्य आंदोलन की जनपक्षीय आवाज थे डॉ. तैयब हुसैन ‘ पीड़ित ’

समकालीन जनमत
डॉ. तैयब हुसैन ‘पीड़ित’ को जन संस्कृति मंच की श्रद्धांजलि  प्रसिद्ध प्रगतिशील-जनवादी कवि, आलोचक, कहानीकार, नाटककार, निबंधकार और संपादक डॉ. तैयब हुसैन पीड़ित आज हमारे...
कविता

रानी कुमारी की कविताएँ मनुष्य की गरिमा के पक्ष में उठाये गए सवाल हैं

समकालीन जनमत
अरविंद पासवान रानी की कविताओं से होकर गुजरना, मानो आईना में अपना ही अक्स देखना है। कवयित्री कल्पना के उड़ान पर सवार नहीं होती, बल्कि...
पुस्तक

सविता भार्गव के कविता संग्रह ‘थमी हुई बारिश में दोपहर’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
पवन करण मैं चुप रहकर समय को चीख़ में बदल देती हूँ.. कवि सविता भार्गव अपने एकांत में निवास करती हैं। एकांत ही उनका प्रकाश...
कविता

मनोज मल्हार की कविताएँ अपने समय और परिवेश की गहन पड़ताल हैं।

देवेन्द्र कुमार चौधरी कोई कवि कितना महत्वपूर्ण होता है इस बात से पता चलता है कि वह अपने समय, अपने आसपास के जीवन और परिवेश...
पुस्तक

श्रुति कुशवाहा के कविता संग्रह ‘सुख को भी दुःख होता है’ की पुस्तक समीक्षा

पवन करण इन दिनों मर्जियों का शासन है….. मेरा भोजन, मेरे कपड़े मेरी आस्था पर भारी है ….उनकी मर्जी कवि श्रुति कुशवाहा के कविता संग्रह...
साहित्य-संस्कृति

डॉ. मद्री काकोटी और नेहा सिंह राठौर के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई का विरोध करें-जन संस्कृति मंच 

समकालीन जनमत
लखनऊ। जन संस्कृति मंच (जसम) ने लखनऊ विश्वविद्यालय की सहायक आचार्य डॉ. मद्री काकोटी के खिलाफ जारी किए गए कारण बताओ नोटिस और दर्ज की...
Fearlessly expressing peoples opinion