समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

कविता

अजय ‘दुर्ज्ञेय’ की कविताएँ जातिवाद के ख़िलाफ़ प्रतिरोध की मुखर आवाज़ बनकर उभरती हैं

समकालीन जनमत
जावेद आलम ख़ान युवा कवियों में अजय ‘दुर्ज्ञेय’ प्रतिरोध की मुखर आवाज बनकर उभरे हैं। इनकी कविताओं में धर्म, सत्ता और पूंजी के गठजोड़ पर...
पुस्तक

विनय सौरभ का कविता संग्रह ‘बख़्तियारपुर’ स्मृतियों के माध्यम से वर्तमान को परखने की एक सफल कोशिश है

समकालीन जनमत
प्रज्ञा गुप्ता   आज के समय में जब संबंधों की उष्मा के मायने कम हो रहे हैं; हमारी संवेदना के लिए घटनाएं मात्र एक खबर...
साहित्य-संस्कृति

कबीर और नागार्जुन भारतीय क्रांति के उदगाता कवि हैं

समकालीन जनमत
जन संस्कृति मंच, मिथिलांचल जोन का ‘ कबीर–नागार्जुन जयंती समारोह सप्ताह’ अभियान  दरभंगा। कबीर एवं जनकवि नागार्जुन की जयंती के अवसर पर जन संस्कृति मंच मिथिलांचल...
साहित्य-संस्कृति

स्मृतियों और सपनों के साथ दुनिया बदलने की चाहत है कविताओं में

 प्रगतिशील लेखक संघ एवं जन संस्कृति मंच के संयुक्त तत्वाधान में 16 जून 2024 को डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान (टीआरआई), रांची के...
स्मृति

अहर्निश संघर्षों और सकारात्मक सरोकारों के लेखक अरुण प्रकाश की याद

समकालीन जनमत
कुमार विनीताभ आज हिन्दी के लोकप्रिय कहानीकार, आलोचक और पत्रकार अरुण प्रकाश का 12वां स्मृति दिवस है। यद्यपि उन्होंने अपने लेखन की शुरुआत कविता से...
कविता

आँशी अग्निहोत्री की कविताएँ एक अंतर्मुखी प्रकृति प्रेमी स्त्री की स्वतंत्रता का आख्यान हैं

समकालीन जनमत
देवेश पथ सारिया युवा कवयित्री आँशी अग्निहोत्री की कविताएँ पढ़ते हुए तीन मुख्य बिंदु रेखांकित किए जा सकते हैं— (i) यह युवा कवयित्री अंतर्मुखी है...
पुस्तक

चंचल चौहान की आलोचना पुस्तक ‘ साहित्य का दलित सौन्दर्यशास्त्र ’ पर हुई विचारगोष्ठी

समकालीन जनमत
जनवादी लेखक संघ और दलित लेखक संघ के संयुक्त तत्वावधान में 8 जून को कनॉट प्लेस दिल्ली स्थित आंबेडकर सभागार में चंचल चौहान लिखित आलोचना...
कविता

नाज़िश अंसारी की कविताएँ लैंगिक और धार्मिक मर्यादाओं से युद्धरत हैं

विपिन चौधरी   बहरहाल.. गाय-वाय-स्त्री-विस्त्री-योनि-वोनि कुछ नहीं होना मुझे मुझे मेरे होने से छुट्टी चाहिए (मुझे छुट्टी चाहिए) नाज़िश अंसारी की कविताएँ उस युवा सोच...
कविता

संदीप नाईक की कविताएँ स्मृतियों को बचाए रखने की कोशिशें हैं

समकालीन जनमत
पुरु मालव समस्त कलाएँ और विधाएँ परस्पर भिन्न होते हुए भी एक दूसरे के क्षेत्र का अतिक्रमण करती हैं क्योंकि अभिव्यक्ति का मूल तत्व इन...
पुस्तक

चुनाव के छल-प्रपंच: मतदाताओं की सोच बदलने का कारोबार!

पुस्तक- चुनाव के छल प्रपंच लेखक – हरजिंदर (प्रतिष्ठित पत्रकार, समाज के गंभीर मुद्दों को उजागर करने के लिए प्रयासरत) प्रकाशन – नवारुण क्या आने...
कविता

महादेव टोप्पो की कविताएँ आदिवासियत बचाने का संकल्प हैं

समकालीन जनमत
प्रज्ञा गुप्ता महादेव टोप्पो साहित्य में आदिवासी विमर्श के प्रमुख स्वरों में एक हैं। महादेव टोप्पो स्पष्ट सोच एवं संवेदना के साथ अपनी अनुभूतियों को...
जनमतशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

निराला का वैचारिक लेखन: राष्ट्र निर्माण का सवाल और गांधी

दुर्गा सिंह
निराला राष्ट्रीय आंदोलन से गहरे सम्बद्ध थे। वे ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की नीतियों पर टिप्पणी, आलोचना तो करते ही थे, साथ ही राष्ट्रीय आंदोलन के...
स्मृति

समकालीन जनमत की तरफ से कामरेड कवि सुरजीत सिंह पातर को श्रद्धांजलि

समकालीन जनमत
“तब मुझे क्या पता था कहने वाले सुनने वाले इस तरह पथराएँगे कि शब्द निरर्थक से हो जाएँगे, कॉमरेड कवि सुरजीत सिंह पातर नहीं रहे।...
कविता

सौम्य मालवीय की कविताएँ प्रतिरोधी चेतना से संपन्न हैं।

समकालीन जनमत
ललन चतुर्वेदी सौम्य की कविताओं को पढ़ते हुए पूरे विश्वास से कह सकता हूँ कि उनकी कविताओं की प्रतिरोधी चेतना में एक न‌ई धार आयी...
जनमतपुस्तकसाहित्य-संस्कृति

उम्मीद की रौशनी दिखाती कविताएँ

दीना नाथ मौर्य ‘सहसा कुछ नहीं होता’ बसंत त्रिपाठी का ज्ञानपीठ से प्रकाशित संग्रह है. ‘स्वप्न से बाहर, सन्नाटे का स्वेटर, हम चल रहे हैं....
कविता

आदित्य शुक्ल की कविताएँ सर्जनात्मकता की आँच में तप कर निखरी हैं

निरंजन श्रोत्रिय विद्रूपताओं के प्रति हर गुस्सा यूँ तो जायज है लेकिन यदि उसे सर्जनात्मक आँच में और तपा दिया जाए तो फिर वह सार्थक...
जनमतपुस्तकसाहित्य-संस्कृति

किताब पर बातचीत: पहाड़गाथा

इलाहाबाद, शहर के मेयो हाॅल स्थिति अंजुमन ए रूहे अदब के सभागार में किताब पर बातचीत  के अंतर्गत ‘पहाड़गाथा’ उपन्यास पर बातचीत आयोजित की गयी।  शुरुआत...
जनमतशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

जमींदारी उन्मूलन, भूमि-सुधार और मार्कण्डेय की कहानियाँ

दुर्गा सिंह
 (हिन्दी कहानी के प्रमुख हस्ताक्षर मार्कण्डेय के जन्मदिन पर समकालीन जनमत के पाठकों के लिए प्रस्तुत है दुर्गा सिंह का लेख) मार्कण्डेय की कहानी ‘भूदान’...
कविता

ब्रज श्रीवास्तव की कविताएँ समकालीन बोध से संपृक्त हैं

समकालीन जनमत
ख़ुदेजा ख़ान   समय बदलता है और बदल जाता है हमारे आसपास का परिवेश, वातावरण, पर्यावरण, संबंध और सामाजिक सरोकार इतना ही नहीं आर्थिक, राजनीतिक...
जनमतशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

निराला का वैचारिक लेखन: राष्ट्र निर्माण का सवाल और नेहरू

दुर्गा सिंह
निराला कवि और लेखक होने के साथ चिंतक भी हैं। निराला का वैचारिक लेखन भी उसी मात्रा में है, जितना कविता और गद्य लेखन। निराला...
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