समकालीन जनमत

Category : ज़ेर-ए-बहस

ज़ेर-ए-बहस

देश को चाहिए प्रजातांत्रिक शासन ना कि मज़बूत नेतृत्व

समकालीन जनमत
इरफ़ान इंजीनियर भारतीय वायुसेना द्वारा 26 फरवरी 2019 को पाकिस्तान के बालाकोट पर हमले के बाद से, ऐसा लगता है कि भाजपा, मजबूत नेता और...
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एम.सी.एम.सी-मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी या मोदी सर्टिफिकेशन एंड मैनिजिंग कमेटी !

ऐन चुनाव के मौके पर देश में प्रतिबंधित शब्दों की एक नयी सूची जारी कर दी गयी है. इस नयी सूची के अनुसार- नरेंद्र मोदी,...
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अर्धकुंभ के दावे की पोल खोलती गंगा !

विमल भाई
“ हमें गंगा से कुछ लेना नहीं बल्कि गंगा को देना है” बनारस के सांसद व स्वयम्भू गंगा पुत्र के शब्द अपने अर्थ को उल्टा...
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देश के 12 करोड़ लोगों के पास कोई काम नहीं

लखनऊ. हर हफ्ते रविवार को होने वाली शीरोज़ बतकही की 37 वीं कड़ी, बेरोजगारी समस्या और समाधान पर केंद्रित रही। बातचीत को शुरू करते हुए...
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दिव्य कुंभ: प्रजातियों, पीढ़ियों की सीमा लाँघ नसों में बहता रहेगा जहर

के के पांडेय
विज्ञापन, बाजार, मेहनत की लूट, हिंदुत्व की राजनीति का अर्ध कुंभ ।अब तक का सर्वाधिक सरकार प्रायोजित यह मेला तो अब उठने वाला है लेकिन अपने...
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दिव्य कुंभ: कर्म कर फल की इच्छा मत रख,  मेहनत कर मेहनताने की इच्छा मत कर-‘सुंदरी’

के के पांडेय
19 फरवरी रविदास जयंती के दिन भी मैंने दलित संतों के अपमान की कथा कही थी और 23 फरवरी की रात भी अपने लेख में...
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10 लाख से अधिक वनवासियों को जंगलों से बेदखल करने का आदेश

कागजों पर लिखी इबारत कितनी मारक हो सकती है, इसको उच्चतम न्यायालय के उस फैसले से समझा जा सकता है, जिसमें 10 लाख से अधिक...
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दिव्य कुंभ: जाति ही पूछो साधु की उर्फ दलित संतों की अपमान गाथा  

के के पांडेय
19 फरवरी, संत रविदास की जयंती है आज और इलाहाबाद में लगे अर्ध कुंभ में माघी पूर्णिमा का प्रमुख स्नान भी । आस्था का यह...
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पुलवामा हमले से उठे सवाल

इन्द्रेश मैखुरी
14 फरवरी को सी.आर.पी.एफ के काफिले पर घात लगा कर हमला किया गया,वह बेहद निंदनीय है. पूरे देश में इसको लेकर जो आक्रोश है, वह...
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दिव्य कुंभ: इन मुसलामानों का क्या करेंगे योगी जी ?

के के पांडेय
जब संसद के भीतर अपने पहले ही भाषण में एक प्रधानमन्त्री 1200 साल की गुलामी से मुक्ति घोषणा कर रहा हो, चुनावों के समय डीएनए...
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खतरे में है लोकतंत्र, संविधान और संघवाद

रवि भूषण
हमारा देश जिस खतरनाक दौर से गुजर रहा है, उससे उसे निकालने का एक मात्र मार्ग चुनाव नहीं है। चुनावी राजनीति ने सत्तालोलुपों को किसी...
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स्वच्छ कुंभ की गंदी कथा

के के पांडेय
आज गांधी के पुतले पर गोली चलाई जा रही है लेकिन चार साल पहले ही उनकी नज़र का चश्मा इज्जत घर की खूंटी पर टांग...
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बुद्धिजीवी, राज्य, पुलिस और अदालत

रवि भूषण
नवउदारवदी अर्थ व्यवस्था के विकसित दौर में कोई भी क्षेत्र पूर्ववत नहीं रहा है। उसने राज्य की भूमिका बदली और राज्य जनोन्मुख न रहकर काॅरपोरेटोन्मुख...
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कहाँ तो तय था चिराग़ाँ हर एक घर के लिए……..

इन्द्रेश मैखुरी
कहाँ तो तय था चिराग़ाँ हर एक घर के लिए कहाँ चिराग मयस्सर नहीं शहर भर के लिए सत्ता में आने से पहले जो कई...
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दिव्य कुम्भ: एक शहर की हत्या

समकालीन जनमत
के के पांडेय जब शहर के तमाम चौराहों पर लगी बड़ी बड़ी एल सी डी की स्क्रीन पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इतिहास का एक प्रोफेसर...
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‘ठाकरे’ नवाजुद्दीन की विस्फोटक प्रतिभा की विफलता का स्मारक क्यों है?

आशुतोष कुमार
आशुतोष कुमार  अगर आप बाल ठाकरे और उनकी राजनैतिक शैली के प्रति पहले से ही भक्तिभाव से भरे हुए नहीं हैं, तो फिल्म’ठाकरे’ आपको हास्यास्पद...
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जुटान या महागठबन्धन ?

रवि भूषण
कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउण्ड में 19 जनवरी को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी द्वारा आयोजित महारैली में विपक्ष...
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राजद्रोह : ब्रिटिश भारत का कानून

रवि भूषण
दिल्ली पुलिस ने लगभग तीन वर्ष बाद ‘भारत विरोधी नारे’ लगाने के आरोप में जे एन यू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार तथा...
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124 वां संविधान संशोधन विधेयक

रवि भूषण
17 वें लोकसभा चुनाव के कुछ महीने पहले सोमवार 7 जनवरी को केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में सामान्य श्रेणी में आर्थिक रूप से पिछड़ों को...
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राजग के स्वर्णिम दिन बीत चुके हैं ?

रवि भूषण
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन का इतिहास बहुत पुराना नहीं है। मई 1998 में 12 वीं लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए भाजपा ने अन्य दलों के...
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