समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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पुस्तक

संजीव कौशल के कविता संग्रह ‘फूल तारों के डाकिए हैं’ की पुस्तक समीक्षा

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पवन करण आदमी के अपराध औरत की भेंट चाहते हैं यह सबक वह पिट-पिटकर सीख रही है- संजीव कौशल की कविता की स्त्रियों से (...
कविता

बाबासाहेब भीमराव आम्‍बेडकर की जयंती पर जसम ने किया काव्‍य-गोष्‍ठी का आयोजन

समकालीन जनमत
नई दिल्ली। बाबासाहेब भीमराव आम्‍बेडकर की जयंती पर जन संस्कृति मंच (जसम) के द्वारा  काव्‍य-गोष्‍ठी का आयोजन भाकपा माले के सांसद सुदामा प्रसाद के दिल्ली आवास...
जनमतदुनिया

ट्रेड, टैरिफ, ट्रंप और ट्रम्फेट

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जयप्रकाश नारायण  डोनांल्ड ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति चुने जाने के बाद से ही विश्व में एक खास तरह की हलचल देखी जा रही है...
जनमत

भारत का संविधान : जन अधिकार और लोकतान्त्रिक मूल्यों का प्रतिबिम्ब

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रामायन राम  (संविधान निर्माता डाॅ. भीमराव अम्बेडकर की 134वीं जयन्ती पर भारतीय संविधान में जनता के अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के निर्माण  को लेकर लिखा...
पुस्तक

रूपम मिश्र के काव्य संग्रह ‘एक जीवन अलग से’ की समीक्षा

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पवन करण एक अभुआता समाज कायनात की सारी बुलबुलों की गर्दन मरोड़ रहा है….! रुपम मिश्र की कविताएँ हिंदी कविता की समृद्धि की सूचक हैं।...
कविता

देवेंद्र कुमार चौधरी की कविताएँ प्रेम की तरल संवेदना की अभिव्यक्ति हैं

समकालीन जनमत
पंकज चौधरी प्रेम की तरल संवेदना के कवि हैं देवेंद्र कुमार चौधरी। देवेंद्र को पढ़ते हुए केदारनाथ अग्रवाल याद आते है। केदारनाथ अग्रवाल इसलिए क्योंकि...
जनमत

राहुल सांकृत्यायन की जयंती पर परिचर्चा का हुआ आयोजन

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आज़मगढ़ के रैदोपुर स्थित राहुल चिल्ड्रेन एकेडमी में राहुल सांकृत्यायन की जयंती पर परिचर्चा का आयोजन हुआ। ‘सनातन, बौद्ध धर्म और आज का समय(सन्दर्भः राहुल...
कविता

सोनम यादव की कविताएँ सघन संवेदनाओं से संतृप्त हैं

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शिरोमणि महतो सोनम यादव एक संभावनाशील व अतीव संवदेनशील युवाकवि हैं। संवेदनशीलता स्त्रियों का नैसर्गिक गुण है। किन्तु सोनम की संवदेना ज़्यादा सघन और सांद्र...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति

जसम ने किया घर-गोष्ठी का आयोजन

समकालीन जनमत
इलाहाबाद, जन संस्कृति मंच ने एक अप्रैल को घरेलू गोष्ठी का आयोजन किया। गोष्ठी का विषय कविता पाठ एवं परिचर्चा था, जिसमें कविता पाठ के लिए...
जनमत

संघीय ढांचे का उल्लंघन करता उत्तराखंड का यूसीसी

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इंद्रेश मैखुरी    अंततः उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 से यूसीसी लागू कर दिया गया है. 2022 में उत्तराखंड विधानसभा के चुनावों से पहले भाजपाई...
जनमत

युवाओं की जेब और संघियों का औरंगज़ेब

समकालीन जनमत
आजकल आरएसएस ने अपने आनुसांगिक संगठनों और कार्यकर्ताओं द्वारा  औरंगजेब की कब्र के खिलाफ युद्ध छेड़ रखा है। जिसकी कमान  बजरंग दल और विश्व हिंदू...
कहानी

बंद दरवाज़ा: विनीता बाडमेरा की कहानी

समकालीन जनमत
बंद दरवाज़ा विनीता बाडमेरा की कहानी सामान्य मनुष्यों के पास भी हजारों कहानियाँ होती हैं पर वह कहानी कह नहीं पाता,लिख नहीं पाता। कहानीकार उन्हीं...
कविता

वसुंधरा यादव की कविताएँ मनुष्य-जीवन के संगीत के प्रति सघन आस्था से लबरेज़ हैं

तनुज कुमार कविता की दुनिया में रचनात्मक कदम-ताल की इतिश्री के कई रास्ते हैं. यहाँ अभिजात्य और कुरूप के बीच द्वंद्व भी है और साम्य...
कहानी

अरहर की दाल ( कहानी)

समकालीन जनमत
आलोक कुमार श्रीवास्तव  एंड्रॉएड फोन पास न होने का दर्द इन दिनों अक्सर ही सतह पर आ जाता है। मन में एक कचोट-सी उठती है।...
जनमत

बिहार चुनाव भारत के लिए बेहद अहम- दीपांकर भट्टाचार्य

समकालीन जनमत
भाकपा (माले) महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य बताते हैं कि बिहार का चुनाव भारत के भविष्य के लिए बेहद अहम है.यह चुनाव देश के संविधान, आज़ादी और...
कहानी

आला-बाला-मकड़ी का जाला

समकालीन जनमत
अमित श्रीवास्तव  (इस कहानी को एआई -चैट जीपीटी- 04 O- के सहयोग से लिखा गया है।) साहिबान-ए-करम, मेहरबान, और कद्रदान! मैं हूँ दास्ताँ तराश—एक अदना...
कविता

सुप्रिया मिश्रा की कविताएँ प्रेम में सहारे की नहीं साथीपन की तलाश हैं

समकालीन जनमत
नाज़िश अंसारी अनुभव सिन्हा निर्देशित “तुम बिन” फिल्म की ग़ज़ल “कोई फ़रियाद तेरे दिल में दबी हो जैसे” में बहुत पहले ही हीरो ने हीरोइन...
ज़ेर-ए-बहस

इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला स्तब्धकारी

समकालीन जनमत
दिनांक 17 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश राम मनोहर नारायण मिश्र के द्वारा नाबालिग बच्ची के खिलाफ यौन शोषण के मामले में अपने...
ज़ेर-ए-बहस

‘प्रोजेक्ट चीता’ मनुष्यों और पशुओं दोनों के लिये अनैतिक एवं अनुचित हैः अध्ययन  

आथिरा पेरिंचेरी स्थानीय लोगों से इस प्रोजेक्ट के बारे में न तो कोई सलाह-मशविरा किया और न ही उन्हें इसकी कोई जानकारी ही दी गयी...
कविता

शिवांगी गोयल की कविताएँ और स्त्री अस्तित्व का आधुनिक स्वर

समकालीन जनमत
माया मिश्र आज जब हम इक्कीसवीं सदी का एक चौथाई हिस्सा जी चुके हैं तब यह प्रश्न अपने समूचेपन में हमारे सामने बार बार खड़ा...
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