समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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कविताजनमत

सुघोष मिश्र की कविता वर्तमान की जटिलताओं से उपजे द्वंद्व की अभिव्यक्ति है

समकालीन जनमत
आलोक रंजन सुघोष मिश्र की कविताओं को पढ़कर लगा कि उनकी कविताओं से परिचय कराना सरल कार्य नहीं है । इसके पीछे का एक सीधा...
जनमतशख्सियतस्मृति

हमारे समय का सबसे ज़िंदादिल कथाकार चला गया

समकालीन जनमत
मिहिर पंड्या ‘अशोक और रेणु की असली कहानी’, ‘क्या तुमने कभी सरदार भिखारी देखा है’ जैसी अनेक अविस्मरणीय कहानियाँ लिखने वाले महत्वपूर्ण कथाकार स्वयंप्रकाश जी...
ख़बरजनमत

हैदराबाद फ़र्जी एनकाउंटर पर ऐपवा का बयान : हिरासत में हत्या हमारे नाम पर न हो

समकालीन जनमत
हम, महिला आंदोलन के कार्यकर्ता, महिलाओं के लिए वास्तविक न्याय की मांग करते हैं। हम चाहते हैं कि पुलिस अपना काम करे, और महिलाओं के...
कविताजनमत

भाषा के अनोखे बर्ताव के साथ कविता के मोर्चे पर चाक चौबंद कवि कुमार विजय गुप्त

समकालीन जनमत
नवनीत शर्मा इस कवि के यहां अनाज की बोरियों का दर्द के मारे फटा करेजा नुमायां होता है…। यह उन शब्दों की तलाश में है...
जनमतशख्सियतस्मृति

भोजपुर के चमकते लाल सितारे

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  शहादत की 44वीं बरसी : कॉ. जौहर, कॉ. निर्मल व कॉ. रतन को लाल सलाम! आज 29 नवंबर है। 1975 में आज ही के दिन भाकपा-माले...
ख़बरजनमत

हमारा हाथ जेएनयू के साथ

समकालीन जनमत
27नवंबर, इलाहाबाद शिक्षा के निजीकरण व कैंपसों में दमन पर तत्काल रोक लगाने की मांग को लेकर इलाहाबाद में प्रतिवाद मार्च जेएनयू में फीस वृद्धि...
ख़बरजनमत

शिक्षा के निजीकरण, जेएनयू पर हमले और बीएचयू के साम्प्रदायीकरण की कोशिश के ख़िलाफ़ आज़मगढ़ में प्रतिवाद मार्च

समकालीन जनमत
आज़मगढ़, 27 नवम्बर 2019 शिक्षा के निजीकरण, जेएनयू पर हमले और बीएचयू के साम्प्रदायीकरण की कोशिश के खिलाफ आज़मगढ़ में नागरिक मंच के बैनर तले...
जनमतपुस्तक

स्त्री कविता: पहचान और द्वंद्व

समकालीन जनमत
डॉ. रेखा सेठी ने वर्तमान की जटिलताओं एवं अंतर्विरोधों को समझने के क्रम में स्त्री रचनाशीलता के विविध आयामों को व्याख्यायित एवं विश्लेषित करने का...
कविताजनमत

बबली गुज्जर की कविताएँ ‘औरत के मन की राह’ को एसर्ट करती हैं

समकालीन जनमत
अमरेंद्रनाथ त्रिपाठी प्रेम इन कविताओं में आवर्ती विषयवस्तु की तरह है। इसी के जरिये रचनाकार अन्य जरूरी संवेदनात्मक पक्षों पर भी मुखर हुआ है। एक...
जनमतशख्सियतस्मृति

अलविदा शौक़त आपा

समकालीन जनमत
अली जावेद कैफी़ ने कहा था: एलान-ए-हक़ में ख़तर-ए-दार-ओ-रसन तो है लेकिन सवाल ये है कि दार-ओ-रसन के बाद? याद कीजिये तरक़्की़पसंद अदबी तहरीक का...
ख़बरजनमत

जेएनयू छात्र आंदोलन के समर्थन में दिल्ली में हुए नागरिक मार्च को मिला देशव्यापी समर्थन

समकालीन जनमत
पुरूषोत्तम शर्मा जेएनयू में फ़ीस वृद्धि के ख़िलाफ़ चल रहे छात्र आन्दोलन ने एक मज़बूत और बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। 18 नवम्बर को...
जनमतपुस्तक

स्त्री रचनाशीलता को समझने की एक कोशिश

समकालीन जनमत
रेखा सेठी स्त्री लेखन, स्त्री की चिंतनशील मनीषा के विकास का ही ग्राफ है जिससे सामाजिक इतिहास का मानचित्र गढ़ा जाता है और जेंडर तथा...
ज़ेर-ए-बहस

गांधी बनाम गांधी

समकालीन जनमत
यह वर्ष महात्मा गांधी की 150वीं जयंती का वर्ष है.  इस वर्ष में गांधी को लेकर अलग अलग नजरिये से बातें हो रही हैं। गांधी...
कविता

अर्पिता राठौर की कविताएँ लघुता की महत्ता की अभिव्यक्ति हैं

समकालीन जनमत
साक्षी सिंह अर्पिता की कलम एकदम नई है और ख़ुद को अभिव्यक्त करने की बेचैनी से ज़्यादा जो अभिव्यक्त है उसके हर सम्भव आयाम को...
ख़बर

‘कश्मीर में दमन के सौ दिन’ लखनऊ में महिला और नागरिक संगठनों ने दिखाई एकजुटता

समकालीन जनमत
मीना सिंह आज दिनांक 13नवंबर को कश्मीरी अवाम के ख़िलाफ़ हुई सरकारी दमन के 100 दिन पूरे हुए हैं। उनके सवालों पर एकजुटता दिखाने के...
कविता

नबनीता देब सेन की कविताओं में प्रेम और रिश्तों की अभूतपूर्व संवेदनाओं और द्वंद्वों को स्वर मिला है

समकालीन जनमत
मीता दास बंगाली साहित्य की प्रमुख लेखिका नबनीता देब सेन 81 साल की थीं। पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित लेखिका ने 7/11/19 गुरुवार की शाम 7.30...
जनमतज़ेर-ए-बहस

अयोध्‍या में विवादित भूमि के मालिकाने के मुकदमे में सर्वोच्‍च न्‍यायालय के फैसले पर भाकपा(माले) पोलितब्‍यूरो का बयान

समकालीन जनमत
नई दिल्‍ली 9 नवम्‍बर. यह महत्‍वपूर्ण है कि अयोध्‍या में विवादित स्‍थल पर सर्वोच्‍च न्‍यायालय का फैसला किसी भी तरह से 6 दिसम्‍बर 1992 को...
कविताजनमत

वीरेनियत 4: सन्नाटा छा जाए जब मैं कविता सुनाकर उठूँ

समकालीन जनमत
पंकज चतुर्वेदी ‘वीरेनियत-4’ के अन्तर्गत इंडिया हैबिटेट सेण्टर, नयी दिल्ली में शुभा जी का कविता-पाठ सुना। उनकी कविताएँ समकालीन परिस्थितियों से उपजे इतने गहन तनाव...
कविताजनमत

वीरेनियत 4: अनसुनी पर ज़रूरी आवाज़ों का मंच

समकालीन जनमत
अदनान कफ़ील ‘दरवेश’ कल ‘वीरेनियत’ के चौथे संस्करण में जाने का मौक़ा मिला। दिल्ली की आब-ओ-हवा में इस वक़्त ज़हर की तासीर घुली हुई है।कुहेलिका...
कविताजनमत

वीरेनियत 4: जहाँ कविता के बाद का गहन सन्नाटा बजने लगा

समकालीन जनमत
आशुतोष कुमार दिन वैसे अच्छा नहीं था। दिल्ली आसपास का दम काले धुंए में घुट रहा था। छुट्टियों के कारण बहुत से दोस्त शहर से...
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