Author : नवीन जोशी

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नवीन जोशी ने ‘स्वतंत्र भारत’, ‘नवभारत टाइम्स’, ‘दैनिक जागरण’, ‘हिंदुस्तान’ और ‘दैनिक भास्कर’ अखबार में करीब चालीस साल तक पत्रकारिता की. इसके अलावा 1980 के दशक में अपने समकालीन कुमाउँनी युवाओं के साथ मिलकर बेहद सक्रियता वाली सांस्कृतिक संस्था 'आंखर' को भी चलाया . ‘हिंदुस्तान ’ के लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के सभी संस्करणों के कार्यकारी सम्पादक पद से सेवानिवृत्त होने के बाद वे स्वतंत्र रूप से लेखन और पत्रकारिता कर रहे हैं. उनके दो कहानी संग्रहों और दो चर्चित उपन्यासों- ‘दावानल’ और ‘टिकटशुदा रुक्का’ समेत छह पुस्तकें प्रकाशित हैं.
ये चिराग जल रहे हैं

नंदकुमार उप्रेती- महानगर में एक भोला-निष्कपट पहाड़ी

( वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक नवीन जोशी के प्रकाशित-अप्रकाशित संस्मरणों की  श्रृंखला ‘ये चिराग जल रहे हैं’ की  ग्यारहवीं  क़िस्त  में  प्रस्तुत  है  लखनऊ  महानगर...
ये चिराग जल रहे हैं

राजेंद्र माथुर :  हिंदी पत्रकारिता के आकाश में चमचमाता सितारा

नवीन जोशी
( वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक नवीन जोशी के प्रकाशित-अप्रकाशित संस्मरणों की  श्रृंखला ‘ये चिराग जल रहे हैं’ की  दसवीं   क़िस्त  में  प्रस्तुत  है  प्रखर  हिंदी ...
ये चिराग जल रहे हैं

मोहिनी दी उर्फ माता महेश गिरि

नवीन जोशी
( वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक नवीन जोशी के प्रकाशित-अप्रकाशित संस्मरणों की  श्रृंखला ‘ये चिराग जल रहे हैं’ की  नवीं क़िस्त  में  प्रस्तुत  है  उनके गाँव ...
ये चिराग जल रहे हैं

बाबू और जामुन का यह पेड़

नवीन जोशी
( वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक नवीन जोशी के प्रकाशित-अप्रकाशित संस्मरणों की  श्रृंखला ‘ये चिराग जल रहे हैं’ की  आठवीं  क़िस्त  में  प्रस्तुत  है  प्रकृति  और...
ये चिराग जल रहे हैं

सल्लाम वाले कुम, केशव अनुरागी

नवीन जोशी
( वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक नवीन जोशी के प्रकाशित-अप्रकाशित संस्मरणों की  श्रृंखला ‘ये चिराग जल रहे हैं’ की  सातवीं  क़िस्त  में  प्रस्तुत  है   ‘ढोल  सागर...
ये चिराग जल रहे हैं

जीत जरधारी- टिहरी के प्रजामण्डल आंदोलन से हिंदी रंगमंच तक

नवीन जोशी
( वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक नवीन जोशी के प्रकाशित-अप्रकाशित संस्मरणों की  श्रृंखला ‘ये चिराग जल रहे हैं’ की  छठी क़िस्त  में  प्रस्तुत  है   टिहरी के...
ये चिराग जल रहे हैं शिक्षा

शुक्रिया, छंगा मास्साब, बहुत शुक्रिया!

नवीन जोशी
( वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक नवीन जोशी के प्रकाशित-अप्रकाशित संस्मरणों की  श्रृंखला ‘ये चिराग जल रहे हैं’ की  पांचवीं  क़िस्त  में  प्रस्तुत  है   नवीन   जोशी ...
ये चिराग जल रहे हैं

जिज्ञासु : ‘ अचल ’ की परम्परा के वाहक

नवीन जोशी
( वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक नवीन जोशी के प्रकाशित-अप्रकाशित संस्मरणों की  श्रृंखला ‘ये चिराग जल रहे हैं’ की  चौथी  क़िस्त  में  प्रस्तुत  है   कुमाऊंनी भाषा ...
ये चिराग जल रहे हैं

‘अचल’ वाले जीवन चंद्र जोशी

नवीन जोशी
( वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक नवीन जोशी के प्रकाशित-अप्रकाशित संस्मरणों की  श्रृंखला ‘ये चिराग जल रहे हैं’ की  तीसरी   क़िस्त  में  प्रस्तुत  है   कुमाऊंनी भाषा...
ये चिराग जल रहे हैं

हाँ, गिर्दा, तुम्हारा होना एक दिन अवश्य सार्थक होगा

नवीन जोशी
वह बड़े सपने देखने वाला अनोखा रचनाकार था. अत्यन्त सहज, सरल और सुलभ इनसान. उसके सर्वाधिक लोकप्रिय गीतों में से एक है- ‘जैंता, एक दिन...
ये चिराग जल रहे हैं

अशोकजी : पराड़कर-युगीन पत्रकारिता का अंतिम अध्याय

नवीन जोशी
आज जब शब्द, भाषा, व्याकरण, उच्चारण सब गड्ड-मड्ड हो गये हैं, यह समझा पाना मुश्किल है कि तब पत्रकारिता में इनको कितना महत्त्वपूर्ण माना जाता...