समकालीन जनमत

Tag : स्मृति

स्मृति

कामरेड शाह चाँद की याद

रामजी राय
जाने कितनी यादे हैं कामरेड शाह चाँद की। आईपीएफ और फिर इंकलाबी मुस्लिम कान्फ्रेंस में साथ काम करने की। कामरेड तकी रहीम से नोक-झोंक फिर...
कविता

‘ आज की कविताएं आत्मचेतस व्यक्ति की प्रतिक्रिया है ’

अनिमेष फाउंडेशन लखनऊ की ओर से फ्लाइंग ऑफिसर अनिमेष श्रीवास्तव की स्मृति में ‘आज की कविता के स्वर’ एवम कविता पाठ का आयोजन किया गया....
शख्सियतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति

वीरेन डंगवाल की याद और सृजन, कल्पना, रंगों, शब्दों और चित्रों की दुनिया

डॉ. कामिनी त्रिपाठी शासकीय नवीन कन्या महाविद्यालय बैकुंठपुर में आयोजित त्रिदिवसीय ‘वीरेन डंगवाल जन्म दिन समारोह’ का समापन 8 अगस्त को छात्राओं द्वारा वीरेन दा...
ख़बरशख्सियतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति

कवि वीरेन डंगवाल के 71वें जन्मदिन पर बरस रही थी कवि की याद

समकालीन जनमत
(पांच अगस्त को हिंदी के कवि वीरेन डंगवाल का जन्म दिन होता है । देश भर में कवि की याद में हुए आयोजनों में से...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

वीरेन दा की याद: ‘नदी’ कविता के बहाने से

समकालीन जनमत
शिव प्रकाश त्रिपाठी “ लंबे और सुरीले नहीं थे मेरे गान मेरी सांसे छोटी थी पर जब भी गाए मैंने बसंत के ही गान गाए...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति

कबीर और नागार्जुन की जयंती से जन एकता सांस्कृतिक यात्रा आरम्भ

समकालीन जनमत
बेगूसराय. आज ज्येष्ठ पूर्णिमा दिनांक 28/06/2018 को जन संस्कृति मंच की ओर से कबीर और आधुनिक कबीर नागार्जुन की सम्मिलित जयंती मनायी गयी। इस जयंती...
जनमतशख्सियत

खैनी खिलाओ न यार! /उर्फ / मौत से चुहल (सखा, सहचर, सहकर्मी, कामरेड महेश्वर की एक याद)

रामजी राय
अपने प्रियतर लोगों- कृष्णप्रताप (के.पी.), गोरख, कामरेड विनोद मिश्र, महेश्वर पर चाहते हुए भी आज तक कुछ नहीं लिख सका। पता नहीं क्यों? इसकी वज़ह...
स्मृति

मेरी स्वतंत्रता किसके पास है

समकालीन जनमत
राजकिशोर एक प्रखर आधुनिक चिंतक थे. मनुष्य मात्र की स्वतंत्रता का अधिकार उनका सबसे प्यारा सरोकार था. स्वतंत्रता की उनकी अवधारणा व्यापक और मूलगामी थी....
कवितासाहित्य-संस्कृति

साक्षी मिताक्षरा की कविताएं : गाँव के माध्यम से देश की राजनीतिक समीक्षा

उमा राग
आर. चेतन क्रांति गाँव हिंदी कविता का सामान्यतः एक सुरम्य स्मृति लोक रहा है, एक स्थायी नोस्टेल्जिया, जहाँ उसने अक्सर शहर में रहते-खाते-पीते, पलते-बढ़ते लेकिन...
कविता

यहीं कही रहेंगे केदारनाथ सिंह

समकालीन जनमत
मंगलेश डबराल, वरिष्ठ कवि हिन्दी कविता की एक महत्वपूर्ण पीढी तेज़ी से विदा हो रही है. यह दृश्य  दुखद और  डरावना  है जहां ऐसे बहुत...
स्मृति

अलविदा, स्टार गुरु जी !

संजय जोशी
  मैंने 1989 के जुलाई महीने में जे एन यू के भारतीय भाषा विभाग के हिंदी विषय में एडमिशन लिया. कोर्स एम ए का था....
कविताशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

उठो कि बुनने का समय हो रहा है

समकालीन जनमत
केदारनाथ सिंह की कुछ कविताएं   मुक्ति का जब कोई रास्ता नहीं मिला मैं लिखने बैठ गया हूँ मैं लिखना चाहता हूँ ‘पेड़’ यह जानते...
साहित्य-संस्कृतिस्मृति

सुशील सिद्धार्थ के अन्दर सृजन की बहती नदी थी जिसे बाहर आना बाकी था

कौशल किशोर   सुशील सिद्धार्थ का जाना दुखद, बेहद दुखद। अविश्वसनीय सा, सदमे से भरा। हम सभी स्तब्ध हैं इसलिए कि यह कोई जाने की...
साहित्य-संस्कृतिस्मृति

लेखक-पत्रकार अनिल सिन्हा का व्यक्तित्व अनुकरणीय : सीबी सिंह

समकालीन जनमत
  अनिल सिन्हा की सातवीं पुण्यतिथि पर जन संस्कृति मंच ने लखनऊ में आयोजित किया कार्यक्रम लखनऊ.  जाने-माने पत्रकार अनिल सिन्हा जनवादी और प्रगतिशील व्यक्तित्व...
स्मृति

अनिल सिन्हा : बाहर से शान्त, भीतर धधकती आग

समकालीन जनमत
 ( क्रांतिकारी वाम राजनीति और संस्कृति -कर्म के अथक योद्धा एवं जन संस्कृति मंच के संस्थापक सदस्य अनिल सिन्हा की आज पुण्य तिथि है. उनके...
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