कवितासाहित्य-संस्कृति एक कविता: चोरी-चुप्पे [प्रकाश उदय]मृत्युंजयMay 12, 2018May 12, 2018 by मृत्युंजयMay 12, 2018May 12, 201813688 कविता 'चुप्पे-चोरी', जो एक लड़की की बहक है। यह लड़की गाँव की है, नटखट है। उसने उड़ने के लिए चिड़िया के पंख और गोता लगाने...
तस्वीरनामा सत्ता का प्रतिपक्ष रचती हैं कौशल किशोर की कविताएंसमकालीन जनमतMay 8, 2018May 8, 2018 by समकालीन जनमतMay 8, 2018May 8, 20182 2343 ‘वह औरत नहीं महानद थी’ तथा ‘प्रतिरोध की संस्कृति’ का हुआ विमोचन लखनऊ. ‘हंसो, इसलिए कि रो नहीं सकते इस देश में/हंसो, खिलखिलाकर/अपनी पूरी...
कवितासाहित्य-संस्कृति साक्षी मिताक्षरा की कविताएं : गाँव के माध्यम से देश की राजनीतिक समीक्षाउमा रागApril 24, 2018April 24, 2018 by उमा रागApril 24, 2018April 24, 201811 2934 आर. चेतन क्रांति गाँव हिंदी कविता का सामान्यतः एक सुरम्य स्मृति लोक रहा है, एक स्थायी नोस्टेल्जिया, जहाँ उसने अक्सर शहर में रहते-खाते-पीते, पलते-बढ़ते लेकिन...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति इस क्रूरता पर हम सिर्फ़ रोयेंगें नहीं: सविता सिंहउमा रागApril 20, 2018April 21, 2018 by उमा रागApril 20, 2018April 21, 201813199 सविता सिंह आज कल मेरी सैद्धांतिक समझ इस बात को समझने में खर्च हो रही है कि किसी देश में छोटी बच्चियों के साथ इतना घिनौना...
जनमत गंवई संवेदना और वैश्विक दृष्टि के कविसमकालीन जनमतMarch 21, 2018March 22, 2018 by समकालीन जनमतMarch 21, 2018March 22, 201812775 अरुण आदित्य केदारनाथ सिंह करीब चार दशक से दिल्ली में रहते हुए भी ग्रामीण संवेदना के कवि बने रहे। छल-बल की इस राजधानी में भी...
स्मृति मै गांव-जवार और उसके सुख-दुख से जुड़ा हुआ हूंमनोज कुमार सिंहMarch 20, 2018June 23, 2020 by मनोज कुमार सिंहMarch 20, 2018June 23, 202002728 (ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलने के बाद डॉ केदारनाथ सिंह से यह संक्षिप्त बातचीत टेलीफ़ोन पर हुई थी. यह साक्षात्कार दैनिक भास्कर में प्रकाशित हुआ था. )...
स्मृति अलविदा, स्टार गुरु जी !संजय जोशीMarch 20, 2018March 20, 2018 by संजय जोशीMarch 20, 2018March 20, 201802066 मैंने 1989 के जुलाई महीने में जे एन यू के भारतीय भाषा विभाग के हिंदी विषय में एडमिशन लिया. कोर्स एम ए का था....
कविताशख्सियतसाहित्य-संस्कृति उठो कि बुनने का समय हो रहा हैसमकालीन जनमतMarch 19, 2018June 23, 2020 by समकालीन जनमतMarch 19, 2018June 23, 202002508 केदारनाथ सिंह की कुछ कविताएं मुक्ति का जब कोई रास्ता नहीं मिला मैं लिखने बैठ गया हूँ मैं लिखना चाहता हूँ ‘पेड़’ यह जानते...
कवितामल्टीमीडिया यह कैसा फागुन आया है !समकालीन जनमतMarch 2, 2018April 8, 2020 by समकालीन जनमतMarch 2, 2018April 8, 202001495 ( मुजफ्फरपुर के धरमपुर गांव में भाजपा नेता द्वारा बोलेरो गाड़ी से कुचलकर 9 बच्चों को मार डालने की घटना पर कवि एवं संस्कृतिकर्मी संतोष...
कवितासाहित्य-संस्कृति जनपक्षधरता से लैस हैं कौशल किशोर की कविताएंसमकालीन जनमतFebruary 20, 2018February 26, 2018 by समकालीन जनमतFebruary 20, 2018February 26, 201812649 लखनऊ में वरिष्ठ कवि एवं संस्कृतिकर्मी कौशल किशोर का एकल काव्य पाठ और परिचर्चा का आयोजन संदीप कुमार सिंह नागरिक परिषद्, लखनऊ द्वारा इंडियन...