समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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जनमतपुस्तक

‘बैठकर काशी में अपना भूला काशाना’ : मिर्ज़ा ग़ालिब

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल ‘चिराग़-ए-दैर (मंदिर का दीया)’ मिर्ज़ा ग़ालिब की बनारस पर केंद्रित कविताओं का संकलन है जिसका मूल फारसी से सादिक ने अनुवाद किया है। चिराग़-ए-दैर की...
ग्राउन्ड रिपोर्टजनमत

दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संगठन की दो दिवसीय हड़ताल

समकालीन जनमत
दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संगठन शिक्षक समुदाय के विभिन्न सवालों को लेकर निरंतर संघर्ष के मोर्चे पर डटा हुआ है। आइए जानते हैं DUTA के संघर्ष...
कहानी

एक राजा था जो सीताफल से डरता था: प्रवीण कुमार

समकालीन जनमत
योगेंद्र आहूजा हिंदी कहानी के लिये पिछले तीन दशक रोमांचक रहे हैं । इस दौरान कहानी की दुनिया में ऐसी खलबली, उत्तेजना और बेचैनी देखी...
कविताजनमत

‘जीवन की सरलता का प्रतिनिधित्व करती हैं रविंदर की कविताएँ’

समकालीन जनमत
आलोक रंजन रविंदर कौर सचदेवा की कविताएँ सरलता को स्थापित करने के संघर्ष की कविताएँ हैं जो पहचान , प्रेम और दुनियादारी के अलग अलग...
कविताजनमत

जीने की जगह तलाशतीं सविता भार्गव की कविताएँ

समकालीन जनमत
अनुपम सिंह आजकल जब भी समय मिलता है ,कविताएँ लिखने से अधिक कविताओं के विषय में सोचती हूँ. कोई कविता क्यों अच्छी लगती हैं और...
कवितास्मृति

क्रांति के कवि, कहानीकार एवं एक्टिविस्ट नवारुण

समकालीन जनमत
मीता दास  नवारुण दा क्रांति के कवि, कहानीकार एवं एक्टिविस्ट थे, विशेषकर नवारुण दा उस घराने के कवि हैं जो लोग मनुष्य के बीच या उनके...
कविता

बच्चों की मृत्यु पर प्रतिरोध की कविताएँ

समकालीन जनमत
1. मरते हुए बच्चों के देश में जन्म दिन – देवेंद्र आर्य मेरे अनाम अपरिचित बच्चों कितना त्रासद है यह जन्मदिन इधर मर रहा है बचपन...
कविताजनमत

संघर्ष और जीवट का कवि प्रभात

समकालीन जनमत
चरण सिंह पथिक हिंदी कविता की युवा पीढ़ी में कुछ ऐसे नाम हैं जो अपनी अलग कहन के लिए जाने जाते हैं। उनमें से प्रभात...
कविता

कुमार अरुण की कविताओं की भाषा के तिलिस्म में छुपा यथार्थ 

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल माँ को समन्दर देखने की बड़ी इच्छा कि आखिर कितना बड़ा होता होगा अरे बड़ा कितना जितना हमारे पैसों और जरूरतों के बीच...
कविताजनभाषा

‘ई बिकट अंधेरे जुग मा ना, मनई मनई का देखि सके’

समकालीन जनमत
शैलेन्द्र कुमार शुक्ल आधुनिक अवधी कविता के सबसे लोकप्रिय और मशहूर कवि चंद्रभूषण त्रिवेदी ‘रमई काका’ (1914-1982) हैं। उनकी कविताओं की लोकप्रियता को लेकर आलोचकों...
कविता

गणेश की कविताओं की इमेजरी महज़ काव्य उपादान नहीं उनके कवि-व्यक्तित्व की अंतर्धाराएँ हैं

समकालीन जनमत
  निरंजन श्रोत्रिय अनूठे बिम्बों से युक्त काव्य-भाषा किसी कवि के अनुभूत जगत, संज्ञान, प्रश्नाकुलता, प्रतिभा, अभिप्राय, सरोकार और संवेदनों का प्रकट रूप होती है।...
कविता

अनुराधा सिंह की कविताओं में ‘प्रेम एक विस्तृत संकल्पना’

समकालीन जनमत
अनुपम सिंह अपने समकालीनों पर लिखते समय, उन पर कोई निर्णयात्मक वाक्य लिखना खतरा उठाने जैसा होता है. या कहें भविष्य में उसके ख़ारिज और...
जनमतज़ेर-ए-बहस

क्या आपने यह ख़बर पढ़ी है?

समकालीन जनमत
 एल. एस. हरदेनिया जब संपूर्ण देश में लोकतंत्र का यज्ञ चल रहा था उस दरम्यान हमने दो महत्वपूर्ण आहुतियां दीं। एक आहुति दी गई देश के चौकीदार...
कविताजनमत

‘मिथिलेश की कविताएँ हमारे समय के आसन्न खतरों के प्रति आगाह करती हैं’

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय  युवा कवि मिथिलेश कुमार राय की कविताएँ छोटे-छोटे वाक्य विन्यास के जरिये कविता का वह संसार रचती है जो बहुत सहज और आत्मीय...
साहित्य-संस्कृति

लोक की उजास अक्ति तिहार

भुवाल सिंह  (आज अक्ति है। अक्ति अर्थात लोक की उत्सवधर्मिता का आरंभ। छत्तीसगढ़ का यह लोकपर्व दो कारणों से मन को संवेदित करता है। प्रथम,यह...
जनमतशख्सियत

नौशाद की याद में

अभिषेक मिश्रा “रंग नया है लेकिन घर ये पुराना है ये कूचा मेरा जाना पहचाना है क्या जाने क्यूं उड़ गए पंछी पेड़ों से भरी बहारों...
कविताजनमत

‘गगन गिल ‘मातृमूलक’ दुःखों और उदासियों को रचने वाली कवयित्री हैं’

अनुपम सिंह गगन गिल ने कविता में अपने ज़िम्मे जो काम लिया है, वह है स्त्री की पारम्परिक नियति को उद्घाटित करना. प्रकृति में इतने...
जनमतसिनेमा

फायरब्रांड :एक और पॉइंट ऑफ व्यू प्रस्तुत करती फ़िल्म

अम्बरीश त्रिपाठी प्रियंका चोपड़ा के प्रोडक्शन और अरुणाराजे के निर्देशन में बनी फिल्म ‘फायरब्रांड’ नेटफ्लिक्स पर फ़रवरी में प्रदर्शित हुई थी। मराठी फ़िल्म ‘धग’ के...
जनमतशख्सियत

सत्यजित रे का वैज्ञानिक स्वरुप

अभिषेक मिश्र साहित्य और सिनेमा की अविस्मरणीय विभूति सत्यजित रे (2 मई 1921–23 अप्रैल 1992 ) का आज 98 वाँ जन्मदिन है. इस मौके पर उन्हें याद...
जनमतशख्सियत

पहली महिला कुली, दलित महिला आंदोलन नेत्री जाई बाई चौधरी

अनिता भारती दलित समाज की एक महान समाज-सुधारिका व लेखिका ‘जाईबाई चौधरी’ का नाम बहुत कम लोगों ने सुना होगा। उनका जन्म ‘महार’ जाति में...
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